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लड़कियों कांटा बनो फूल नही

Posted by Swatantra Yadav
March 8, 2018

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लड़कियों,तुम शायद बचपन से सुनती आ रही होगी कि लड़कियां फूलों सी नाज़ुक होती हैं, ये भी सुना होगा कि तुम्हें फूल सा नाज़ुक होना चाहिए. तुमसे कहा गया होगा कि अँधेरा होने से पहले घर लौट आओ, कपड़े ढंग से पहनो, धीमी आवाज़ में बात करो. कोई कुछ कहे तो सुन लो, सुन कर अनसुना कर दो. नज़र नीची रखो, पर मत निकालो, सवाल मत करो, खामोश रहो, सब्र करो, धैर्य रखो, और पता नहीं क्या-क्या. पर मैं तुमसे कहना चाहता हूँ कि तुम फूलों सी नाज़ुक नहीं हो और न तुम्हें फूल जैसा बनना चाहिए.

तुम एक ऐसे दौर में जी रही हो कि जब तुम्हें फूल नहीं, काँटों जैसा बनना होगा. क्यूंकि, फूलों को आसानी से कुचला जा सकता है पर काँटों को नहीं. फूल सिर्फ़ बहार का मौसम देखते हैं पर काँटे, वो हर मौसम में सीना ताने खड़े रहते हैं. जाड़ा, गर्मी, बरसात, पतझड़, या बहार– काँटे हर मौसम में ज़िंदा रहते हैं, साँस लेते हैं, जीते हैं, जीतते हैं, डर कर नहीं बल्कि डराकर. लड़कियों, तुम्हें उन्हीं काँटों की तरह डरकर नहीं, बल्कि डटकर जीना होगा.तुम्हें काँटों की तरह इसलिए भी बनना होगा, ताकि कोई तुम्हारी तरफ़ हाथ बढ़ाने से पहले दस बार, हज़ार बार सोचे. तुमसे डरे, तुम्हारी ताक़त से डरे. तुम्हें काँटों जैसा इसलिए भी बनना होगा ताकि तुम्हें कुचलने से पहले, तुम पर पाँव धरने से पहले, हर आदमी सोचे, घबराए.तुम फूलों की तरह होगी तो कोई भी तुम्हें अपनी मुट्ठी में रखकर मसल देगा. पर जब तुम काँटों की तरह होगी तो कोई तुम्हें मसलना तो दूर, तुम्हें मुट्ठी में लेने की बात सोचकर ही घबराएगा. तुन्हें काँटों की तरह बनना है ताकि तुम किसी के हाथ ना आ सको, ताकि तुम आज़ाद रहो, जैसे काँटे रहते हैं.तुम काँटों जैसी बनोगी तो तुम्हारी प्रतिभा, तुम्हारीक़ाबलियत, तुम्हारे हुनर को तुम्हारे सौन्दर्य या खूबसूरती से पहले रखा जाएगा. तुम्हारी सफलता का श्रेय तुमको मिलेगा, ना कि तुम्हारी खूबसूरती को. तुम काँटों की तरह रहोगी तो समाज की ये धारणा टूट जाएगी कि लड़कियां, सौंदर्य से सफलता प्राप्त करती हैं.तुम्हारा काँटों की तरह होना इसलिए भी ज़रूरी है ताकि जब यह समाज तुम्हारे ऊपर चादर डाले–संस्कारों की, तहज़ीब की, नियमों की, रूढ़िवाद की– तुम्हें उससे लपेटने की कोशिश करे, तो तुम उस चादर को चीर कर बाहर आ जाओ. तम काँटों की तरह होगी तो कोई तुम्हें ढक नहीं पाएगा, तुम्हारा मुँह नहीं बंद कर पाएगा, तुम अपनी मर्जी की मालिक होगी, जैसे काँटे होते हैं.तुम्हें काँटों की तरह इसलिए भी बनना है ताकि तुम्हें सजावट का सामान ना समझा जाए, ताकि तुम घरों में ना कैद कर दी जाओ, ताकि तुम आज़ाद रहो. तुम्हारा अपना एक वजूद हो, एक पहचान हो.इसलिए लड़कियों, फूलों सा नाज़ुक नहीं, काँटों सा मज़बूत बनो. सहना नहीं, लड़ना सीखो. ख़ामोश होना नहीं, बोलना सीखो. झुकना नहीं, उड़ना सीखो. सवाल करो, जवाब माँगों, अपना हक़ माँगों, उसके लिए लड़ो.तुम्हारी कोख में जो आदमी जन्म लेता है, वो तुमसे बड़ा नहीं हो सकता, वो तुम्हें दबा नहीं सकता. तुम दोनों बराबर हो और इस बात को तुम्हें खुद को बारबार याद दिलाने की ज़रूरत है. जिस दिन तुम अपनी ताक़त जान जाओगी, तुम्हें किसी से डर नहीं लगेगा. वैसे भी काँटों से सब डरते हैं, काँटे किसी से नहीं डरते.
अकेला मत समझना आपकी लड़ाई लड़ता रहूंगा।
लेखक– स्वतन्त्र यादव
8601030425
                           

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