रातो रात इंटरनेट पर मशहूर हुई प्रिया प्रकाश के गाने पर विवाद।

Posted by Somnath Tiwary
February 17, 2018

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रातो रात मशहूर होने वाली मलयाली एक्ट्रेस प्रिया प्रकाश को अब कौन नहीं जानता, सायद ही कोई ऐसा व्यक्ति हो जो इंटरनेट का इस्तेमाल करते हुए भी प्रिया को ना जानता हो।

चाहे फेसबूक हो चाहे वॉटस्‍प या फिर ट्विटर हर जगह प्रिया ने अपनी जगह बना ली है।

बड़े बड़े मशहूर हस्तियां भी प्रिया के विडियो पर प्रतिक्रिया देने से नहीं चूके चाहे वो ऋषि कपूर हो या फिर राजनीति में अपनी अलग पहचान बनाने वाले जीग्नेस मेवाणी।

बीते 14 फरवरी वैलंटाइंस डे के दिन जीग्नेस मेवाणी ने प्रिया के हिट विडियो से rss पर निशाना साधते हुए लिखा कि भारत में नफरत से ज्यादा प्यार करने वाले लोग रहते हैं।

तथा बॉलीवुड के मशहूर अभिनेता ऋषि कपूर जी ने ट्विटर पर लिखा कि “मै ये भविष्यवाणी करता हूं कि इस लड़की को बहुत स्टारडम मिलने वाला है।मेरी प्यारी प्रिया, आने वाले टाईम में लोग तुम्हें देखने के लिए बेताब होंगे। गॉड ब्लेस यू, इसके आगे उन्होने लिखा मेरे टाइम पर नहीं आए आप क्यों? Lol।

परन्तु बात यही खत्म नहीं होती, यह तो केवल 28 सेकंड की विडियो थी, पूरी फ़िल्म आनी अभी बाकी है।

परन्तु उससे पहले एक बार फिरसे हुबहु पद्मवत के घूमर गाने की तरह मलयाली फ़िल्म ओरू अडार लव के इस गाने ने भी विवाद का रूप ले लिया है। और फिर से रोजगार, भूखमरी, गरीबी, भ्रष्टाचार तथा जल जंगल जैसो मुद्दों को छोड़कर देश की जनता का ध्यान इस विवाद ने अपनी और खिंच लिया है।

जी हा जिस गाने ने सबका दिल जीत लिया अब वही गाना प्रिया के लिए मुसीबत बनती दिख रही है।

हैदराबाद के कुछ युवाओं ने वायरल गाने को धर्म विशेष की संवेदना आहत करने वाला बताते हुए फ़िल्म के निर्माता निर्देशक के खिलाफ FIR दर्ज करायी गयी है।

शिकायत दर्ज कराने वाले इन युवाओं का कहना है कि उन्हे भी विडियो पसंद आया था पर, जब उन्होंने मलयालम के इस गाने का अनुवाद किया तो पाया कि कुछ शब्द ऐसे है जो कि धर्म विशेष की भावनाओं को आहत करते है।

हालाकि एक रिपोर्ट के अनुसार फ़िल्म के निर्देशक ओमर लूलू ने कहा कि यह गाना इस्लाम विरोधी नहीं है बल्कि यह मोहम्मद साहब की तारीफ करता है। यह रोमांटिक गाना नहीं बल्कि एक पारंपरिक गाना है, जो कि कई वर्षों से कुछ अवसर पर गाया जाता है।

गाने का बोल माणिक्य मलराया पूवी का मतलब मोतियों का फूल है जो बेशकीमती होता है। दरअसल मालाबार क्षेत्र में मुस्लिमों द्वारा धार्मिक आयोजनों में यह गीत गाया जाता है। यह गीत पैगंबर मोहम्मद और उनकी पत्नी खदीजा की प्रेम कहानी के बारे में है। यही वजह है कि इस गाने को पैगंबर मोहम्मद का अपमान बताया जा रहा है।

परन्तु सवाल यह है कि जब फिल्म के फैसलों के लिए सेन्सर बोर्ड हमारे देश में है फिर भी हम बार बार ऐसे मुद्दों पर क्यों राजनीति करते है?

क्या हमारे देश मै और कोई मुद्दे नहीं बचे है?

 

 

 

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