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युवापन

Posted by Ankit Shrivastava
March 3, 2018

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खुन अगर है गरम
तो तोड दे सारे जाल को,
तु युवा है, कोई खेल नही है ,उछाल इस मजाल को।

शक्ति ही जीवन है, यह बात तो स्पष्ट है,
फिर तो संघर्ष भी पक्का है महीषासुरों से।
लडना है, लडते ही रहना है, पर स्वतंत्र भी रहना है,
स्वतंत्रता ऐसी जिसमें खुद को मापेगा तु खुद के पैमाने से।

तुम्हारी परीभाषाएं मुझे नही चाहिए,
जिनमे तुम्हारे जिन्दगी का संदर्भ हो, तुम्हारा विवेक हो, तुम्हारी दृष्टी से,
मैं जानता हुं तुम्हें , पर हमेशा मान नहीं सकता,
मैं पुन: परीभाषित करूँगा जीवन को स्वयं कि प्रकृति से।

मैं तो मैं हुँ, वर्तमान जन्म मे सबसे अलग,
मेरे युवापन से तुम डरना मत।
प्रकृति कि सामने नन्हें पुर्वजों के इतिहास को,
मैं एक नया आयाम दुँगा पर तुम गीरवी मत रहो।

मै लडुँगा, जितने के लिए नहीं, नए आयाम के लिए,
पर थकुँगा तो तुम सहला देना मेरे बालों को,
मैं रोऊंगा तो रो देना थोडा सा तुम भी,
अर्थात तुम्हारा रहना अत्यन्त आवश्यक है।

नए आयाम पर नए लोग तो मिलेंगे पर,
रस तो उसमें है जो परिवर्तन को प्रत्यक्ष कर सके।

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