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अपने ओपिनियन को एक मज़बूत आर्टिकल में कैसे बदलें

Posted by Abhishek Jha in Hindi, Writer Resource Centre
January 22, 2018

जैसा कि नाम से ही स्पष्ट है, एक ओपिनियन आर्टिकल वह होता है जिसमें किसी मुद्दे पर आप अपनी राय रखें। किसी भी साधारण लेख से, यह इस मामले में अलग होता है कि इनमें उन मुद्दों पर बेहद मज़बूती के साथ लिखा जाता है जो मुख्यत: खबरों में बने होते हैं। किसी भी शोधपत्र के मुकाबले इसे छोटा और साफ नज़रिये के साथ लिखा जाता है।

यह तय है कि सोशल मीडिया ने हर किसी को अपनी राय रखने के लिए एक अभूतपूर्व ताकत दी है, लेकिन अगर आप खुद के लिए एक बड़ी ऑडियंस की तलाश में हैं तो ओपिनियन आर्टिकल आपके काम आ सकता है। लेकिन ओपिनयन आर्टिकल लिखने के कुछ तरीके हैं। हर ओपिनियन आर्टिकल लोगों की नज़रों में नहीं आता। अगर आपने अभी-अभी इस विधा में  कदम रखा है तो इन आसान सुझावों से आपको  काफी फायदा मिल सकता है:

1. छोटा और केंद्रित लिखें

अगर आप भी आर्टिकल पढ़ने से पहले उसकी लंबाई देखने वालों में से हैं तो यह पहला प्वाइंट आपके लिए स्पष्ट है। इस दौर में जहां एक क्लिक पर सैकड़ों अलग-अलग पेज खुल सकते हैं, आप कितना स्पेस लें और उसका कैसे इस्तेमाल करें इस बात का बेहद खयाल रखना पड़ेगा।

जिन 1-2 दलीलों को आप मज़बूती से अपने लेख में रख सकें उन्हीं का विस्तार में ज़िक्र करें। हालांकि किसी विशिष्ट दलील का मतलब यह नहीं कि आप सिर्फ एक तर्क पर ही जमे रहें। उदाहरण- अगर आप अंतरधार्मिक रिश्ते में हैं और कभी जब लव जिहाद का मसला उठा तो उसपर आपकी राय ज़रूरी होगी।

2. नये तर्क ढूंढे

भले ही आप कोई ओपिनियन आर्टिकल लिख रहे हों लेकिन अपने लेख में एक नयापन ज़रूर रखें। जो बातें पहले से कही-पढ़ी जा चुकी हैं उसे पढ़ने में शायद ही किसी की दिलचस्पी हो। उदाहरण के तौर पर अगर आप किसी से कहें कि हिंसा बुरी चीज़ है तो शायद ही कोई पढ़ना चाहे, और ऐसा इसलिए क्योंकि यही बात हम हमेशा से सुनते आए हैं, और अगर शुरुआत में ही यह बात पढ़ने को मिले तो एक अवधारणा बन जाती है कि पूरे आर्टिकल में कुछ भी नया नहीं मिलने वाला है।

उसी हिंसा वाली बात को नए एंगल से पेश किया जाए जैसे ‘अगर आप इन आंकड़ों पर ध्यान दें तो हिंसा पर आपको एक नया नज़रिया मिलेगा’ या ‘मुझे नहीं लगता कि सर्जिकल स्ट्राइक से आतंकवाद खत्म किया जा सकता है।’ यहां पहले उदाहरण में कम ध्यान दिए गए आंकड़ों की मदद से एक नया तर्क दिया जा रहा है और दूसरे उदाहरण में एक ऐसा ओपिनियन सामने रखा गया है जो बहुत सहज और आसानी से आने वाला नहीं  है।

इसी तरह किसी खास घटना या इतिहास का ज़िक्र भी किया जा सकता है। ध्यान रहे, जब भी हम कुछ ऐसा लिखेंगे जिसके बारे में पहले ज़्यादा बात नहीं की गई है तो वह पढ़ने में लोगों की ज़्यादा रुची होगी।

3. मुद्दे पर आएं

यह सच है कि टाइटल पढ़ने के बाद ही रीडर तय करते हैं कि आर्टिकल पढ़ना है या नहीं। टाइटल के आगे कोई पढ़े या नहीं यह इस बात पर निर्भर करता है कि आपने जिस मुद्दे की बात की है उसको लेकर रीडर्स में कितनी उत्सुकता या रुची जग पाई। आर्टिकल की शुरुआत और पहला पैराग्राफ इसमें एक अहम रोल निभा सकता हैं।

