भाजपा का कलयुगी बजट

Posted by Somnath Tiwary
February 5, 2018

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सबका साथ सबका विकास के मंत्र के साथ हमारे वित्त मंत्री द्वारा बजट सत्र पेश किया गया जिसमें हर वर्ग का ध्यान रखा गया।

साथ ही बड़ी -बड़ी घोषणाओं के साथ-साथ सत्ता की भूख हर पार्टी को होती है;यह भारतीय राजनीति के लिए आम बात है पर यह तथ्य प्रथम बार उजागर हुआ कि टी. बी. केवल दलितों और गरीबों को होता है 2022 का लक्ष्य भी साफ साफ देखा गया क्योंकि गरीबों की मौत सबसे ज्यादा सरकारी अस्पतालों में होती है जो कि टी बी और अन्य रोगों से जूझते हैं और बात रही अल्पसंख्यकों की तो जैसा कि हमारे वित्त मंत्री अरुण जेटली ने बजट पेश करते हुए हुए कहा उनकी बात कही ना कही बिलकुल सही भी है की उनकी राष्ट्रीयता का सबूत कई दल ही प्रमाण स्वरूप पेश करेंगे जो कि हर वक़्त ये नारे लगाते नहीं थकते हिंदुस्तान में रहना होगा तो वन्दे मातरम कहना होगा तथा जब तक भारत माता की जय पर जब तक लड़ाई खत्म नहीं होती तब तक सबका साथ सबका विकास तथा बजट सत्र में अल्पसंख्यक के लिए शायद घोषणा संभव नहीं है।बात रही किसानों की जिन्हें खरीफ के फसलों के लिए डेढ़ गुना लागत मूल्य से मुनाफा दिया जाएगा उम्मीद है, इससे जो 12000 किसान जो हर वर्ष आत्महत्या करते है उसमे कमी आ जाए ।तथा जो किसान साहूकारों के बोझ तले दबते है उसमे गिरावट आ जाए ।

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