पीने के पानी को भी तरस रहा है सांसद का गोद लिया कोडरमा का ये गांव

झारखंड  का कोडरमा ज़िला, झारखंड की राजनीति में एक महत्वपूर्ण स्थान रखता है, लेकिन कोडरमा ज़िले के कई कोने आज भी अंधेरे की चपेट में हैं जो कभी राजनीति में मुद्दा नहीं बन पाते। ऐसा ही एक कोने में रह रहा है कोडरमा का बिरहोर समुदाय, बताते चलें कि झारखंड में बिरहोरों की कुल आबादी लगभग 7000 है और अकेले कोडरमा में ही बिरहोर समुदाय के लगभग 3000 लोग निवास करते हैं।

जीविका और जीवन स्तर के आधार पर देखें तो यह समुदाय कोडरमा का अंधेरा कोना ही नज़र आता है। हमारे देश के संविधान का अनुच्छेद 21, देश के हर नागरिक को मानवीय गरिमा के साथ जीवन जीने का अधिकार देता है और उसकी बहाली की ज़िम्मेदारी देश की सरकार की होती है। लेकिन हाशिये पर मौजूद बिरहोर समुदाय आज भी भोजन, पानी, आवास, और स्वास्थ्य जैसी मूलभूत सुविधाओं से वंचित है।

खास तौर पर हम यहां बात कर रहे हैं कोडरमा ज़िले के डोमचांच प्रखंड की ढाब पंचायत की, जिसे कोडरमा के सांसद ने गोद ले रखा है। इस पंचायत को गोद लेने के बाद से सांसद महोदय ने ढाब में कई सभाएं की और विकास की लकीर को बड़ा करने के लिए आला अधिकारियों को कई आदेश भी दिए लेकिन उनके जाने के बाद उन आदेशों की स्थिति ढाक के तीन पात वाली ही नज़र आती है।

अब हम आपको ले चलते है ढाब के नावाडीह बिरहोर टोला में, जहां बिरहोर समुदाय के लगभग 15 परिवार रहते हैं। बिरहोर समुदाय के इन परिवारों के मूलभूत अधिकारों की बहाली के लिए स्थानीय प्रशासन द्वारा कोई भी कदम नहीं उठाए गए हैं। सरकार की योजनाओं की सूची में इस समुदाय के संरक्षण के लिए करोड़ों रूपये हर साल खर्च करने की बात सामने आती है। इस समुदाय के लिए अलग से योजनाएं चलाने की बात कही जाती रही हैं, लेकिन वर्तमान में डोमचांच के ढाब पंचायत के नवाडीह बिरहोर टोले की ज़रा हालत देखिए-

यहां पर पिछले एक माह से कई बिरहोर बच्चे 1)- राजू बिरहोर, उम्र- 6 साल, पिता- छतर बिरहोर 2)- कुंदन बिरहोर, उम्र- 4 साल, पिता- सुनील बिरहोर, 3)- नुखरी बिरहोरनी, उम्र- 10 साल और 4)- रेखा बिरहोरनी, उम्र-4 साल जैसे अन्य कई बच्चे हैं जो कुपोषण के साथ-साथ अन्य रोगों से भी ग्रसित और बीमार दिखते हैं। इनमें रेखा बिरहोरनी और राजू बिरहोर गंभीर रूप से कुपोषण के शिकार नज़र आते हैं। इनकी सुधि लेने वाला कोई नहीं।

गांव की एक महिला निन्नमुनी बिरहोरनी बताती हैं, “एक बार मैं घर में सोई थी तभी घर की छत मेरे ऊपर गिर गई, जिसकी वजह से मुझे कमर में चोट लगी। मुझे पिछले 6 माह से कमर में दर्द है जिसके कारण मैं चल-फिर भी नहीं पा रही हूं। गांव में कोई डॉक्टर भी नहीं आता जिसे इलाज करने के लिए कहें।”

इसी गांव की पूजा बिरहोरनी बताती हैं, “गांव में पीने के पानी की गंभीर समस्या है। राशन डीलर अनाज नहीं देता है। घर जर्जर हालत में है, कब गिर जाएगा कहना मुश्किल है। हम लोग गंदा पानी पीने को विवश हैं।” इस मामले में जब स्थानीय मुखिया से संपर्क किया गया तो उन्होंने कहा, “उन लोगों का आधार कार्ड नहीं बना है जिस कारण उन्हें सरकार की किसी भी सुविधा का लाभ नहीं मिल पा रहा है।”

पानी की समस्या पर जब उनसे पूछा तो उन्होंने कहा, “हम कोशिश करेंगे कि गांव में एक चापाकल (हैंडपंप) लगा दिया जाए, इसके लिए पीडब्लूडी विभाग को सूचना दे दी गई है।”

जब उनसे सांसद के कार्य के बारे में पूछा तो उन्होंने बताया, “जब गांव को गोद लिया गया था तो यहां के ग्रामीणों में उम्मीद की किरन दौड़ी थी, लेकिन अब वह किरन आंख का पानी बन कर रह गई है।”

फोटो आभार: संग्राम झारखंड 

हर हफ्ते Youth Ki Awaaz हिंदी की बेहतरीन स्टोरीज़ अपने मेल में पाने के लिए यहां सब्सक्राइब करें।