जैसे- क्या आपके पास कोई ऐसा तरीका है जिससे आप रीडर्स को बता सकें कि कोई खास मुद्दा उन्हें कैसे प्रभावित कर सकता है? क्या उस मसले से जुड़ी कोई कहानी है जो लोगों को पसंद आ सकती है? अगर ऐसा है तो उसे शुरुआत में ही डालें।

आपको रीडर्स को यह भी बताना पड़ेगा कि उन्हें क्या नया मिलने वाला है। अपने रीडर्स को शुरुआत में ही इससे वाकिफ करवा देना कि पूरे लेख में उन्हें क्या मिलने वाला है हमेशा फायदेमंद होता है।

4. तर्कों को व्यवस्थित तरीके से सामने रखें

चाहे कोई भावुक तर्क हो या तथ्यात्मक तर्क, वह तभी मायने रखता है जब आप उसे विस्तार से समझा पाएं। एक बात को बार-बार दुहराने से शायद ही कोई फायदा हो।  मैं इस स्ट्रक्चर को फॉलो करता हूं- पहले अपने तर्कों को सामने रखना, उसके बाद उन तर्कों के पीछे की वजह। अंत में, अगर मुमकिन हो तो मैं एक उदाहरण देता हूं जिससे मेरा तर्क बहुत ही साफ हो जाता है।

उदाहरण

हमारी कानून व्यवस्था को काफी सुधार की ज़रूरत है क्योंकि ऐसा लगता है कि यह हाशिए पर रह रहे लोगों के साथ भेदभाव करता है। यह अंडरट्रायल लोगों की संख्या पर गौर करने से और स्पष्ट होता है, जहां SC, ST और मुस्लिम समुदाय के लोगों की संख्या सबसे ज़्यादा है। इसका ज़िक्र भी हम तब ही सुनते हैं जब मुहम्मद आमिर खान जैसे किसी शख्स को 14 सालों के बाद बाइज़्जत बरी किया जाता है।

यहां पर

  • ऐसा लगता है कि यह हाशिए पर रह रहे लोगों के साथ भेदभाव करता है – तर्क
  • SC, ST और मुस्लिम समुदाय के लोगों की संख्या सबसे ज़्यादा है – तर्क की वजह
  • मुहम्मद आमिर खान जैसे किसी शख्स को 14 सालों के बाद बाइज़्जत बरी किया जाता है – तर्क के पक्ष में उदाहरण।

5. कोई समाधान दें

आपने कोई न्यूज़ रिपोर्ट नहीं लिखी है कि आप बस समस्या की बात करें, यह एक रिपोर्ट से ज़्यादा उस मुद्दे पर आपकी राय बताने का ज़रिया है। इसलिए अपनी तरफ से किसी भी मुद्दे पर सुझाव देने से हिचकिचाना नहीं चाहिए, खासकर अगर आप किसी समस्या के बारे में लिखें और आपके पास कोई सुझाव हो जिससे परेशानी को कम किया जा सकता है तो उसका ज़िक्र ज़रूर करें।

6. शब्दों के जाल बुनने से बचें

किसी भी मुद्दे पर जब बहस शुरू होती है तो उसपर बहुत लोगों की अपनी राय होती है। अगर आपने उपर दिए हुए स्टेप्स को फॉलो करके एक साधारण राय से अलग अपनी एक राय कायम कर ली है तो अब यह ज़रूरी है कि आप अपनी बात को बेहद ही कारगर तरीके से लोगों तक पहुंचाएं। और इसलिए शब्दों के जाल बुनने से बचें और साधारण तरीके से अपनी बात लोगों तक पहुंचाएं।

7. एक बेहतरीन निष्कर्ष दें

अपने आर्टिकल के आखिरी में अगर आपने समस्या का समाधान दिया है तो आप अपने तर्कों के निष्कर्ष के करीब हैं। अगर आप अंत एक बेहतरीन और ऐसे पैराग्राफ से करें जो रीडर्स को याद रह जाए तो आपको एक अलग छाप छोड़ने में सफलता मिलेगी। हालांकि इसका कोई एक तय तरीका नहीं है लेकिन अगर आप पूरे लेख में कही गई बातों का सार बेहद कम शब्दों में सामने रख पाएं तो समझ लीजिए कि आप विजयी हैं।

हालांकि ऐसे ओपिनियन आर्टिकल भी होंगे जो इन नियमों को तोड़ें लेकिन अगर आपने अभी लिखना शुरू किया है, या आर्टिकल लिखने की किसी समयसीमा में बंधे हैं तो यह सुझाव आपके लिए काफी फायदेमंद होंगे।

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