क्या महिला पुरुष एक है ?

Posted by dinesh shinde
March 8, 2018

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8 मार्च को महिलाओं के शक्ति का आदर करनेवाली बातें सुनकर सुकून मिलता है. ऐसा महसूस होता है हम समाज के तौर पर विकास कर चुके हैं. महिलाएं एक सुख, सुरक्षा के साथ जिंदगी जी रही हैं.

ऐसे में एक बात यह भी है कि आज अगर हमें महिला दिवस मनाने की आवश्यकता पड़ रही है तो यह निश्चित रूप से सोचने की बात है.

सभी लोग समाज के तौर पर बदलने का नाटक कर खुद को झूठे सपने के साथ जीने के लिए मजबूर कर रहे हैं. महिलाएं अभी भी सुरक्षित नहीं है क्योंकि कुछ बुद्धिजीवी (महिला कमजोर होती है विचार रखनेवाले) महिलाओं पर तंज कसते हैं, उनको दबाए रखना चाहते हैं. हजारों, लाखों वर्षों से महिलाओं के साथ गलत बर्ताव होता आया है. आजकल ट्रोल करनेवाले लोग ज्यादा दिखाई देते हैं. यह ट्रोल करनेवाले लोग सेलेब्रिटीज तथा आम लोगों को भी ट्रोल करने का मौका नहीं छोड़ते, भलेही कुछ अच्छा काम किया हो, लिखा हो. हां, एक और बात यह ट्रोल करनेवाले संस्कारी लोग संस्कार सिखाते हुए शब्दों की मर्यादाएं याद नहीं रखते. पुरुषों के मानसिकता को चुनौती देते हुए महिलाओं ने समानता की लड़ाई लड़कर खुद का स्थान स्थापित किया. महिलाओं के साथ गलत बर्ताव का एक उदाहरण होली के पहले भी देखने मिला जब दिल्ली यूनिवर्सिटी की स्टूडेंट पर सीमन (वीर्य) भरे गुब्बारे फेंकने की घटना घटी. बहुत से आर्टिकल्स, प्रोग्राम्स में महिलाओं पर होनेवाले अत्याचार की जानकारी विस्तार से बताई जाती है.

महिलाओं के प्रति छोटी सोच रखनेवाले लोगों को, या महिला-पुरुष की तुलना करनेवाले लोगों एक बात समझनी चाहिए कि महिला पुरुष अलग अलग नहीं बल्कि एक शक्ति हैं. बचपन से ही लड़का लड़की की तुलना करने के बजाय साथ रहने की सीख देनी होगी. भले ही छोटी शुरुवात लगे पर खुद में यह बदलाव लाने से छोटी छोटी बातें बड़ा असर करेंगी.

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