पेट की आग

Posted by Chandramohan Kisku
February 19, 2018

NOTE: This post has been self-published by the author. Anyone can write on Youth Ki Awaaz.

पेट की आग

दो पत्थरों की टक्कर से
या दो डाली के घर्षण से
आग तो
निकेलेगा ही
पर मनुष्य के
खाली पेट पर भी
आग जलता है
इससे सबका नुकसान
होता नहीं है
पर धनवान का अट्टालिका
ध्वस्त हो जाता है
इसलिए कह रहा हूँ
अरे वो नरम बिछावन में
सोनेवाले
भर पेट खाकर
मीठी डकारनेवाले
तुम्हारे पिटाई से
पीठ की चमड़ी उखड़ गई है
नोचने से
मेरा सर गंजा हो गया है
होशियार ______
क्योंकि अब मेरा पेट में
आग जल रहा है.

Youth Ki Awaaz is an open platform where anybody can publish. This post does not necessarily represent the platform's views and opinions.