आखिरकार पंजाबी गाना इतना “बदनाम” क्यों हो गया है?

Posted by Aman Brar in Culture-Vulture, Hindi, Media, Society
February 26, 2018

क्यों पंजाबी “मुंडा” किसी “कुड़ी” को छेड़ने, नशा कर घूमने को गलत नहीं, बल्कि उसे अपनी शान और शौकत समझने लगा

एक बार किसी नामी विद्वान ने कहा था कि “आप मुझे बस इतना बता दीजिये की आपके देश के युवाओं की ज़ुबां पर किस तरह के गीत चढ़े हुए हैं, मैं आपको आपके देश का भविष्य बता दूंगा।” उस विद्वान की कही हुई ये बात आज पंजाब के युवाओं पर पूरी तरह फिट बैठती है। अगर आप यकीन नहीं मानते तो बेझिझक एक चक्कर यूट्यूब पर पंजाबी गानों को सुनने का लगा दीजिये। किसी गैंगस्टर को हीरो की तरह पेश करने वाले, लड़की को छेड़ने में मज़ा लेने वाले, नशा करने को शान की बात बताने वाले, बन्दूक से गोली चला कर किसी को मार देने को इज़्जत की चीज़ बताने वाले पंजाबी गीतों की भरमार आपको मिल जाएगी।

लेकिन मज़ेदार बात यह है कि ये गाने न सिर्फ पंजाब के युवाओं की ज़ुबां पर चढ़े हैं बल्कि हर पार्टी, शादी समारोह का हिस्सा बन चुके हैं। आलम यह है कि गाने को सुनकर अब पंजाबी मुंडा किसी कुड़ी को छेड़ने, नशा कर घूमने को गलत नहीं, बल्कि उसे अपनी शान और शौकत समझने लगा है।

10 में से 8 गाने नशे और हिंसा को बढ़ावा देने वाले

जेल विचों फोन आऊंनगे, वेखी परखी ना पहुंच जट्ट दी, साडे धाकड़ ये यार ने चलाउन फेसबुक अन्दरों बने जेलों दे सिंगार ने (मेरी पहुंच पर सवाल मत खड़े करना वरना तुम्हें जेल में बंद गैंगस्टरों के फोन आएंगे, जेल में बंद मेरे बड़े धाकड़ यार मोबाइल और फेसबुक चलाते हैं वो तो जेल का श्रृंगार बने हुए हैं।), ये एक सुपरहिट पंजाबी गीत है जिसे अब तक 2 करोड़ 60 लाख से भी ज़्यादा लोग देख चुके हैं। आंकड़ें साफ़ बताते हैं कि पंजाब के हर घर तक ये गाना पहुंच गया होगा और बाद में इस गाने का असर ऐसा हुआ कि किसी नामी-खामी गैंगस्टर को पंजाबी युवा अपना आदर्श मानने लगे। जिन्हें गानों में हीरो के तौर पर पेश किया गया, उनको गुंडे नहीं भाई बनाया जाने लगा।

गुंडे नहीं “शेर” कहिए जनाब

कुछ दिन पहले एक नामी गैंगस्टर विक्की गौंडर पंजाब पुलिस ने एन्काउंटर में मार गिराया, लेकिन इस एन्काउंटर को सोशल मीडिया पर फर्ज़ी बताते हुए कार्रवाई में शामिल सभी पुलिस वालों को मार डालने की धमकी दे दी गई।

जिसके बाद ऐसे फेसबुक पेज संचालित होने लगे जिनमें इन गुंडों को “शेर” बताया गया। पंजाबी गानों से सीख लेने वाले युवाओं ने हाथों-हाथ पंजाबी गानों की डराने और हिंसा को बढ़ावा देने वाली लाइनें लिख साथ में इन गुंडों को “शेर” बना दिया। गैंगस्टरों के फैन पेजों पर लाइक और कमेंट भी जमकर आते हैं। जेल में बंद गैंगस्टर लॉरेंस बिश्नोई का फेसबुक पेज देखकर भी आप अंदाज़ा लगा सकते हैं।

