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गंगा हम शर्मिन्दा है!!!

Posted by Kunal Kumar Singh
February 5, 2018

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राष्ट्रीय नदी गंगा भारत की सबसे महत्वपूर्ण नदी है जो देश की आर्थिक,सांस्कृतिक,सामाजिक,पर्यावरण हर पहलु से भारत की जीवनधारा है इसके बिना भारत का स्वरुप की आप कल्पना भी नही कर सकते है।

अगर आज गंगा सुख जाये तो देश की लगभग आधी आबादी को आकालमृत्यु और भुखमरी,प्रकृतिक आपदा जनित काल से कोई भी शक्ति नही बचा सकता इसलिए आज से लगभग 100 साल पहले इस बात को समझते हुए 1916 में जब हरिद्वार के चारों ओर नहरें बनाकर गंगा की जलधारा का मार्ग बदला जा रहा था। तब हरिद्वार और गंगा जी की रक्षा के लिये हमारे ऋषि तुल्य राष्ट्र विभूति और बी.एच.यू के संस्थापक महामना मदनमोहन मालवीय जी ने पूरे देश के राजराजवाड़े और जनता को जागरूक करके अपने नेतृत्व में अँग्रेजी सरकार से प्रचंड संघर्ष किया जिससे आख़िरकार साम्राज्यवादी ब्रिटिश सरकार झुकी और उन्होंने मालवीय जी से वादा किया कि आगे से गंगा के प्रवाह और जल धारा के साथ कोई छेड़-छाड़ और नुकसान नहीं किया जाएगा। इसके लिए मालवीय जी और ब्रिटिश शासन के बीच समझौता भी हुआ, परन्तु अफसोस कि स्वतंत्र भारत की सरकारो ने उस वायदे का सम्मान नहीं रखा। स्वतंत्र भारत में इसके विपरीत गंगा सहित इसकी सहायक नदी प्रणालियों के साथ अकल्पनीय छेड़-छाड़ की गई जिससे की हमारी नदियों से लेकर आम जनमानस का जनजीवन संकट में आ गया है। अब गंगा का निर्मल पानी भी काला दिखाई देने लगा है यक़ीन न हो तो वाराणसी में आकर आप ख़ुद देख ले कि किस क़दर गंगा की जलधारा सिकुड़ते गई है और पानी काला पड़ने लगा है।
गंगा बस नदी नहीं है बल्कि एक जीवंत संस्कृति है जो भारत के 5 राज्यों से होकर गुजरती है, इसकी कुल लम्बाई 2525 किलोमीटर है। गंगा नदी का बेसिन दुनिया का सबसे अधिक घना और दूषित नदी बेसिन है जिसमें लगभग 400 मिलियन लोगों की आबादी 390 व्यक्ति प्रति वर्ग किलोमीटर के जनघनत्व के हिसाब से निवास करती है। गंगा का दूषित होने से सिर्फ़ मानव की नहीं बल्कि मछलियों की 100 प्रजातियां,90 जलथली/उभयचरों की प्रजातियां, वनस्पतियों, जड़ीबूटियाँ इत्यादि भी समाप्त हो जाएंगी।
गंगा को निर्मल और अविरल बनाने के हवाहवाई कई प्रयास हुआ है और गंगाजी के नाम पर लूटपाट और राजनीति ख़ूब होती रही है लेकिन वास्तविकता ज्यो की त्यों बनी हुई है।सेन्ट्रल पाॅल्यूशन कन्ट्रोल बोर्ड’ की वर्ष 2012 की रिपोर्ट के अनुसार सरकार अभी तक गंगा की सफाई हेतु विभिन्न परियोजनाओं हेतु लगभग 20,000 करोड़ रुपया खर्च कर चुकी है। वर्तमान सरकार द्वारा नमामि गंगे योजना के तहत 20000 करोड़ रुपये खर्च करके गंगा को साफ़ करने की योजना है लेकिन अब तक इस योजना से भी कोई लाभ नज़र नहीं आ रहा ।
तमाम सरकारी खर्चे और योजनायें जो हो लेकिन गंगा नदी के जल की स्थिति अत्यन्त सोचनीय है । केन्द्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की रिपोर्ट के अनुसार गंगा के जल में आर्सेनिक, फ्लोराइड एवं क्रोमियम जैसे जहरीले तत्व बड़ी मात्रा में मिलने लगी हैं। कभी शुद्धता का पर्याय और जीवनदायनी गंगा आज 6वी सबसे ज्यादा प्रदूषित नदी है। आज गंगा को स्वयं एक भागीरथ की तलाश है जो उनको इस ख़ेल से बाहर निकल सके । गंगा के अविरलता के लिए तमाम कमिटियां बनी, आयोग बने, प्रधिकरण बने, रिपोर्ट आई और गई ,सरकार बनी और सत्ता सुख भी मिला नेताओं को, लेकिन गंगा की स्थिति बिगड़ती गई और अब तो बहाव और अस्तिवता पर भी संकट है।
उम्मीद है कि अब अन्त में ही सही सरकार, समाज,सभी प्रकार के संगठन और आम जनमानस अपने दायित्व को समझते हुए गंगा की ख़ातिर नही बल्कि अपने जीवन और पहचान के खातिर आगे आयेगी जिससे एक नदी विलुप्त होने से , और कम से कम 45 करोड़ से ज्यादा लोग मृत्यु से बच जाएंगे।
हम बिना गंगा के योग,संगीत,आयुर्वेद, कुंभ जैसा सांस्कृतिक उत्सव इत्यादी बहुत कुछ खो देंगे इसलिए गंगा को बचाना अत्यंत आवश्यक है। हमसब को एकबार हृदय से सोचना है कि हम व्यक्तिगत तौर पर गंगा को बचाने में क्या मदद कर सकते है और अपनी समर्थ को समर्थन के रूप में लेकर आगे आना होगा।

कुणाल कुमार सिंह

एम. ए. – समाज कार्य,

काशी हिन्दू विश्वविद्यालय,

वाराणसी – 221005

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