ना खाऊंगा ना खाने दूंगा

Posted by Bagish Mishra
February 26, 2018

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ना खाने तक की बात हमारे ‘प्रधान सेवक’ की सही साबित हुई लेकिन नहीं खाने दूंगा को चुनौती देते हुए नीरव मोदी 11 हजार करोड़ के साथ देश से फरार हो गया । जिस तरीके से ‘लेटर ऑफ अंडरटेकिंग’ देना और दावोस यात्रा के चित्र में माननीय ‘प्रधान सेवक’ के साथ निरव मोदी का दर्शन चकित करने वाला है । जहां तक की बात बुद्धिमता की है तो स्वतंत्र भारत के लोग को इतना तो जरूर आता है कि कोई उप शाखा प्रबंधक अपनी शक्तियों के अंतर्गत लेटर ऑफ अंडरटेकिंग नहीं दे सकता । यूपीए :२ काल में बोया गया बीज आज पेड़ सहित देश से गायब हो गया और इस विषय पर हमारे ‘प्रधान रक्षक’ एक शब्द भी नहीं बोले जो कि विद्यार्थियों से 2 घंटे तक वार्ता करते हैं यह बात  किसी को नहीं पच रही।

कृषी-अर्थशास्त्री देवेंद्र शर्मा ने हिसाब लगाया कि यदि भारत के किसानों का एक लाख तक का भी कर्ज माफ कर दिया जाए तो इस रकम से 30 लाख किसान कर्ज मुक्त हो जाएंगे (एनडीटीवी के माध्यम से आंकड़ा) प्रत्येक घोटाले की भांति इस घोटाले में भी मुर्गा युद्ध शुरू हो गया है ।

श्री रामचंद्र कह गए सिया से ऐसा कलयुग आएगा ।

हंस चुगेगा दाना पानी कौवा मोती खायेगा।।

को साबित करते हुए ललित मोदी, विजय माल्या, निरव मोदी  देश से फरार हो गए और यहां के किसान दुनिया से ।

सरकार को सब पढ़े सब बढ़े के तहत एक नया विषय लाना चाहिए जिसके तहत किसानों को देश से भागने का पाठ पढ़ाना चाहिए ।

यहां लड़ाई सरकार और उसकी नीतियों की नहीं बल्कि मेहनत और ताकत की है।

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