FDI के प्रति लिया मोदी का क़दम कहा जा पोहचेगा?

Posted by mehtaanjali109
January 29, 2018

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हाल ही में गवर्नमेन्ट ऑफ इंडिया ने FDI को जोर का धक्का दिया मेरा मतलब पुश किया है जिसके तहत तमाम बाहरी देशो के व्यापारी अब भारत में आकर इनवेस्ट कर सकते है वो भी बिना किसी टर्म्स एंड कंडीशन के, लेकिन मात्र पांच साल कि अवधि पर। इस निर्णय को फॉरेन डायरेक्ट इन्वेस्टमेंट के और एक बढ़ता कदम मान सकते है लेकिन बात कुछ ऐसी हैं कि मानो दांतो तले ज़ुबान आ जाए, एक तरफ हम देसी को प्रमोट कर रहे थे यानी के कपड़ा लता से लेकर घर ग्रहस्थी तक कि चीज़े भारतीय होनी चाहिए। और दूसरी तरफ स्वदेसी को बड़े ही ज़ोर शोर से ना ना कहने वाले काफी चेहरे थे, पर खैर अब जाने दे। मुद्दे पर आते है, क्या ये कदम वाकई में अच्छा है या नहीं?
सबसे पहले बात करते है वर्ल्ड इकोनॉमिक फोरम की जो के हर साल एक मीटिंग का आयोजन करती है। इस साल कि एनुअल मीटिंग जो है वो २३ से २५ जनवरी के बीच स्विट्ज़रलैंड के दावोस मे होने वाली है। मज्जे की बात ये हैं कि हर साल की तरह इस बार भी इसे एक थीम दी गई है, वो है “creating a shared future in a fractured world”. Wow! शानदार
प्रधानसेवक  याने मोदी जी भी इस कार्यक्रम का हिस्सा होंगे, बल्कि १९९७ के बाद ये पहले प्रधानसेवकजी होंगे जो इस मीटिंग का हिस्सा बनेंगे। अब अगर मोदी जी जा रहे है तो जरूर कुछ एजेंडा होगा। जाहिर सी बात है, आये है तो कुछ करके ही जायेंगे टाइप्स। तो इस बार इंडिया अपने इकॉनमी के जरिये बाहरी कंपनी और इनवेस्टर्स को अपनी और आकर्षित करना चाहता है, ताकि ये तमाम लोग अपने काम के जरिये इंडिया में पैसा इन्वेस्ट करे और जो फॉरेन इन्वेस्टर्स है उसमे बढोती आये। इस मीटिंग में मोदी जी GST जैसे और भी अलग अलग रिफॉर्मर्स कि बात करेंगे।
इंडिया में बिजनेस करना अब काफी हद तक आसान कर दिया गया है। जो पहले नियम थे उसे भी काफी हद तक बदल दिया गया हैं ताकि बाहरी व्यापारी खुश हो और हमारे यहाँ पधारे, पैसा और इन्वेस्टमेंट के साथ। (खाली हाथ नहीं) लेकिन गौर फरमाया जाए, ये गवर्नमेंट ऑफ इंडिया क्यूं कर रही है? क्यूंकि बाहरी इन्वेस्टमेंट आये, देश का इन्फ्रास्ट्रक्चर और तमाम ताम झाम सुधरे। क्यूंकि सरकार के पास  अब इतना रेवेन्यू है ही नहीं ये तो अब सभी को पता चल गया है, जिसके चलते सरकार खुद तो कुछ कर नहीं सकती। Global FDI Confidence Index के मुताबिक़ २००८ में इंडिया ८ वे स्थान पर था जो कि इतना बुरा भी नहीं था। लेकिन अच्छा भी नहीं था। बात अगर हम इंडिया के ऑब्जेक्टिव की करे, जहा हम सोचते है इंडिया को उसके हवाले से इंडिया ने टॉप 5 स्थानों के  करीब होना चाहिए। US, Germany, China, UK और Canada  के मुकाबले इंडिया को भी आना होगा।
चलिए, २०१६ कि अगर बात करे तो इंडिया ने काफी हद तक FDI में सफलता पाई है। लेकिन वो भी उतनी काफी नहीं है। इसके पीछे २ असल वजहें है, पहली की अभी भी इंडिया को डेवलपमेन्ट कि जरूरत है और दूसरी सबसे अहम “जॉब” यानिकी “रोजगार”।
इसीलिए इंडियन कैबिनेट ने ये एक निर्णय लिया है,जिसमे  रिटेल, सिविल एविएशन, कंस्ट्रक्शन जैसे सेक्टर कि लिमिट बढ़ा दी गईं है। और बहोत सारे नियम वगैरह को बदला गया है ताकि इंडिया मे FDI आती रहे। अब फॉरेन कंपनी १००% इन्वेस्ट कर सकती है, जबकि पहले ४९% था। अब ये १००% इन्वेस्टर्स डायरेक्ट इन्वेस्ट करेंगे। जससेे उन्हें काफी फायदा होगा। रिटेल कि बात करले तो, पहले इंडिया में नियम होता था, जिसके चलते इंडिया में जो भी मैनुफैक्चरिंग होगा उसका 30% इंडियन मार्किट से खरीदना होगा। जिसके वजह से काफी कंपनीयां नाखुश होती थी। लेकिन अब ऐसा हरगिज़ नहीं होगा इसके अलावा कैबिनेट ने १००% FDI कर दिया है Real Estates ब्रोकिंग मे।
अब देखते है मोदी जी अब क्या कहेंगे??
देखने मे और सूनने में ये काफी अच्छा लग रहा होगा, लेकिन  भारतीय व्यापारी के बारे में सोचे, इससे क्या भारतीय व्यापारियों को नुकसान होगा? क्या सरकार का ये कदम लोगो को रोजगार देगा?  क्युकी एक तरफ FDI कि बात है तो दूसरी और स्टार्ट अप इन इंडिया कि जो के FDI १००% लागू करने पर भारतीय व्यापारियों के लिए इतना आसान नहीं होगा। मौजूदा सरकार अपने हल्क से काफी कुछ बोल चुकी है, लेकिन उसे अमल मे लाने में नाकाम।
खैर मोदी जी का ये कदम कहा जाकर पहुंचेगा ये देखना होगा।

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