हिंदुस्तानियों की पूंजीवादी संवेदनाये

Posted by Dr.Harshit Azad
February 26, 2018

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–बिहार मुजफ्फरपुर हादसा 9 बच्चों की दर्दनाक मौत–

अब हमारी संवेदनाये व मानवता भी पूँजीवाद के पीछे ज्यादा भागने लगी है..मौत तो मौत है दर्द तो दे ही जाता है..लेकिन अगर किसी की असमय मौत हो तो दर्द और भी बढ़ जाता है ..आज दो मौत की खबरें आई लेकिन एक की मौत ने पूरे देश को मानों रुला सा दिया लेकिन बिहार के मुजफ्फरपुर मे 9 बच्चों की दर्दनाक मौत से किसी की आह तक नहीं निकली | एक मौत ने सोशल मीडिया को मानों रुदाली बना दिया हो और 9 बच्चों की दर्दनाक असमय मौत से सोशल मीडिया ना जाने क्यूँ खफा सा है..दरअसल हमारी मानसिकता ही अद्भुत है जहाँ हम मौत पर भी सलेकटीव हो जाते है | ग्लेमर पैसा और ताकत चुंबक की तरह है जहाँ कोई भी जाना चाहता है तो इसका मतलब यह तो नहीं की हम समाज के बहुसंख्यक ग्रामीण मौत पर संवेदनहीन हो जाएँ ..श्रीदेवी की मौत ने सदमा दिया तो 9 मासूमों की मौत ने बैचैन कर दिया | बहुत बहुत श्रधांजलि दुबई और मुजफ्फरपुर के हादसे पर | लेकिन हाँ एक मौत पर ट्विट आ चुका है लेकिन 9 बच्चों की मौत पर ट्विटर खामोश क्यूँ..?

 

इंसान की कीमत व उनके खोने का दर्द अलग-अलग क्यों?? सायद हम असंवेदनशील व vvip कल्चर से ग्रषित हो गए है..

 

-सोशलिस्ट डॉ. हर्षित आजाद

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