पुलिस के कार्यवाही से असंतुष्ट हो, मानसिक संतुलन खोये पिताजी और माँ: सूर्यदेव

Posted by Onkar. vishwkarma
February 20, 2018

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मै सूर्यदेव यादव उम्र 35 वर्ष पिता श्री प्रकाश यादव ग्राम –लाख्खिबागी (पांडेयटोला) पोस्ट कोडरमा थाना कोडरमा जिला कोडरमा राज्य झारखण्ड का मूल निवासी हु!

मेर परिवार में मेरे तीन भाई माँ पिता जी और भरा पूरा परिवार रहते है! मेरा अपना एक होटल है जिससे परिवार का जीविका चलता है! मेरे पिता जी मेरे छोटा भाई रोहित को बहुत प्यार करते थे!

मेरी घटना यह है की मेरा छोटा भाई रोहित घर से बोल कर गया की तिलैया डेम जा रहे है!   और वह अपना गाडी बोलोरो ले कर तिलैया गया था! पर वापस नहीं आया जिसके बाद हमलोग खोजबीन चालू कर दिए घर और अपने जितने भी सगे सम्बन्धी थे सभी को खबर दिए की कहा है पर कोई पता नहीं चला! जिसके बाद हमलोग कोडरमा थाना में अपने भाई का गाड़ी सहित गुमसुदगी का मामला 24 दिसम्बर 2017 दर्ज करवाए जिसका केस नंबर 233/17 है! मामला दर्ज करवाने के बाद भी हमलोग अपने स्तर से खोजबीन जारी रखे ! मेरे पिता जी और माँ का घर में रो रो कर बुरा हाल था! पापा का इलाज दिल्ली से चल रहा था! इस लिए उनको ज्यादा टेंशन नहीं दे रहे थे पर घर में छोटा बेटा को न देख कर पिताजी लगातार चिंता में चले जा रहे थे! उन्हें बस एक ही बात की चिंता थी की मेरा बेटा कहा है! धीरे धीरे दिन बढ़ते जा रहा था पिता जी का तनाव दिन प्रतिदिन बढ़ते जा रहा था! मेरे पिता जी तरह तरह की बात करने लगे थे कही कहते होटल के पीछे कुआ में डूब कर जान दे देंगे! तो कभी कहते की हम आत्महत्या कर लेंगे कोई पुलिस कुछ नहीं कर रहा है! यह सब देख कर मेरे घर मे सभी लोग तनाव में है मेरा कोई भी काम में मन नहीं लग रहा है हमलोगों को घर में किसी को नींद नहीं आ रहा है की क्या करे इस मामले में हम जब ज्यदा तनाव में आये तो हमने 16 जनवरी को एक दिवसीय धरना प्रदर्शन जिला मुख्यालय में दिए उसमे मेरा पूरा परिवार शामिल हुए थे! 16 जनवरी 2018 से लगातार  झारखण्ड के लगभग सभी आला अधिकारियो को पत्र लिख कर मामले से अवगत कराये! पर कही से कोई खबर नहीं आया हमलोग इस मामले में जा कर मुख्यमंत्री से मुलाकात किये जिसके कुछ दिन बाद हमें अख़बार के माध्यम से पता चला की मेरे मामले में झारखण्ड की CID जाँच करेंगी! पर आज तक नहीं पता की कौन CID जाँच कर रही है और आगे क्या कार्यवाही हो रहा है!जब यह बात मेरे पिताजी को पता चला तो वो तीन दिन तक शांत रहे उन्हें उम्मीद हो गया की मेरा बेटा को पुलिस खोज निकालेगा इस बात के बाद मेरे पिता जी यही बोल रहे थे की मेरा बेटा आजायेगा का रट लगाये हुए थे! और हमलोगों का भी चिंता थोडा कम हुआ पर इसके बाद भी आज तक कोई कार्यवाही नहीं हुआ! हम लगातार पुलिस के संपर्क में है जब भी पुलिस से मेरी मुलाकात होता है तो वो कह रहे है की हम लगे हुए है! इधर पापा की चिंता ने घर में सभी सदस्यों का चैन सुकून छीन रखा है! पापा के इस हालत से हम पुलिस के अधिकारयो को अवगत करा चुके है की मेरे पिता जी मानसिक संतुलन गड़बड़ होते जा रहा है कोई घर आ कर अगर समझा देते तो पापा को कुछ पल के लिए राहत मिलता पर पुलिस मेरे बात को गंभीरता से नहीं लिया और मेरे दुःख के हालत में कोई अधिकारी मेरे घर समझाने नहीं आये! घर के इस हालत में मेरी माँ कई दिनों तक गाँव के देवी मंडप में 10 दिन तक लगातार बिना कुछ खाए पिए धरना पर बैठी थी दिन रात वही रह रही थी! जिसे लगातर हमलोग समझा कर घर बुला रहे थे पर नहीं आ रही थी उनगे यह विस्वास था की मेरे बेटे को देवी माँ सही सलामत ले आएगी इस घटना ने तो हमलोगों को और चिंतित कर दिया था! किस तरह माँ को मन कर वहा से घर लाये! मेरा भाई का लापता होना मेरा पूरा घर उलझ कर रह गया और और मेरे मामले में जिस तरह जिला पुलिस काम कर रहा है की लगता है अब एक भाई के खातिर मेरे सर से माँ बाप का साया सर पर से  उठा जायेगा!

 

हम चाहते है की मेरे मामले में प्रशाशन गम्भीरता से ले और कार्यवाही करे मेरा भाई जहा कही किसी भी हाल में हो उसे सामने लाये! और दोषियों पर कार्यवाही करे!

 

पीड़ित

सूर्यदेव यादव की जुबानी

 

 

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