आज भी समाज में अंध विश्वास प्यार हैं जिसे समझनें ही बहुत समय लग जाता हैं

Posted by Subhanshi gupta
February 9, 2018

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विश्वास ऐ इज़हारे प्यार

कहते है दो लोगों के दिल का प्रतीक उसका प्रेम होता है जो दो लोगों के साथ रहने का और उसके करीब होने का एहसास कराता है।

वो प्यार ही है जो हमें आपसे और आपको हमसे और खुद से जोड़े रखता है। प्यार एक ऐसा सच्चा रिश्ता है जो हर किसी को खूबसूरती से निभाना अच्छा लगता है। प्यार के होने से हमारा हर दिन अपने आप ही खूबसूरत बन जाता हैं।

लेकिन हम इस प्यार के अनोखे बंधन में यह भूल जाते है कि कोई हमारा इस्तेमाल भी कर रहा होता होगा। इन सब से अंजान हम तो प्यार करते रहते है और कोई हमे ही बेवकूफ बना रहा होता है।

यहां पर मैं खुद की ही लिखी चार लाइन लिखना चाहूगी।

करती रह जाऐगी
तू भरोसा उस पर
क्या पता तुझे बेच
खुद ही जीत रहा हो….

क्या पता तुझे,किस कदर वो तुझी से खेल रहा होगा ना खबर होगी तुझे और तू उसी की बाहों मे हो कर भी अंजान,तू उससे कर रही होगी अपने प्यार का इज़हार  सब कुछ दे चुकी होगी प्यार में डूब कर…
जब होगी खबर तुझे तो तू बाद मे पछताऐगी
ना जाने हक भी ना हो ,
तेरा तेरी ही जिन्दगी पर,
तब वो तुझे पढ़ा कर
तुझी को लिख रहा होगा…..

सुभांशी गुप्ता

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