पंजाबी कुड़ी की इज़्जत है बंदूक चलाना

एक पंजाबी गाने में लड़के को 16 और 17 साल की उम्र तक तो ठीक रहने पर 18 साल का होने पर गाली देने से शुरुआत करते हुए, चोरी की बन्दूक खरीद लेने, दोस्त की शादी में बिना पानी डाले दारु पीने, किसी को पीट कर उसकी गाड़ी तोड़ जाने और किसी को गोली मारते हुए किसी भी बात की टेंशन न लेने को बखूबी दिखाया गया।

इस गाने को सिर्फ यूट्यूब पर देखने वालों की गिनती 10 करोड़ 33 लाख है। वहीं अब लड़कियों को भी किसी दूसरी लड़की से बॉयफ्रेंड के पीछे गोली चलाते हुए फिल्माया जाना आम हो गया है जिसे बड़े परिवारों की इज़्ज़तदार लड़कियों के रूप में चित्रित किया जा रहा है।

सेंसर बोर्ड का गठन करने से पहले चेयरमैन चुन लिया

इंडियन इंस्टिट्यूट ऑफ मैनेजमेंट-अहमदाबाद के प्रोफेसर धीरज शर्मा ने अपने रिसर्च में 50 पंजाबी गीतों का अध्ययन किया जो 18 से 25 वर्ष की उम्र तक के 200 युवाओं के पास से लिए गए जिन्हें वो अपने फोन में ज़्यादातर सुनते थे, जब इन गानों को सुना गया तो उन्होंने पाया कि बहुमत में युवाओं को हिंसा करने और नशीली दवाओं के दुरुपयोग करने को प्रेरित करने वाले गाने थे।

विरोध देख राज्य सरकार ने पंजाब में अलग से सेंसर बोर्ड बनाने की घोषणा भी कर डाली, यहां तक कि पंजाब के मशहूर कवी सुरजीत पात्र को चेयरमैन तक बनाने का ऐलान कर दिया पर अभी तक ये फैसला भी ज़मीन पर उतरने की बजाय सरकार की दूसरी घोषणाओं की तरह हवाई फायर ही नज़र आ रही है।

“आंदोलन के रूप में लड़ेंगे”

जगह तेरी टाइम तेरा डांग मेरी वहम तेरा रही खड़ा बस जट्ट कड्डों आन के ( जगह तुम्हारी पसंद की होगी टाइम भी तुम तय करना पर डांग मेरी होगी जो तुम्हारे सारे वहम दूर कर देगी) या जिन्हीं तेरी कालेज दी फीस झल्लिये उन्हीं नांगनी जट्टां दा पुत्त खांदा तड़के ( सुन लड़की जितनी तुम्हारी कालेज की फीस है उतने पैसों का नशा तो मैं सुबह उठते वक्त ही कर लेता हूं ), इस तरह के पंजाबी गानों के खिलाफ खुल कर विरोध तेज़ होता हुआ नज़र आ रहा है तभी पत्रकारों और कुछ कल्चरल संगीतकारों ने जब इसी को लेकर पंजाब की कैप्टन सरकार में मंत्री नवजोत सिंह सिद्धू से सवाल दाग दिए तो मंत्री जी ने बताया कि वो भी इस तरह के गानों से काफी आहत हो रहे हैं और अब फैसला कर चुके हैं कि “हम इस तरह के गानों से एक आंदोलन के रूप में लड़ेंगे।”

 गंदी तो सोच होती है बस

पंजाब के मशहूर सिंगर बब्बू मान के विचार इस मुद्दे पर काफी अलग हैं उनसे जब गानों में बढ़ रही लच्चरता के बारे में पूछा गया तो उन्होंने कहा कि “आप ही तो इस तरह के गाने सुनते हैं, इन गानों को हिट कौन बनाता है, यूट्यूब पर व्यू कौन बढ़ाता है सब आप लोग खुद करते हैं, ऐतहासिक किताबें भी अश्लीलता  से भरी हुई है आप उनको पढ़ना भी बंद कर देंगे? लच्चर तो सोच होती है गाने कभी लच्चर नहीं होते”.

शायद बब्बू मान यहां पर ये अंदाज़ा नहीं लगा पाए कि बेरोज़गारी की मार झेल रहे पंजाबी युवाओं के लिए गानों के बोल गलत सोच ही नहीं गलत काम करने का भी उल्लास दे रहे हैं।

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