Fake क्रांति

Posted by Devesh Singh
January 16, 2018

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“शुद्ध शाकाहारी भोजनालय” यह एक ढाबे पर लिखा हुआ था. वहां कुछ भूखे क्रांतिकारी लोग पहुंचे. अपनी मर्ज़ी से. पर उन्हें नॉन-वेज खाना था. क्रांतिकारी थे तो शांति से बैठने से रहे. खाना भी है. पर कुछ “क्रिएटिव” करना है. गाली देना है. अपनी भूख से तो कोताही करते नहीं इसलिए पहले खाना आर्डर कर खाने लगे. जो था सब मिला.उसके बाद डकार मारकर. फसेबूक पर “क्रांति” के नाम पर “उल्टी” करने लगे.

फेसबुक पर क्रांतिकारी मित्र!

हम सफर में हैं, रास्ते मे हमे भूख लगी. हमे नॉन-वेज खाना था. पर हमे सिर्फ “शुद्ध शाकाहारी भोजनालय” मिल रहा था. इससे पता चला कि ये इस सरकार और आरएसएस की चाल है. गरीबों को नॉन-वेज न खाने देने की. ये तानाशाही है, वो हम पर अपनी पसंद थोप रहे हैं. ये हमारे लोकतंत्र के लिए खतरा है. हम इस देश के साथ ऐसा नहीं होने दे सकते. इसलिए हमने वहां खाना नहीं खाया और प्रोटेस्ट किया. “हमे चाहिए क्या ? आज़ादी2. साथियों हम जो कर रहे थे वो संविधान की किताब के फलाने पेज के फलाने आर्टिकल के तहत कर है थे.”We Have right to eat anything”. इसलिए हमने आंदोलन कर “मांसाहारी” भोजन बनाने के लिए गाली-गलौच की. पर संख्याबल कम होने के चलते हम ज़्यादा लड़ नही पाए. आपसे अनुरोध है हमने तो अपनी हिस्से की लड़ाई लड़ ली है अब आप लोगों को आना पड़ेगा. हम भारत के लोग हैं ये हक है हमारा. ये हम पर अपनी पसंद थोप नही सकते. #इंकलाब_जिंदाबाद

इनकी क्रांति के बाद कुछ इनके समर्थन में या कहें सरकार विरोध में भी आंदोलन में भाग ले लिए. भीड़ इकट्ठा हुई, नारे लगे..ढाबा बदनाम हुआ. लोग आना बंद कर दिए. एक दिन ढाबा बंद हो गया. काम करने वाले बेरोजगार हो गए. उसके बाद रास्ते मे भूखे लोगों को भूखा रहना पड़ा.

नोट- जिन्होंने क्रांति की वो खाना खाये, पेट भरे और रवाना हो गए.उनकी फ़ेसबुकिया क्रांति की उल्टी के चक्कर मे , बाद मे सफर करने वाले भूखे ही रह गए. तो थोड़ा सोच समझकर..😊 बाकी आप लोग स्वयं में ज्ञानी है 😊

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