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लो आ गया वेलेंटाइन डे बच के रहना रे बाबा

Posted by Adarsh Kumar
February 9, 2018

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देश में एक नया मुद्दा जोर पकड़ते जा रहा है पढ़िए खास रिपोर्ट

वेलेंटाइन डे के विरोध का कुछ लोग जो स्वयं को भारतीय संस्कृति का ठेकेदार बता रहे होते हैं .इस प्रेम दिवस के विरोध में चेतावनी दे रहे होते हैं.इस दिवस को सेलिब्रेट नहीं करने के लिए .मैंने इन विरोधकर्ताओ से ये भी सुना कि ये वेलेंटाइन डे विदेश से आयातित संस्कृति है और यही कारण है कि वो लोग इस प्रेम दिवस का विरोध कर रहे हैं, मुझे लगा कि शायद इन लोंगो को न्यू इयर सेलेब्रेशन के बारे में नहीं मालूम जिसका भारत देश में बहुत जोर शोर से आयोजन होता है, या उनकी परिभाषा ब्रिटेन के झंडे तले बदल जाती है .भारत में किसी भी त्यौहार को मानाने के पीछे धार्मिक भावनाए छिपी रहती है लेकिन पश्चात्य आयातित इस संस्कृति में धार्मिक तो नहीं लेकिन मानवीय भावनाए ज़रूर छिपी हुई हैं .एक ऐसी भावना जो प्रेम और शांति का प्रतीक है .कोई भी चीज़ अच्छी या बुरी नहीं होती बल्कि उसे देखने का नजरिया अच्छा या बुरा हो सकता है उसी तरह वेलेंटाइन डे का औचित्य बुरा नहीं ,अपितु इसकी आड़ में की जा रही अश्लीलता और भौंडापन बुरा है .

विरोध के पीछे की मंसा कुछ और ही होती है वर्ना विरोध के लिये हत्या , बलात्कार, भुखमरी ,आतंकवाद,गरीबी क्यों नही मुद्दे बनते हैं इन विरोधियो के एजेंडे में.

अब एक नजर वैलेंटाइन पर

1260 में संकलित की गई ‘ऑरिया ऑफ जैकोबस डी वॉराजिन’ नामक पुस्तक में सेंट वेलेंटाइन का वर्णन मिलता है। इसके अनुसार रोम में तीसरी शताब्दी में सम्राट क्लॉडियस का शासन था। उसके अनुसार विवाह करने से पुरुषों की शक्ति और बुद्धि कम होती है। उसने आज्ञा जारी की कि उसका कोई सैनिक या अधिकारी विवाह नहीं करेगा। संत वेलेंटाइन ने इस क्रूर आदेश का विरोध किया। उन्हीं के आह्वान पर अनेक सैनिकों और अधिकारियों ने विवाह किए। आखिर क्लॉडियस ने 14 फरवरी सन् 269 को संत वेलेंटाइन को फांसी पर चढ़वा दिया। तब से उनकी स्मृति में प्रेम दिवस मनाया जाता है।

भारत में वैलेंटाइन का विरोध करने वाले तर्क देते हैं कि भारतीय संस्कृति का हिस्सा नहीं है. प्यार करना, लड़के और लड़कियों का खुलेआम मिलना भारतीय संस्कृति का हिस्सा नहीं है. हकीकत ये है कि प्राचीन भारत की परंपराएं प्यार और शादी के मामले में बहुत आगे की रही हैं. कालीदास के एक नाटक में स्पष्ट उल्लेख है कि कैसे एक प्रेमिका बसंत के दौरान लाल रंग के फूल के जरिए प्रेमी के पास प्रणय निवेदन भेजती है. अथर्ववेद तो और आगे की बात करता है. वो कहता है कि प्राचीन काल में अभिभावक सहर्ष अनुमति देते थे कि लड़की अपने प्रेम का चयन खुद करे. कालिदास ने द्वितीय शुंग शासक अग्निमित्र को नायक बनाकर मालविकाग्निमित्रम् नाटक लिखा. अग्निमित्र ने 170 ईसापूर्व में शासन किया था. इस नाटक में उन्होंने उल्लेख किया कि किस तरह रानी इरावती बसंत के आने पर राजा अग्निमित्रा के पास लाल फूल के जरिए प्रेम निवेदन भेजती है.

