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अनाज जिसके लिए हम दिन रात मेंहन्नत करते हैं उसका भी सम्मान करें,

Posted by वली सैफी
March 8, 2018

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सभी धर्मो में स्पश्ट कहा गया है कि हमें सभी का मान सम्मान करना चाहिए और अनाज जिसके लिए हम दिन रात मेंहन्नत करते हैं उसका भी सम्मान करें, लेकिन ये बात षायद हम लौग अपने परिवार तक ही सीमित रखते हैं कि भोजन को व्यर्थ होने से बचाते हैं मगर बात जब किसी विवाह समारोंह की होती है तो हम भूल जाते हैं कि इस व्यंजन के लिए ही हम दिन रात संद्र्यश करते हैं

मैं बात अपने भारत देष के सबसे बडे राज्य उत्तर प्रदेष की करना चाहूंगा कि मैंने कई ऐसे गांवों में देखा है कि हम जो प्लेट में थोडा बहुत भोजन छोड के आगे बढ जाते हैं वह भोजन किस का होगा इसके लिए कई लौग अपना अपना दावा थोक देते हैं कि मैं पहले आया था यहां इसलिए ये भोजन मेरा हैं,

ज्ी हांः आज भी देष के ग्रामीण क्षेत्रों में आम जनता भूख्मरी की षिकार है वह जो सिर्फ इसी आस में रहते हैं कि कब कहंा कोई समारोह हो और हम झूठन को प्राप्त करें। उन के नसीब में ऐसे पकवान सिर्फ सपने में ही दर्षन दे सकते हैं सच्चाई यह है कि उन्हें अगर झूठन भी मिल जाए तो वह खुद को भाग्यवान समझते हैं।देष में भोज कराना राश्टीय सभयता है बच्चे का जन्म हो या कोई विषेश अवसर लौग भोज कराने से पीछे नहीं हटते कुछ लोगों को तो सिर्फ अवसर चाहिए कि कब वह अपने सहयोगियों को भोज पर बुलाए मगर अफसोस उन्हें न तो अपने पडोसी नजर आते और न ही वह सादगी से समारोह करते, समारोह में किसी निर्घन को षामिल करना उनके सम्मान में कलंक के समान, मानवता की सभी सीमाए तोड कर अपने समाज को अन्देखा करके कर अनाज की ब्रबादी जारी है इन पर कोई अन्कुष लगाने वाला नही है,
अन्त में हम यही कहना चाहुंगें कि

 

ईश्वर अल्लाह तेरे नाम, सबको सन्मति दे भगवान
सबको सन्मति दे भगवान, सारा जग तेरी सन्तान

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