हिंदी सिनेमा की सबसे पहली पारो सुचित्रा सेन याद हैं आपको?

Posted by Syedstauheed in Art, Culture-Vulture, Hindi
January 17, 2018

कलकत्ता के एक अस्पताल में सुचित्रा सेन की तबीयत बिगड़ने के संकेत उस रात से ही मिलने लगे थे। डीएनए के ट्वीट ने अस्पताल से शीघ्र ही उनके स्वस्थ वापस आने की बात कहकर एक उम्मीद बाकी रखी थी। लेकिन दीवानों की यह खुशी पल भर में काफूर होने को थी।

अॉल इंडिया रेडियो का ट्वीट खबर लेकर आया कि सुचित्रा सेन अब भी खतरे से बाहर नहीं हैं। वक्त के साथ उनकी हालत बिगड़ रही थी।

इधर हमारी धड़कनें भी उनको लेकर असमंजस में होने लगी। चाहने वाले सुचित्रा के लिए दुआएं लेकर ट्वीट कर रहे थे। इस सबके बीच में नाउम्मीद कर देने वाली बातें भी चल रही थीं। एक समाचार चैनल का ट्वीट आया कि सुचित्रा जी के ठीक हो जाने की अब बहुत कम उम्मीद है। जी में आया कि खबरिया चैनल को तुरंत हटा दूं, लेकिन खबर तो फिर भी अपने जगह कायम थी। हम फिर भी दीवानों की तरह रब को मनाने में लीन रहे, बुरी खबर को टालने की कोशिश में। जितेश पिल्लई को मन ही मन धन्यवाद देता रहा कि कि बंदे ने दुआओं में खूब साथ दिया। जितेश ने खुदा से बस इतना मांगा कि सुचित्रा ठीक जाएं। दीवाने दुआओं में होकर करवटें बदलते रहे, ना जाने कब आंखों में अंधेरा-उजाला लेकर नींद में हो लिए पता ही नहीं चला।

सुबह हुई! सुचित्रा जी का खयाल बरबस ही आ धमका… उनको लेकर अब भी खबरें रात की बात रिपीट कर रही थी। सब ठीक न होने के संकेत अब भी जारी थे। फॉर ए चेंज पुराने ज़माने के मशहूर गीतों को सुनने लगा। गुलज़ार की फिल्म ‘आंधी’ का खयाल आया। नज़रें फिर से न्यूज़बोर्ड पर टिकी थीं। एक मशहूर हस्ती ने ट्वीट किया कि ‘सुचित्रा सेन नहीं रहीं!’ क्या सच में वो नहीं रहीं? हां अब वो जा चुकी थीं।

खबरें और प्रतिक्रियाएं इसकी रह-रह कर तस्दीक करती रहीं कि गुज़रे ज़माने की मशहूर अदाकारा का इंतकाल हो गया है। फेसबुक में लोगों की वाल पर अभिनेत्री को खैरबाद कहने का सिलसिला चल निकला। किसी ने गुलज़ार के बोल से भावनात्मक इज़हार किया। हर एक ट्वीट में अब उनकी ही बातें पढ़ने को मिली। उनसे जुड़ी तस्वीर अपलोड करके श्रदांजली देने का काम भी हुआ। कुछ लोगों ने उनके चुनिंदा गानों के वीडियो से अपनी बात कही। अरविन्द गौड़ ने सुचित्रा जी के मशहूर किरदारों का नाम लेकर ट्वीट किया। अब उनकी फिल्मों व किरदारों को लेकर बातें भी आ रही थी।

उनकी जानी-मानी बांग्ला और हिन्दी फिल्मों का ज़िक्र होना लाज़मी था। अमिताभ बच्चन का ट्वीट आया कि कला, खूबसूरती व रहस्य की मिसाल को ज़माना याद रखेगा।

सच ही कहा क्योंकि गुलजार की ‘आंधी’ में आरती देवी का किरदार आज भी याद आता है। केवल राजनीतिक वजहों को शुक्रिया नहीं कहूंगा। आप ही विचार करें कमलेश्वर और गुलज़ार के साथ-साथ राहुल देव बर्मन, किशोर कुमार और लता जी का शुक्र अदा करना तो बनता है। संजीव-सुचित्रा को टॉप फॉर्म की अदाकारी में देखना चाहते हैं तो यह फिल्म देखें। गुलज़ार की इस फिल्म के बाद उन्होंने सार्वजनिक जीवन को खैरबाद कहा तो वो फिर नहीं लौटी। इस खास प्रवृत्ति की वजह से उनकी तुलना स्वीडिश तारिका गारबो से भी की जाती है। रामकृष्ण मिशन की महान भक्त सुचित्रा बाकी ज़िंदगी भक्ति में लीन रहीं।

बांग्ला फिल्मों से हिंदी सिनेमा में आने वाली सुचित्रा ने ज़्यादातर यहीं की होकर रहीं। बांग्ला फिल्मों के मशहूर अदाकार उत्तम कुमार के संग उन्होंने एक से बढ़कर एक हिट फिल्में की थी। हिन्दी फिल्मों में दिलीप कुमार के साथ उनकी फिल्म ‘देवदास’ को सभी जानते हैं। बिमल राय की इस महान प्रस्तुति का हरेक किरदार आज एक लेजेंड बन चुका है। साठ के दशक के शुरुआती साल सुचित्रा की ज़िंदगी में काफी नाम और शोहरत लेकर आए।

इन सालों में सौमित्र चैटर्जी के साथ उनकी बांग्ला फिल्म ‘शात पाके बांधो’ (या द मैरिज सर्कल) के लिए उन्हें मास्को अंतराष्ट्रीय फिल्म सामारोह में बेहतरीन अभिनय के लिए अवार्ड मिला।

आज भी यह बात मायने रखती है, किसी भी भारतीय नायिका के लिए यह फक्र की बात होगी। सुचित्रा सेन का जाना बस यह कहता चला गया कि ‘इस मोड़ से जाते हैं…’

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