उस दिन का इंतजार मत कीजिए जब हर अंकल और भैया को रेपिस्ट की नजर से देखा जाए।

Posted by Srijan Gupta
March 3, 2018

NOTE: This post has been self-published by the author. Anyone can write on Youth Ki Awaaz.

मैं बहुत ही फक्कड़ी किस्म का व्यक्ति हूं। ज्यादातर अकेला रहता हूं और अकेला ही सफ़र करता हूं। जब भी कभी बस, ट्रेन या मेट्रो में सफर करता हूं तो कान में इयरफोन लगाकर नाचता रहता हूं और जब इयरफोन नहीं रहते हैं तब तलाश रहती है किसी हमसफ़र की। और ज्यादातर मेरी तलाश बच्चों पर आकर ही खत्म होती है। ऐसा इसलिए क्योंकि जब बड़े लोगों की तरफ देखता हूं तो उनके खुंदस भरे उतरे चेहरे देखकर उनसे मजाक करने की हिम्मत नहीं होती। अजीबों गरीब टेढ़ी मेढ़ी शक्ल बनाकर बच्चों को चिढाना, उनके साथ मस्ती करना, उनके गालों को पकड़कर पिंच करना, उनकी टॉफियां छीनना ये सब मेरी हरकतों का हिस्सा रहती है। अब ये सब गलत है या सही मुझे नहीं पता लेकिन एक बात तो है ये सब कर के सुकून बहुत मिलता है मुझे।

लेकिन पिछले कुछ दिनों से एक अजीब सा डर मेरे जहन में रहने लगा है जिसकी वजह से सफर के इन नन्हे हमसफ़रों से दूरियां बढ़ने लगी है या खुद ही बढ़ाने लगा हूं। इसके पीछे मुझे दो कारण दिखाई देते है।

पहला तो कि ये अक्सर जब भी में किसी अजनबी बच्चे खासकर बच्ची से दोस्ती करने का प्रयास करता हूं , तो देखता हूं। कि उनके मां बाप उन्हें आंखो ही आंखो में डराकर हिदायत देने लगते है। मां बाप और बच्चे के बीच बिना शब्द और बिना आवाज़ वाला यह संवाद इतना प्रभावशाली होता है कि बच्चा चुपचाप अपनी नजरें नीची करके अपने मां बाप के पास खड़ा हो जाता है। और मैं वक्त और हालात के मुताबिक की गई इस हरकत को जायज ठहराते हुए उनका मुंह ताकता रहता हूं।

दूसरा पिछले कुछ दिनों और महीनों के दरम्यान अखबारों में छपी हुई खबरें जैसे

एक आठ महीने की बच्ची के साथ उसके चाचा द्वारा बलात्कार।

एक नौ साल की बच्ची के साथ 70 साल के बुजुर्ग द्वारा बलात्कार

5 साल की बच्ची के साथ दो पुलिसकर्मियों द्वारा बलात्कार

इन खबरों का असर यह है कि मैं खुद भी अब शर्मिंदगी से बचने के लिए उस बचकानी आदत का गला घोंटने लगा हूं।

बड़ा असहाय , बेबस और लाचार सा महसूस करता हूं जब किसी अन्य व्यक्ति द्वारा किए गए अपराध के कारण मुझे इन हसते हुए, मासूम चेहरों से दूरी बनानी पड़ती है।

ऊपर लिखी गई चंद लाइनों में मैंने अपना पर्सनल एक्सपीरिएंस शेयर किया है। अब इसका पोस्टमार्टम करना आप सभी पाठकों का काम है।

 

Youth Ki Awaaz is an open platform where anybody can publish. This post does not necessarily represent the platform's views and opinions.