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जेएनयू में हिन्दी वाले क्यों हैं परेशान?

Posted by ABHINAV PATHAK
March 7, 2018

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जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय एक बार फिर चर्चा में है। अबकी बार बवाल एडमिशन में कथित गड़बड़ी को लेकर है। दरअसल जेएनयू में एमफिल की नामांकन परीक्षा का रिजल्ट पिछले हफ्ते आया है।इस परिणाम को देखकर यहाँ हिन्दी के छात्र सदमे में हैं।

दरअसल हिन्दी केंद्र में एमफिल की 12 सीटों पर नामांकन के लिए करीब 750 छात्रों ने परीक्षा दी थी। इसमें से मात्र चार छात्रों को साक्षात्कार के लिए बुलाया गया है। इन छात्रों के साक्षात्कार की तारीख 12 मार्च तय की गई है।

यहाँ के छात्रों का कहना है कि एडमिशन प्रक्रिया में पारदर्शिता नहीं बरती गई है। एमफिल में नामांकन के लिए यहाँ के पूर्व छात्रों के अलावा डीयू के छात्रों ने भी अप्लाई किया था।इनमें से सभी छात्रों को परिणाम देखकर झटका लगा है।

ये सभी छात्र पिछले एक हफ्ते से हिन्दी के विभागाध्यक्ष से लेकर कुलपति कार्यालय का चक्कर लगा रहे हैं।
गौरतलब है कि पिछले साल जेएनयू ने हिन्दी के साथ साथ कई भाषाओं में एमफिल की सीट शून्य कर दी थी जिसका बड़े स्तर पर विरोध हुआ था।

विश्वविद्यालय का क्या है पक्ष: विश्वविद्यालय प्रशासन का कहना है कि उसने यूजीसी के सभी नियमों का पालन किया है। एमफिल मेंं एडमिशन के लिए 80 अंको की परीक्षा हुई थी।जिसमें न्यूनतम 50 प्रतिशत अंक लाने वाले छात्रों को ही एडमिशन मिलना था।

छात्रों कहते हैं  कि कॉपियों को जाँचते वक्त गड़बड़ी की गई है और आरक्षण नीति का पालन नहीं किया गया है।

ये सभी छात्र कॉपियों के पुनर्मूल्यांकन और इसके लिए दोषी शिक्षकों की बर्खास्तगी की माँग कर रहे हैं।इस बाबत विश्वविद्यालय के कुलपति एम. जगदीश कुमार के साथ सोमवार को बैठक हुई थी। बैठक में उन्होंने हिन्दी केंद्र के विभागाध्यक्ष के साथ मिलकर समस्याओं को सुलझाने का आश्वासन दिया है। हिंदी केंद्र के पूर्व छात्र रत्नेश गुप्ता ने कहा है कि सन्तोषजनक कार्रवाई नहीं होने पर छात्र आंदोलन करने को मजबूर होंगे।

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