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सुधरेगी कब परिवहन व्यवस्था

Posted by वली सैफी
March 11, 2018

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सार्वजनिक परिवहन व्यवस्था में दोष के कारण राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली के साउथ दिल्ली में 16दिसम्बर 2012 की काली रात की दांस्ता को कोई भी कभी भी नहीं भूल सकता, द्यटना के एक दम बाद दिल्ली की मुख्यमंत्री श्रीमती शीला दीक्षित व परिवहन विभाग से जुडे अधिकारियों के द्वारा सर्वजनिक परिवहन व्यवस्था को दुरूस्त करने की बडे जोर शोर से बात करी गई थी।

रात में डीटीस्ी बसें चलाने की बात सामने आई। आटो चालकों को सुधारने का संकल्प लिया गया। मगर ये सब मात्र एक फोटो शाप दिखावा, ताकि मीडिया में सुर्खियों में बनें रहे।

मीडिया में छाए रहना ओर काम न करना, द्यटना के बाद संकल्प लेना, पीडित को मुआवजा देना ही मात्र एक उददेश्य ही हमारी सरकार के पास है।

ये सब ठीक उसी तरह हुआ जैसे हम शायराना अन्दाज में कहते आंए हैं चार दिनों की चांदनी फिर वही काली रात, जी हां कुछ ऐसा ही हाल दिल्ली की परिवहन व्यवस्था का है 16 दिसम्बर 2012 की ़द्यटना को काफी समय गुजर गया मगर अब भी अधिकांश रूटो पर न तो बसें ही नजर आती हैं ओर न हीं आटो चालको के व्यवाहार में कोई बदलाव आया है।

आटो चालक किसी भी तरिके से चलने को तैयार नहीं होते। उन्हें अगर मुह मांगी रकम मिल भी जाए शायद चलने का तैयार हो जाए। मगर ऐसा कब तक चलेगा। रूट नम्बर 335, 374, 501, 503, 522ए, 534, 546, 548 के ईलावा भी कई ओर भी ऐसे रूट हैं जिन पर डीटीसी की बसें द्यंटो द्यंटो नजर नहीं आती। या अगर आतीं भी हैं तो आधे अधुरे रूट के साथ रोड पर उतरती हैं जैसे 534 अनन्द विहार से महरोली मगर रात में मिलियम डिपो या सराय काले खां तक, बस चालको को डिपो मे जाने की इतनी जल्दी होती है कि ये पुरे रूट पर बसें चलाना मुनासिब ही नहीं समझते।

यात्री बसों के इन्तजार में थक जाते है। ऐसे में लोग अपनी मन्जिल पर पहुचने के लिए मजबूरी में प्राईवेट केब में या अन्य गाडियो में सफर करने का मजबूर हैं। क्या डीसीटी बसें बढाई जांएगी, क्या आटो चालकों के व्यवहार में बदलाव आएगा इस का जवाब सरकारी अफसर हां में देते नहीं थकते मगर ऐसा कब होगा इसका जवाब किसी के पास नहीं। 16 दिसम्बर 2012 की दर्दनाक द्यटना के बाद जिस तरह की सार्वजनिक परिवहन व्यवस्था व आटो चालकों का व्यवाहार है उस से तो ऐसा प्रतीत होता है कि प्रषासन शायद किसी दूसरी बडी द्यटना के इन्तजार में बैठी है।

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