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बिहार के महादलित मुसहर बच्चों को मुफ्त शिक्षा बांटने वाली 20 साल की छोटी

Posted by Rachana Priyadarshini in Hindi, Inspiration, Society
January 10, 2018

बिहार में मुसहर जाति को महादलित श्रेणी के तहत वर्गीकृत किया है, उन्हें आज भी ‘अछूत’ होने का दंश झेलना पड़ता है। उनके कल्याण की बात सोचना तो दूर की बात, अभी भी उच्च तबके के ज़्यादातर लोग उनसे सीधे मुंह बात करना पसंद नहीं करते। ऐसे में उच्च जाति से संबंध रखने वाली ‘छोटी’ द्वारा उन्हें शिक्षित एवं जागरूक करने का बीड़ा उठाना वाकई काबिलेतारीफ है।

अपने इस काम की वजह से बिहार के भोजपुर ज़िले की रहने वाली 20 वर्षीय छात्रा छोटी कुमारी सिंह आज दुनिया भर के लिए एक मिसाल बन गई हैं। इसके लिए स्विट्जरलैंड स्थित ‘वुमेंस वर्ल्ड समिट फाउंडेशन’ ने उन्हें वुमेंस क्रियेटिविटी इन रूरल लाइफ अवॉर्ड से सम्मानित भी किया।

उन्हें यह सम्मान अपने इलाके में मुसहर जाति जैसे अति पिछड़े वर्ग के बच्चों को शिक्षित करने के लिए दिया गया है। छोटी को एक हज़ार डॉलर (करीब 65 हजार रुपए) का कैश प्राइज़ भी मिला है, छोटी इस सम्मान को पाने वाली सबसे युवा कैंडिडेट हैं।

फोटो आभार: फेसबुक पेज Amma

ज्ञात हो कि ‘वुमेंस वर्ल्ड समिट फाउंडेशन’ समाज में गरीबी खत्म करने, महिलाओं के खिलाफ हिंसा को रोकने और पर्यावरण के लिए काम करने वाली महिलाओं को सम्मानित करता है। इस फाउंडेशन की स्थापना 1994 में हुई थी जो अब तक 100 देशों की 432 महिलाओं को सम्मानित कर चुका है।

बचपन से ही मन में उठते थे कई सवाल

छोटी कुमारी सिंह का जन्म बिहार के भोजपुर ज़िले के रतनपुर गांव के एक राजपूत परिवार में हुआ था। बचपन से स्कूल से लौटते हुए वह अक्सर कुछ बच्चों को बाग-बगीचे और सड़क किनारे धूल-मिट्टी में खेलते हुए देखती। बच्चों से बात करने पर उन्हें पता चला कि उनमें से ज़्यादातर बच्चे स्कूल नहीं जाते। उनके मां-बाप दैनिक मजदूरी करते हैं, घर में कोई रहता नहीं, इसलिए वे मस्ती करते हैं। छोटी ने जब अपने घर में इस बारे में बताया, तो उन्हें पता चला कि गरीब होने की वजह से उन बच्चों के माता-पिता उन्हें स्कूल भेजने में असमर्थ हैं।

छोटी यह बात जानकर बेहद आहत हुई, आठवीं क्लास तक पहुंचते-पहुंचते उन्होंने तय कर लिया कि वह ऐसे बच्चों को पढ़ाने का काम करेंगी जो पैसे के अभाव में स्कूल नहीं जा पाते। वर्ष 2014 में अपने गांव रतनपुर से छोटी ने इस काम की शुरुआत की।

आध्यात्मिक गुरु से मिली पढ़ाने की प्रेरणा

छोटी कुमारी सिंह, माता अमृतानंदमयी मठ के साथ जुड़ी हुई हैं। माता अमृतानंदमयी मठ ने बिहार के पांच गांवों को गोद लिया है, इनमें से दो गांवों रतनपुर और हदियाबाद में उक्त कार्यक्रम शुरू किया गया है। छोटी के अनुसार, मुसहर जाति के बच्चों को पढ़ाने की प्रेरणा उन्हें उनकी आध्यात्मिक गुरु के पास जाने से मिली। अब वह बिहार के मुसहर समाज के बच्चों को पढ़ाती हैं, खासकर उन वर्ग के बच्चों को जिनके अभिभावकों के पास ज़मीन तक नहीं है और जो सिर्फ मज़दूरी करके अपना गुज़र-बसर करते हैं। 100 बच्चों से शुरू किया गया ट्यूशन देखते ही देखते 1000 बच्चों से ज़्यादा का हो गया। छोटी पिछले तीन वर्षों से यह काम कर रही हैं।

बच्चों के साथ बड़ो की जिंदगी भी संवारी

छोटी बच्चों को पढ़ाने के साथ उनके परिवार की ज़िंदगी भी संवारना चाहती हैं। उन्होंने पाया कि ऐसे परिवारों के ज़्यादातर पुरुष जुआ खेलने और शराब पीने के आदी हैं। इसी वजह से छोटी को उन्हें बच्चों की शिक्षा का महत्व समझाने और इसके लिए प्रेरित करने के लिए काफी जद्दोजहद करनी पड़ी। शुरुआत में समुदाय के ज़्यादातर लोग अपने बच्चों को शिक्षा में कोई दिलचस्पी नहीं दिखाते थे। उच्च वर्ग के कई लोगों ने उनका मज़ाक भी उड़ाया, पर छोटी ने हार नहीं मानी।

प्रोग्राम की शुरुआत में छोटी ने उन बच्चों को फ्री में पढ़ाना शुरू किया, जो स्कूल से आने के बाद यूं ही घूमा करते थे। बच्चों को पढ़ाते हुए छोटी ने उनके अभिभावकों को भी अपने साथ शामिल किया। कुछ समय बाद उन्हें प्रेरित किया कि वह हर महीनें में कम से कम 20 रुपये की सेविंग करें, बाद में छोटी ने उनका यह पैसा कॉमन बैंक में जमा कराना शुरू किया।

जब गांव वालों को इससे फायदा होने लगा तो आसपास के गांवों की महिलांए भी छोटी से जुड़ीं, साथ ही उनके बच्चे भी पढ़ने के लिए आने लगे। आगे चलकर छोटी ने गांव के लोगों के लिए हैंडपंप और शौचालय बनवाने में भी मदद की।

जल्द ही छोटी इन लोगों के लिए योगा और मेडिटेशन क्लास शुरू करने की तैयारी में हैं। खुशी की बात यह है कि अब छोटी की मदद के लिए जिला प्रशासन भी साथ खड़ा है। छोटी चाहती है कि देश भर में 101 ऐसे गांवों के बच्चों को वह शिक्षित कर पाएं। इतनी कम उम्र में एक अच्छे सामाजिक कार्य के लिए इंटरनेशनल अवॉर्ड प्राप्त करके छोटी ने बिहार राज्य के साथ-साथ पूरे भारत का नाम रोशन किया है।

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