बदचलन औरतें || विशाल जजावरा

Posted by Vishal Jajaora
March 8, 2018

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वो औरतें जिनसे कोई प्रेम नही करता मगर वो सबसे प्रेम करती है जिन्हें बहुत प्रेम करने की आदत थी। वो औरतें जो माँ तो बन सकती थी लेकिन किसी की पत्नी नही। इन औरतों के पैर ज़मीं पर नही रहते है, वे अपने अरमानों की और उड़ान भरती। वो औरतें महसूस कर सकती है इनके चेहरे पर हवाओं को, खुशफहमी इनकी नज़रों में होती है। वो औरतें मजबूरी की गठरी छोड़ शौक को पूरा करने में यकीन रखती है। बदचलन औरतें सबसे अच्छी होती है।
हाथ बढ़ाओ तो हाथ थाम लेती है, मुस्कुराओ तो मुस्कुरा देती है, नज़रे मिलाना चाहो तो आँखों मे आँखे डाल देती है।
न किसी बात की फ़िक्र न किसी बात का डर। इन्हें अत्यधिक प्रेम करने की आदत होती है ,ऐसा नही की पुरुषों ने इनसे प्रेम नही किया पुरूष इनके लिए आंहे भरते रहे, कविताएं लिखते रहे, तोहफे लाते रहे। इनके दिल मे बहुत प्रेम था सबके लिए मगर सबके दिल मे इनके लिए कम प्रेम था या क्षणिक भर का प्रेम।
कितनी ही बार इन बेचारी औरतों ने अपने यौनि के रास्ते अपना खून बहा डाला और बहा डाली उनके चरित्र पर की गई ओछी बातें, गालियाँ सबकुछ। वो एक लंबी सांस भरती, कांच में देखकर खुद से आंख मिलाती दोनो बोहों के बीच बिंदी चिपकती अपने बालों को कानों के पीछे कसोटती, खुद को देख मुस्कुराती, और आगे बढ़ती।
इनके लिए प्रेम के मायने कुछ और थे और समाज के लिए कुछ और।
वो मुँह पर हाथ रख कर रोती रही जाने कब खुद ही के गले लग के सो गई। जितनी सफाई से वो एक स्ट्रोक में काजल लगा सकती थी उतनी सफाई से प्रेम न कर सकीं।
वो चार लोगों के बीच ठठ्ठा मारकर हंस पड़ती। वो नए पुरुषों से मिलती नए कपड़े पहनती, सिगरेट सुलगाती, छल्ले बनाती और धुंए के साथ मन के सारे बोझ को हवा कर देती। उन्हें जीवन भर आस रही प्रेम मिल पाने की। वे समाज, परिवार, रिश्ते, नातों से बंधकर नही रही क्योंकि वो तो सिर्फ प्रेम करना चाहती बेइंतेहा प्रेम। वो चरित्रवान न रह सकीं।
उनको स्वप्न था किसी राजा के आने का जो उन्हें टूटकर चाहे और निःस्वार्थ प्रेम करे।
वो मरना चाहती थी सुहागन ही।
मगर ये हो न सका उनका मर्म दुख कोई नही जान पाया वो औरतें जिन्हें दुनिया बदचलन कहती है वो आज भी हमारे बीच प्रेम को ढूंढ रही है।
ऐसी औरतें अगले जन्म में तितली बनकर पैदा होती है।

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