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SSC घोटाला: प्रदर्शन को हाइजैक कर छात्रों का इस्तेमाल कर रहे हैं कोचिंग सेंटर्स

Posted by Aman Brar
March 8, 2018

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बीजेपी की रैली जैसे माहौल के बीच बोलने के लिए सिर्फ कुछ खास लोगों को ही माइक थमाया जाता है जिनमें कोचिंग सेंटर्स के मालिक, कुछ टीचर और उन्हीं सेंटर्स से आने वाले कुछ खास छात्र हैं।

ssc एग्जाम में हुई धांधली के विरोध में कर्मचारी चयन आयोग (SSC) की बिल्डिंग के बिलकुल सामने सीजीओ कॉम्प्लेक्स पर छात्र पिछले 7 दिनों से प्रदर्शन कर रहे हैं। पहले तो मेनस्ट्रीम खास कर टीवी मिडिया ने इस पूरे आंदोलन को नज़रअंदाज़ किया। हैरानी हुई कि इतने बड़े स्कैम को इस तरह से कैसे नज़रंदाज़ किया जा सकता है वो भी तब जब सवाल एक बहुत बड़ी संस्था के खिलाफ उठ रहे हो और सवाल उठाने वालों युवाओं की संख्या लाखों में हो हालंकि अभी प्रदर्शन में राजनेताओं के जुट जाने के बाद और आरोप-प्रत्यारोप की राजनीति की शुरुआत के साथ ही टीवी पर आप लगातार कवरेज की खबरें देख रहे हैं।

टीवी में जो दिखाया जा रहा था उसमें धरना स्थल पर किसी नेता का आना, छात्रों का धरने पर टिके रहना शामिल है। पहले लगा छात्र सिर्फ CBI जांच की मांग कर रहे है और सरकार की तरफ से यह मांग स्वीकार कर लेने पर धरना ख़त्म कर दिया जाएगा। लेकिन ग्राउंड पर जाने और छात्रों से बात करने पर कहानी कुछ और ही थी।

आपसी जंग का मैदान

6 मार्च की शाम को धरना स्थल वाली जगह पर माहौल गर्म था। कोचिंग सेंटर्स के खिलाफ बोलने या केंद्र सरकार पर सवाल उठाने वाले उन छात्रों के साथ हिंसा की गई जो पिछले 6-7 दिन से वहां धरने पर मौजूद थे और SSC का एग्ज़ाम दे चुके थे। वहीं जिन लोगों ने कभी SSC का एग्ज़ाम नहीं दिया था उन्हें बोलने का मौका भी मिला और उन नारों को लगाने का अवसर भी मिला जो आम तौर पर BJP की किसी रैली में लगाये जाते हैं।

मेरी कोचिंग सेंटर वाली मैडम से पूछ लीजिये

प्रदर्शन कर रहे छात्रों में लड़कियों की संख्या काफी कम है हालांकि दिन के समय 15-20 लड़कियां वहां ज़रूर मौजूद थी, जिनमें से एक से जब पूछ कि आप की क्या मांग है तो जो जवाब मिला वो हैरानीजनक था, लड़की ने सीधे शब्दों में कह दिया कि “आप मेरे कोचिंग सेंटर की मैडम से बात कर लीजिये।” यहां पर साफ अंदाज़ा लगाया जा सकता था कि भीड़ दिखाने के लिए उस लड़की को किसी ने आने के लिए फोर्स किया था शायद कोचिंग वाली मैडम ने…

कोचिंग सेंटर्स का गंदा खेल

बोलने के लिए सिर्फ कुछ खास लोगों को ही माइक थमाया जाता है जिनमें कोचिंग सेंटर्स के मालिक, कुछ टीचर और उन्हीं सेंटर्स से आने वाले कुछ खास छात्र हैं। पैरामाउंट कोचिंग सेंटर से आये एक सदस्य रामदेव भाटी को माइक मिलने में किसी परेशानी का सामना नहीं करना पड़ा हालांकि इससे पहले माइक के लिए जमकर हाथोंपाई हो रही थी। बाद में पता चला कि वो पैरामाउंट कोचिंग सेंटर के एक अहम अधिकारी हैं।

माइक मिलने पर पहले तो उन्होंने अपने कोचिंग सेंटर के एक छात्र का प्रचार किया जो खास छात्रों की टीम का हिस्सा था, (यहां पर ‘खास’ का मतलब जानना ज़रूरी है, असल में धरने पर बैठे छात्रों को सिर्फ 10-12 छात्र ही लीड कर रहे हैं। बाकी उन्हीं के कुछ वॉलंटियर बाकी छात्रों की भीड़ को माइक वाली जगह से दूर रखने के लिए लगे हुए हैं।) बाद में उसी अधिकारी ने माइक पर ही 1 लाख रूपये देने का ऐलान कर दिया और फिर 2-2 हज़ार के नोट उसी छात्र को बाकी छात्रों की भीड़ के आगे पकड़ा दिए। तालियों की गूंज सुनाई देने लगी।