हिंदू ग्रंथ ये भी कहते हैं कि प्राचीन भारत में लड़कियों को खुद अपने पतियों को चुनने का अधिकार था. वो अपने हिसाब से एक दूसरे से मिलते थे. सहमति से साथ रहने पर भी राजी हो जाते थे. यानि अगर एक युवा जोड़ा एक दूसरे को पसंद करते थे तो एक दूसरे से जुड़ जाते थे. यहां तक कि उन्हें अपने विवाह के लिए अभिभावकों की रजामंदी की जरूरत भी नहीं होती थी. वैदिक किताबों के अनुसार ऋग वैदिक काल में ये विवाह का सबसे शुरुआती और सामान्य तरीका होता था.अथर्ववेद का एक अंश कहता है, अभिभावक आमतौर पर लड़की को छूट देते थे कि वो अपने प्यार का चयन खुद करे. सीधे तौर पर वो उसे प्रेम सबंधों के लिए उत्साहित करते थे. जब मां को लगता था कि बेटी युवा हो चुकी है और अपने लिए पति चुनने लायक हो चुकी है तो वो खुशी-खुशी उसे ये करने देती थी. इसमें कुछ भी अस्वाभाविक नहीं था. अगर कोई धार्मिक परंपरा के बगैर होने वाले गंधर्व विवाह को करता था तो उसे सबसे बेहतर विवाह मानते थे .

जान लीजिए आप अपने खास लोगों के लिए वैलेंटाइन डे को कैसे खास बना सकते हैं—

वैलेंटाइन डे पर जरूरी नहीं की आपकी गर्लफ्रेंड ही आपकी वैलेंटाइन हो. आपके जान पहचान वाले कई लोग इस दिन आपके वैलेंटाइन बन सकते हैं. लोगों का मानना हैं कि इस दिन कपल्स ही एक दूसरे को अपने प्यार का इजहार करते हैं लेकिन ऐसा जरूरी नहीं. वैलेंटाइन डे के दिन आप अपने खास लोगों को, जिनसे आपका ज्यादा लगाव हो उनको भी आप प्यार का अहसास करवा सकते हैं.

1.वैलेंटाइन डे पर आप अपने पार्टनर की बजाय अपनी मां को वैलेंटाइन होने का अहसास दिला सकते हैं. इसके लिए आप उन्हें बाहर डिनर करवाने लेकर जा सकते हैं या घर में उनके लिए खाना बना सकते हैं. उनकी पसंद का खाना बनेगा तो उन्हें और भी अच्छा लगेगा. इसके अलावा आप अपनी मां को इस दिन कोई खास गिफ्ट भी दे सकते हैं.

 

2.इस वैलेंटाइन डे पर आप जरूरतमंद लोगों की मदद कर उनके चेहरे पर खुशी ला सकते हैं. ऐसा करने से आपको भी अच्छा महसूस होगा.

3.अक्सर ऑफिस और घर के काम में व्यस्त होने के कारण घरवालों को समय नहीं दें पाते है. ऐसे में आप वैलेंटाइन डे पर अपने ऑफिस से समय निकालने के साथ ही फोन या किसी दूसरे डिवाइस को दूर छोड़ दें और अपने परिवार वालों को समय दें. ऐसा करने से परिवार के सदस्यों और आपके बीच प्यार बढ़ेगा. वैलेंटाइन डे मौके पर आप अपने घरवालों के साथ मूवी देखने या बाहर साथ डिनर करने का प्लान भी बना सकते हैं.

4.इस दिन अपने सबसे अच्छे दोस्त के साथ आप टाइम बिता सकते हैं. ऐसा करने से उनको भी अच्छा महसूस होगा. आप वैलेंटाइन डे के मौके पर अपने बेस्ट फ्रेंड को फ्रेंडशिप बैंड भी गिफ्ट कर सकते हैं. इसके अलावा आप अपने फ्रेंड के लिए सरप्राइज ट्रिप भी प्लान कर सकते हैं.

 

 

—-आदर्श कुमार

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