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भारत में बालश्रम

Posted by Vinay Sahu
February 5, 2018

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यह बहुत ही दुःखद और निंदनीय है कि भारत जैसे राष्ट्र में बालश्रम जैसी समस्या बहुत लंबे समय से प्रचलन में रही है, ऐसे समस्याएं राष्ट्र पर एक धब्बा है। बालश्रमिकों को होटल, रेस्टरॉन्ट, फैक्टरियों तथा घरो इत्यादि में काम करते हुए देखा जा सकता है, और ऐसे नजारे बहुत ही आम बात हो गए है, काम करवाने वालो के लिये बच्चे स्वतः ही श्रमिक बन जाते है, उन्हें अधिक से अधिक काम करवाया जाता है और न्यूनतम पैसे का भुगतान किया जाता है, उनको उनके मूल अधिकारों से वंचित किया जाता है जो कि सरासर अपराध है।

बालश्रमिको के काम करने की शर्तें :
बालश्रमिक हमारे राष्ट्र के एक बहुत बड़े वर्ग की सामाजिक-आर्थिक दशा को प्रदर्शित करते है और विकास के नाम पर हुये ढकोसले को आइना दिखाता है। भारत एक सयुंक्त परिवारो वाला देश है और जब ऐसे संयुक्त परिवार का पैर गरीबी की कब्र में हो तो परिवार के बड़े बच्चों को कंधो पर यह भर आ जाता है कि वह अपने परिवार के लिये दो वक़्त के खाने की व्यव्यस्था करे और इस कब्र से परिवार को निकाले। उन्हें बहुत ही संकटजनक और हानिकारक परिस्थितियों में काम करना पड़ता है जिस वजह से उनके भीतर उन्माद की भावना उत्पन्न होती है और वे निरंतर नाखुश रहने लगते है और कुंठित जीवन की ओर अग्रसर होते है, और एक परेशान युवा समाज की स्थापना करते है।

 – गरीबी, जनसँख्या वृद्धि, अभिभावकों द्वारा उपेक्षा और सामाजिक अशिष्टता बच्चो को बालश्रमिक बनने पर मजबुर करती है।

परिणाम – बालश्रमिता एक घोर सामाजिक अपराध है और इसे मिटाया जाना चाहिये, केवल एक रोगग्रसित समाज ही ऐसे अपराधों को अपनी समाज में जगह दे सकता है यह एक बुरे और अविकसित समाज की पहचान है। बच्चो को खुल के जीवन जीने की आजादी देनी चाहिये जिससे कि वो खुद को और निखार सके और समाज को उनकी क्षमताओं को देखना चाहिये और प्रयोग में लाना चाहिये क्योकि जैसे समाज बच्चो को ढालेगा वैसे ही बच्चे आगे चलकर समाज को आकृति प्रदान करेंगे।

बालश्रमिता देश के आर्थिक विकास में एक बहुत बड़ी बाधा है।
जब भी बच्चे आर्थिक रूप से संलग्न होते है तो वह उचित शिक्षा से वंचित रह जाते है और हमेशा अच्छे जीवन जीने से उपेक्षित रह जाते है
बाल श्रमिता बच्चो के स्वास्थ्य को बुरी तरह प्रभावित करता है।
जब बच्चे किसी भी प्रकार से फैक्ट्री और खदानों में काम करते है तो वह जल्द ही अनेक प्रकार की बीमारियों का शिकार हो जाते है इस विषय पर सरकार और समाज को तुरंत ही ध्यान देना चाहिए और एक ठोस और कारगर कदम उठाना चाहिये।
वे अपने बालपन को सही तरीके से जी नहीं पाते, जो कि सामाजिक खतरा बन के उभरता है।

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