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नारी की व्यथा:तब से अब तक

Posted by सौरभ सौजन्य
March 8, 2018

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#Must_read
माँ-बहन-पत्नी के अनेकों किरदार तुम निभाती हो

दुख में सुख में,हर हालातों में ढल जाती हो।।

कभी गंगा सी ममता लिए मृत्यशैय्या पर पुत्र भीष्म की प्यास बुझाती हो

कभी राष्ट्ररक्षा ख़ातिर फौलादी हृदय वाली धाय मां पन्ना बन जाती हो।।

युद्घ भूमि में भी न जाने कितने कौशल तुमने दिखलाएं है

पत्नी रूप में यमराज से भिड़कर सत्यवान के प्राण बचाये हैं।।
सदियों से तुमने तो अपना फर्ज अन्तिम सांसो तक अदा किया है
फ़िर भी पता नही क्यो समाज ने स्त्री को दर्जा दोयम दिया है?
उसी समाज ने मां सीता की पवित्रता पर भी सवाल खड़ा किया है?
इतना ही नही निर्भया का बलात्कार उसी समाज के एक हिस्से ने ही किया है

व्यथित हूँ! विचलित हूँ ! हालातों को कैसे बदलूँ
इतने वर्षों के तुम्हारे अपमान को और कैसे ढो लूं।।

तुम्हारे हृदय को समझूँ इतनी मेरी समझ नही
इसलिए इस व्यथा गीत को यही विराम करता हूँ।।

Unknown
नारी की व्यथा:तब से अब तक

अंतिम में नारी के हर रूप को सादर प्रणाम करता हूँ.. प्रणाम करता हूँ ..🙏

#happywomenday

@सौरभ सौजन्य

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