सपनों का स्कैम = एसएससी?

Posted by ABHINAV PATHAK
March 6, 2018

NOTE: This post has been self-published by the author. Anyone can write on Youth Ki Awaaz.

देश का युवा दिल्ली की सड़कों पर रातें गुजार रहा है। इन लोगों ने 17 से 22 फरवरी के बीच कर्मचारी चयन आयोग (एसएससी) की परीक्षा दी थी। इस परीक्षा के बाद इन्हें मंत्रालयों और सरकारी दफ्तरों में ‘बी’ और ‘सी’ ग्रेड की नौकरी मिलनी थी।हुआ ऐसा कि 21 फरवरी को 10 बजे परीक्षा शुरू हुई और कुछ मिनटों बाद उसे बंद करा दिया गया। कारण बताया गया तकनीकी खराबी। यह परीक्षा उसी दिन 12 बजे कराई गई।
होते जाते पता चला कि कथित रूप से परीक्षा में घपलेबाजी हो रही है। परीक्षा सेंटर में बैठे कुछ लोगों की सहायता दूर बैठे उनके आका कर रहे हैं। इसके प्रमाण में आंदोलनरत छात्र कई स्क्रीनशॉट को प्रदर्शन के दौरान दिखा रहे थे।
बस लड़के परीक्षा की जाँच सीबीआई से कराने की माँग करने लगे। वे देश के कोने कोने से निकलकर दिल्ली एसएससी केंद्र के बाहर प्रदर्शन करने लगे।

उनकी होली दिल्ली के सड़कों पर बीत गई। 3-4 दिन सड़कों पर बिताने के बाद नेताओं को इसकी सुध लगी और वे जमा होने लगे।
फिलहाल गृहमंत्री राजनाथ सिंह ने सीबीआई जाँच कराने का भरोसा दिलाया है। छात्र अब अपने घर जा सकेेंगे। उम्मीद है सीबीआई जांच में एक दो साल लगा ही देगी। तब तक ये लोग अपने शहरों के कचहरी और साइबर कैफे में फॉर्म की तलाश में भटकेंगे।

दरअसल देश का युवा वर्ग एसएससी, रेलवे और बैंकिंग की नौकरियों को बड़े उम्मीद के साथ देखता है। पिछले कुछ सालों से लगातार कम हो रही नौकरियों में भी इस तरह की सेंधमारी ने उनका हौसला तोड़ दिया है। 

 दो तीन सालों से देश की हर परीक्षाओं को ऑनलाइन कराने की तैयारी चल रही है। माना जाता है कि ऑनलाइन परीक्षा में किसी तरह की धांधली नहीं हो सकती।
एसएससी पर लगा आरोप अगर सही है तो देश में नौकरी देने वाली व्यवस्था से लोगों का विश्वास उठ जाएगा। फिर चाहे बैंकिंग हो, रेलवे हो या कोई भी चयन आयोग हो, सबकी परीक्षाओं की जाँच होनी चाहिए।

गांवों में लोग आज भी किसी प्राइवेट कम्पनी के मैनेजर से बेहतर सरकारी चपरासी को मानते हैं।
अगर सरकारी चपरासी से लेकर बड़ा बाबू बनाने वाली व्यवस्था इनके साथ छल कर रही है तो जल्द ही एसएससी को ‘सपना स्कैम कमीशन’ के नाम से जाना जाएगा।
  

Youth Ki Awaaz is an open platform where anybody can publish. This post does not necessarily represent the platform's views and opinions.