धार्मिक आज़ादी पर मंडराता कट्टरता का कहर

Posted by Somnath Tiwary
February 6, 2018

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वैसे तो हम ये सोचते कभी नहीं थकते कि हम एक प्रजातांत्रिक देश में रहते है जहा कि प्रजा अपना सासक खुद चुनती है

 

इतना ही नहीं हमारे भारतीय संविधान ने हमें इतने अधिकार दिए है कि किसी प्रकार की समस्या का सवाल ही नहीं उठता, परन्तु अगर हम वास्तविकता की ओर ध्यान दे तो कुछ अलग ही तस्वीर सामने दिखायी पड़ती हे जिसमे जातीय हिंसा, धार्मिक हिंसा, लैंगिक उत्पीड़न जैसी चीजें दिखायी पड़ती है

 

अफराजुल कि तड़पती आत्मा को शांति भी नहीं मिली थी कि एक और घटना घट गयी

 

इस बार का वाक्या हमारे देश की राजधानी दिल्ली में घटी जहा  कट्टर सोच किसी पे इस तरह से हावी हो गयी कि वह भूल गया कि वह इंसान हैं,

और एक बार फिर अफराजुल की तरह एक सामान्य खुशा हाल व्यक्ति जिसका नाम अंकित सक्सेना था उसे भी बड़ी बेहर्मी से मौत के घाट उतार दिया

अंकित का कसूर बस यही था कि उसे  एक अन्य धर्म कि लड़की के साथ प्रेम हो गया था सायद आज के भारत में इसे ही विनाश काले विपरीत बुद्धि कहते हैं 

 

मीडिया के अनुसार लड़की के परिवार वाले ही असली कातिल है जो कि अब पुलिस के गिरफ्त में है

 

परन्तु यह समाधान नहीं है ना जाने इस कट्टर सोच के कारण कितने अफराजूल और अंकित सक्सेना जैसे लोगों को हर रोज जान गंवानी पड़ती होगी यह तो मीडिया है जिसके कारण हम तक ऐसी संवेदनशील खबरे पहुंच पाती हैं

 

वर्ष 2013 के एक आकड़े के अनुसार हर पांचवीं ऑनर किलिंग भारत में

 

 

 

संयुक्त राष्ट्र के आंकड़े बताते हैं कि इज्जत के नाम पर दुनिया भर में हर पांचवीं हत्या भारत में होती है. आंकड़ा 5,000 का दिया गया है लेकिन सामाजिक कार्यकर्ता इसे कहीं ज्यादा बताते हैं.

 

संयुक्त राष्ट्र का दावा है कि विश्व स्तर पर इन 5,000 हत्याओं में 1,000 भारत में होती हैं. हालांकि गैरसरकारी संगठनों का कहना है कि दुनिया भर में इनकी संख्या 20,000 तक है. आम तौर पर भारत के छोटे शहरों और गांवों में इज्जत के नाम पर हत्या कर दी जाती है. लेकिन हाल के दिनों में मीडिया इस बारे में ज्यादा रिपोर्टिंग करने लगा है.

 

अगर अब भी ये नफरत कम ना हुई तो देश को काल के ग्रास मे जाने से कोई नहीं रोक पाएगा

The hindu ऑनलाइन अखबार के अनुसार दिल्ली का ख्याला जहा अंकित का घर था

वहा का माहौल तनावपूर्ण है वहा भारी मात्रा मै सुरक्षा बल तैनात किया गया है

अंकित के पड़ोसीयओ का कहना है कि उनके रिश्तेदार बार बार उनसे घटना के बारे मे पूछ रहे है परन्तु उन्हे भी कुछ ज्यादा पता नहीं हे उन्हे भी सारी जानकारी अखबारों तथा टीवी चैनल से मिल रही है ऐसा अंकित के पड़ोसी हरप्रीत कौर जी ने कही

ख्‍याला मे शांतिप्रिय लोग रहते हे इससे पहले कभी भी कोई घटना नहीं घटी हे सबलोग अमन चैन से रहना चाहते है

Aimim के अध्यक्ष तथा लोकसभा के सदस्य अससुद्दीन ओवैसी जी ने एक सभा में कहा कि कहा कि पूरा मुस्लिम समुदाय अंकित सक्सेना के परिवार के साथ है तथा उन्होने मांग रखी कि दोसी को जल्द से जल्द सजा हो

हमारे देश में देश में लोगों की जान सिर्फ धार्मिक कट्टरता के कारण नहीं बल्कि जाती और गौत्र के नाम पर भी लोग एक दूसरे का जान ले लेते हैं

भारत के हरियाणा राज्य में यदि अलग-अलग जाति या फिर एक ही गोत्र के पुरुष और महिला – परिवार, गाँव, समाज की परवाह न करते हुए शादी करें तो अकसर उन्हें समाज के गुस्से को झेलना पड़ता है.

 

हाल में सम्मान बचाने के नाम पर खाप या जाति पंचायतों, परिवार वालों या फिर गाँववासियों ने ऐसी ‘शादियाँ रद्द करने’ के फ़ैसले लिए हैं. हिंसा भी हुई है और लड़के या लड़की की हत्या तक कर देने के किस्से भी सामने आए हैं.

 

बीबीसी ने हरियाणा में इस समस्या का जायज़ा लेने का प्रयास किया है और साथ ही ये जानने की कोशिश की है ऐसी कौन सी सामाजिक परंपराएँ, दबाव और कारण है जिनसे ऐसी घटनाओं को अंजाम देने वालों को शह मिलती है

अगर ऐसा ही चलता रहा तो जो लोग संघटन बनाकर अखंड भारत का सपना दिखा रहे है वो सायद उनके लिए स्वपन ही बना न रह जाए क्योंकि ऐसे में न तो भारत सुचारू ढंग से चल पाएगी और जब तक ये सब चीजे खत्म नहीं हो जाती तब तक सरकार भी हमे यही सब चीजो से लोगो को बांटकर वोट बैंक बनाती रहेगी

फैसला आपके हाथ में है अगर मोहब्बत से रहना है तो मोहब्बत करने वालो का खून और उनके खिलाफ क्रूरता बंद करे और अन्याय के खिलाफ़ आवाज बुलंद करे

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