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क्या आप जानते हैं भारत के 97% बलात्कार, पीड़ितों के परिचितों द्वारा किए जाते हैं ?

Posted by जोश Talks
March 10, 2018

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रात में अकेले बाहर मत जाना !
छोटे कपड़े देखकर ही तो लोगों की नियत ख़राब हो जाती है !
पलट कर जवाब मत देना !
ऐसी बहुत सी बातें आप में से कुछ लोगों ने कहीं होंगी तो कुछ ने सुनी होंगी। लड़कियों को दिए गए इन निर्देशों से हमारे देश में हो रहे बलात्कारों की संख्या को कम नहीं किया जा सकता। सुनसान सड़कों को सुरक्षित बनाकर इन बलात्कारों को हम रोक नहीं सकते। 

भारत में हो रही यौन हिंसा के मिथक को मिटाने के लिए सुनें जोश टॉक्स का यह पॉडकास्ट।


क्यों सिर्फ एक अनजान बलात्कार करे तो वही सजा का भागीदार है, अपराधी तो वो आदमी भी है जो अपनी पत्नी का यौन-शोषण करता है।”           

 “2014 के कुछ अध्ययन द्वारा ये बात सामने आई कि हमारे देश में लगभग दो- तिहाई महिलाएं अपने पति द्वारा ही योन हिंसा का शिकार बनती हैं।” मीडिया द्वारा दिखाए गए बलात्कार की खबरें अक्सर यही होती हैं कि किसी अनजाने ने रेप किया। “असल जानकारी के अनुसार 2095 में से 2024 दर्ज बलात्कार मामलों में अपराधी, पीड़ितों के परिचित ही होता हैं।”
हिन्दू अखबार द्वारा की गई जांच की रिपोर्ट अनुसार 2014 में 80 % रेप घर के अंदर ही हुए हैं, जिसे हम सुरक्षित बताते हैं।
एक ऐसा देश जहाँ वैवाहिक बलात्कार कानूनी तौर पर सही बताया जाता है और जान-पहचान के आदमी ही बलात्कार कर रहे हैं वहां छोटे-कपड़ों को मनाही देकर और अकेले आने-जाने की रोक लगाने से बलात्कारों की संख्या कभी कम नहीं होंगी।
बलात्कारों की संख्या कम कैसे हो इसके लिए हमें मूल कारणों पर ध्यान देना होगा। वैवाहिक बलात्कारों के खिलाफ कानून को फैसले लेने होंगे। लज्जावश अधिकतर घरेलु-यौन शौषण दबा दिए जाते हैं। जब नारी घर की चारदीवारी में ही सुरक्षित नहीं है तो उसकी सुरक्षा बाहर कैसे होगी।

48 घंटों में 5 रेप कर दिए जाते हैं, सिर्फ 5 महीनों में 836 बलात्कारों के मामले दर्ज किए जाते हैं। जिनमें से अधिकांश मामले घरेलु बलात्कारों के होते हैं। केवल असुरक्षित सड़कों पर सवाल मत उठाओ, सवाल उठाओ हमारी संपूर्ण संरचना पर, हमारी सोच पर।
अपनी सोच बदलो और समाज को एक बेहतर जगह बनाओ। घरेलु हिंसा और किसी भी प्रकार के घरेलु यौन शोषण के खिलाफ स्वयं औरतों को और उनके परिवारों को ही आवाज़ उठानी होगी। बदलाव की शुरुवात हमें ही करनी होंगी

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