अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस की शुभकामनायें

Posted by Suny Tomar
March 9, 2018

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अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस की शुभकामनायें

ये शुभकामनायें उनकी जीत के लिये है जो उन्होंने हासिल की. ये दिन खास है..पर अगर ये देखने जाओ की कितना खास है और लोग इस खास दिन को कैसे मनाते हैं या उनके पास इसकी क्या जानकारी है..तो इस दिन के कुछ अनुभव् है मेरे पास जो में साझा करना चाहता हूँ.

रोज ही की तरह मैं घर से ऑफिस के लिये निकला. वो अनजान लोग जो मेरी ही तरह रोज अपने घर से काम पे निकलते हैं और मुझे रोज उसी रास्ते पे मिलते हैं जो की बस स्टैंड या मेट्रो की तरफ जाता है और बहुत ही सामान्य रास्ता है. वो लोग और खासकर के महिलाएं आज भी उसी तरह काम पे जा रही थी जैसे रोज जाती है. उसी रास्ते पे 2 मेडिकल स्टोर पड़ते हैं उन मेडिकल स्टोर में लगे फोटो में आज भी सनी लियोन कंडोम बेच रही थी. उसी रास्ते में पड़ने वाली एक झुग्गी जिसे मुझे रोज थोडा सा छू के गुजरना होता है. वहां भी आज कुछ ख़ास मुझे नहीं दिखा… आज भी वो छोटी सी लड़की उसी लकड़ी से जलने वाले चूल्हे पे खाना बना रही थी. और वहीँ पानी के लिये लगने वाली लाइन में एक और छोटी लड़की अपने 4 डब्बों के साथ खड़ी होके अपनी बारी इंतज़ार कर रही थी. फ्लाईओवर पे ले जाने वाली सीढियों पे बैठी वो बूढी औरत आज भी भीख ही मांग रही थी. उसके चहरे पे आज भी वही रोज वाली परेशानी और दुःख था.

वो बस जिसमे मुझे रोज जाना होता है उसमे मुझे कुछ आधुनिक किस्म की पढ़ी लिखी लडकियाँ दिखी जिनके हाथ में आधुनिक किस्म के एंड्राइड फोन थे और वो एक earphone के माध्यम से उनके कानो से जुड़े हुए थे. ज्यादातर दिखने में इतनी ही आधुनिक थी. वो शायद इस ख़ास दिन पे कुछ खास काम अपने एंड्राइड फोन में कर रही थी…….पर शायद.

वो जगह जहाँ से मुझे मेरे ऑफिस की गाडी उठाती है वहाँ एक मंदिर है उस मंदिर के बाहर आज भी रोज ही की तरह काम पे आती जाती औरतें 1 मिनट खड़ी होके मंदिर के अन्दर विराजमान उस पत्थर की मूरतरूपी इश्वर से अपने लिये इस खास दिन पे शायद कुछ खास मांग रही हो….पर शायद.

मेरे ऑफिस की गाडी आ जाती है और में उसमे बैठ जाता हूँ. गाडी में हम 5 लोग थे जिसमे 1 महिला थी. और चूँकि कल उस महिला से महिला दिवस पे कुछ यूँ ही थोड़ी से बात हुई थी तो मेरे बैठने पे उसने कहा.. “महिला दिवस की शुभकामनाये नहीं दोगे”…..

तो मैंने उनको शुभकामनाये दी…ये सुनके बाकी के 3 पुरूषों को पता चला की आज तो महिला दिवस है फिर महिला दिवस पे थोड़ी चर्चा होनी शुरू होती है….

उन्ही 3 पुरुषो में से एक 65 साल के एक बुजुर्ग के अनुसार….. “महिला दिवस का मतलब अच्छे से सजना सवरना और अच्छा खाना बनाना है”

बाकी 2 पुरुषों की कोई राय ही नहीं थी…..उन्हें इसके बारे में पता ही नहीं था…

और हमारी गाडी की एकमात्र महिला के लिये ये सुनना बड़ा ही आश्चर्यजनक या हिला देने वाला था कि….जब ट्रेन में मिली एक लड़की ने उससे कहा कि वह एक नारीवादी है और उसे चाय बनानी नहीं आती.

असल में महिला दिवस क्या है इसका इतिहास क्या है….. इस दिन को महिलाओं ने कैसे हासिल किया है…. महिलाओ को और क्या-क्या हासिल करना है…..   ये चर्चाये आम जगहों या सामान्य लोगो के बीच का हिस्सा क्यूँ नहीं होती….. क्यूँ लोग ये समझते हैं की महिला दिवस का मतलब यही है की आज के दिन उसे छुट्टी दे दी जाये….या फिर उनको पता ही नहीं की ऐसा कोई दिन भी होता है …. यह विरासत जोकि महिलाओ ने अपने दम पे लड़ के हासिल की है क्यूँ इसकी जानकारी लोगों तक नहीं पहुंच पाई है.

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