वर्चस्व की लड़ाई में सब “गोलमाल”

पैरामाउंट की तरफ से 1 लाख रूपये की घोषणा के सही 1 घंटे पहले ही केडी कोचिंग सेंटर की एमडी नीतू सिंह को भी माइक दिया गया था, उनके साथ भी कुछ छात्र खड़े थे । बाद में ये साफ हुआ कि जो छात्र कोर टीम में है उनमें सिर्फ कुछ कोचिंग सेंटर्स के ही छात्र हैं जो सब कुछ हैंडल कर रहे हैं। या फिर ये कहें कि अपने-अपने कोचिंग सेंटर के वर्चस्व की लड़ाई लड़ रहे हैं। नीतू सिंह ने माइक में बोला कि वो प्रदर्शन करने वाले छात्रों के साथ ही रहेंगी और हर तरह की सहायता देंगी। इससे भी पहले कैरियर पॉवर नाम के एक कोचिंग सेंटर की टीचर ने आकर भी पहले तो  इमोशनल शब्दों से छात्रों का दिल जीता और फिर हर तरह का वित्तीय और अन्य सहयोग देने की घोषणा कर दी।

पैरामाउंट और केडी कोचिंग सेंटर की कहानी दिलचस्प

अब आप पूरा गेम समझिए पैरामाउंट और केडी कोचिंग सेंटर के मालिकों में बड़ा अहम रिश्ता है पैरामाउंट के मालिक राजीव सौमित्र और केडी कोचिंग सेंटर की मालिक नीतू सिंह पति-पत्नी हैं। पहले भी दोनों टीवी चैनल्स की सुर्खियों में रह चुके हैं। दोनों पैरामाउंट कोचिंग सेंटर में 50 -50 फीसदी हिस्से के मालिक थे लेकिन निजी रिश्तों में इतनी खटास आई कि पैरामाउंट कोचिंग सेंटर के मुनिरका स्थित ऑफिस में मालिक नीतू सिंह की एक लेडी बाउंसर की पिटाई कर दी। वही बाउंसर जिसे राजीव सौमित्र ने कुछ दिन पहले ही अप्वाइंट किया था।

पैरामाउंट पर राजीव सौमित्र ने कब्ज़ा किया तो नीतू सिंह ने केडी कोचिंग सेंटर से नई शुरुआत की, जिसने पैरामाउंट को कुछ ही समय बाद अच्छी टक्कर दी। आज भी दोनों छात्र आंदोलन में वर्चस्व की लड़ाई लड़ रहे हैं। नीतू सिंह कहती हैं कि उन्होंने “पैरामाउंट का एम्पायर” खड़ा किया था और उन्हें (मालिक) ही धक्के मार कर उनके “एम्पायर” से निकाल दिया गया।

बाकी छात्रों का काम सिर्फ डटे रहना

आम छात्रों का तात्पर्य आप उन छात्रों से भी ले सकते हैं जो असल में इस स्कैम से पीड़ित हैं। कोई यूपी-बिहार से है तो कोई साउथ से भी है। लेकिन इन छात्रों को सिर्फ 1-1 घंटे बाद केले, बिस्कुट, जूस बांट कर बस अपनी मांगों को लेकर डटे रहने का फरमान सुना दिया जाता है। इसके आलावा उनका काम हर पांच मिनट बाद लगने वाले “भारत माता की जय”, “वंदे-मातरम” के नारों का जवाब देना है। अगर उनमें से कोई माइक पर कुछ बोलने की कोशिश भी करता है तो माइक की आवाज़ खराब हो जाती है या फिर हाथापाई की शुरुआत हो जाती है जिसमें कोई लड़की भी कोर टीम के छात्रों के भाषा के आलावा कुछ बोलती है तो उसे भी नहीं बख्शा जाता, बस सीधा माइक छीन लिया जाता है।

“मेरे सपनों का घोटाला”

इस सब गोलमाल के बीच पीड़ित छात्र पिस रहे हैं वो अपने हक के लिए डटे हुए हैं जो शायद इस गंदे खेल को समझते हुए भी नज़रअंदाज़ कर रहे हैं, वो बड़े जोश से सभी नारों का जवाब देते हैं, भले वो मनोज तिवारी के आने के बाद “मोदी-मोदी” के नारे ही क्यों ना हो, खास बात ये है कि उनके लिए ये सिर्फ SSC घोटाला नहीं बल्कि उनके सपनो का घोटाला है।

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