वीडियो: ये 8 भारतीय महिलाएं आपके सारे पूर्वाग्रह तोड़ देंगी

1-नताशा नोएल-

परेशानियों में अपना बचपन बिताने वाली नताशा को अपनी शान्ति योग में मिली। 7 वर्ष की आयु में यौन दुर्व्यवहार, घुटने में गंभीर चोट लगने के बाद भी आज नताशा एक योगिनी, नर्तक और एक जीवनशैली ब्लॉगर हैं।

औरत के साथ हुआ कोई भी दुर्व्यवहार उसे आगे बढ़ने से रोक नहीं सकता। नताशा नोएल ने कभी हार नहीं मानी और एक सफल जीवन व्यतीत कर रही हैं।

2-अरुणिमा सिन्हा

एक दुर्घटना में अपना पैर खो देने के बाद भी, 24 वर्षीय अरुणिमा सिन्हा ने कभी हार नहीं मानी। आज उनका नाम माउंट एवरेस्ट पर चढ़ाई करने वाली पहली भारतीय पर्सन विद डिसेबिलिटी के तौर पर जाना जाता है। अपनी ज़िद पर अड़े रहकर अरुणिमा ने साफ बता दिया कि औरतों कि शक्ति का कोई भी मापदंड नहीं है।

3-आफरीन रहमान

महिला अधिकार कार्यकर्ता आफरीन रहमान इंस्टेंट ट्रिपल तलाक के खिलाफ आवाज़ उठाने वाली पांच महिला याचिकाकर्ताओं में से एक हैं। इनकी लड़ाई और संघर्ष ने भारत के ऐतिहासिक सर्वोच्च न्यायालय को ट्रिपल तालाक के खिलाफ फैसला देने के लिए मजबूर किया। आफरीन बहुत से वाद-विवाद का हिस्सा रही हैं और अपनी मेहनत के माध्यम से लोक सभा में ट्रिपल तलाक़ के खिलाफ बिल भी पास करा चुकी हैं। इन्होंने ट्रिपल तलाक के साथ बहुविवाह और हलाला के खिलाफ भी याचिका दायर की है। अपनी लड़ाई के बाद आफरीन देश की बाकी औरतों के लिए भी काम कर रही हैं। इनका सफर बताता है कि औरत अकेले लड़ने में पूर्णतः सक्षम है।

4-ए.सी.पी. मंजिता वंज़ारा

ए.सी.पी. वंज़ारा एक सुपरकॉप्स के परिवार से आती हैं, और स्वयं भी एक पुलिस अधिकारी हैं। फैशन डिज़ाइन का अध्ययन करने के बाद वे एक पुलिस अधिकारी बनी। पुलिस अधिकारी बनकर उनका उद्देश्य इतना था कि वे लोगों के दिमाग में पुलिस के बारे में बनाई गई गलत धारणाओं को बदल पाएं।

5-शाइना एन.सी.

बीजेपी की नेता शायना NC को ‘क्वीन ऑफ ड्रेप्स’ के नाम से भी जाना जाता है। गिनीज़ वर्ल्ड रिकॉर्ड में अपना नाम अंकित कर चुकीं शायना एक पॉलिटिशियन होने के साथ ही एक बेहतरीन फैशन डिज़ाइनर और एक सामाजिक कार्यकर्ता भी हैं। औरत केवल घर का काम करने के लिए बनी है, इस सोच को लगाम देनी वाली शाइना आज एक सफल नेता हैं।

6-गीता

अपने वैवाहिक जीवन में लाखों परेशानियों से जूझते हुए भी गीता ने हार नहीं मानी और सखा कंसल्टिंग विंग्स के साथ जुड़ने का फैसला लिया| एक ऐसी कैब सर्विस जो की सिर्फ महिलाओं के लिए बनी है और जिसे सिर्फ महिलाएं ही चलाती हैं।  आज गीता जैसी बहुत सी महिलाएं अपनी ही नहीं अपने परिवार की ज़िन्दगी के पहिए को खुद ही चला रही हैं।

7-मीणा

मीणा सोनी नारी शक्ति की अदभुत मिसाल हैं। अपने पति द्वारा किए गए एसिड हमले से जूझ कर भी आज वह दुबारा से अपनी ज़िंदगी को एक नई दिशा दे रही हैं।  ज़िंदगी के हर मोड़ पर कठिनाइयां मिलेंगी हमें बस हिम्मत से उनसे लड़ना है और आगे बढ़ना है। आज मीणा एक आत्मनिर्भर महिला हैं और अपना जीवन खुद चला रही हैं।

8-अंजुम मोदगिल

देश के लिए अब तक 20 इंटरनेशनल मेडल्स जीतने वाली अंजुम मोदगिल ने बताया कि कैसे उन्होंने 15 साल की उम्र में राइफल उठाई और अपने 9 साल के शूटिंग के सफर में सीखा कि किसी भी लक्ष्य को भेदने के लिए रास्ते में आने वाली नाकामयाबी से बिना डरे, उसपर लगे रहना चाहिए।  एक दिन आपका निशाना नहीं चूकेगा। कैसे अपनी मानसिक, शारीरिक और भावनाओं पर नियंत्रण पाकर लक्ष्य भेदा जा सकता है इसकी मिसाल हैं यह महिला निशानेबाज़।

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