हिंसा भरे इस माहौल में कुछ रंग हो मोहब्बत के महीने का

Posted by Rizavana Tabassum
February 2, 2018

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फ़रवरी का महीना यानी मोहब्बत का महीना।  कुछ प्यार करने वाले लोगों को इसका इंतज़ार कई महीने से होता है तो कुछ लोग इंतज़ार कर रहे होते हैं कि वो इस महीने अपने प्यार का इजहार करेंगे, कुछ लोग अपनी भागती दौड़ती ज़िन्दगी में रुक जाना चाहते हैं, और अपने प्यार के साथ इसे और स्पेशल बनाना चाहते हैं।

इस महीने की शुरुआत तो हो चुकी है लेकिन क्या देश में चल रहे इस माहौल में लोग इस महीने को सेलिब्रेट कर पाएंगे? कहीं  दंगे तो तो कहीं हिंसा, कहीं हिन्दू-मुस्लिम तो कहीं लव जिहाद, कहीं भगवा-हरा तो कहीं मंदिर-मस्जिद की बातें हो रही हैं, कहीं एंटी रोमियो चलाये जा रहे हैं तो कहीं साथ-साथ लड़की लड़का को देखकर उनकी शादी करवा दी जाती है।

इस तरह के डरावने और हिंसा भरे माहौल में कोई कैसे अपने पार्टनर के साथ कहीं बाहर जाने का विचार कर पायेगा? कैसे दो अलग-अलग धर्म के लोग अपने दिल की बात सुन पाएंगे?

इन सब से परे अगर कुछ लोग भी इस महीने खुशियाँ समेटने में कामयाब हो गए तो शायद धर्म के ठेकेदारों को कुछ अक्ल आ जाए, शायद उन्हें लोगों के जज़्बात की क़द्र हो। हम तो यही चाहेंगे कि इस फ़रवरी हर प्यार करने वाली की ख्वाहिश पूरी हो, उनके साथ कोई राजनीति खेल ना हो, उनके प्यार को किसी जिहाद का नाम ना दिया जाय। ये “मोहबबत-ए-फ़रवरी है कोई दिसम्बर नहीं।”

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