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जहां हर दिन 33 किसान आत्महत्या करें, वहां की सरकार देशभक्त नहीं हो सकती

“जिस थाली में खाते हो, उसी थाली में छेद कर रहे हो, साले देशद्रोही!” दिल्ली पुलिस के उस हवलदार ने मुझे बहुत नफरत से डांटा। यह बात फरवरी 2016 की है, मेरे पुलिस इंटेरोगेशन की। मैं डरा हुआ था तो मैंने कोई जवाब नहीं दिया। लेकिन जब यह बात उसने तीन-चार बार बोली, तो मैंने उसको बहुत विनम्रता से जवाब देने का सोचा।

“हवलदार साहब, आप थाली की बात कर रहे है तो ज़रा यह बताइये कि थाली में खाना आता कहां से है, खेत में बीज कौन बोता है, फसल कौन उगाता है, फसल कौन काटता है।” वह बोला किसान! “देश में सूखा पड़ा हुआ है, सरकार अडानी अम्बानी के लिए किसानों की ज़मीन उनसे छीन रही है, उनकी फसल का न्यूनतम समर्थन मूल्य नहीं दे रही है, उनका कर्ज़ माफ़ नहीं कर रही है, किसान आत्महत्या कर रहे हैं...तो फिर हवलदार साहब आप मुझे बताये कौन है जो जिस थाली में खा रहा है उसी में छेद कर रहा है, हम या फिर इस देश के सत्ताधारी?” उसके पास जवाब नहीं था, लेकिन इसके बाद मेरे प्रति उसका गुस्सा काफी कम हो गया। हमारे बीच में दोस्ती भी हो गयी।

आज कृषि में जो संकट है, उसका इस बात से ही अंदाज़ा लगाया जा सकता है कि मोदी सरकार द्वारा मार्च 2017 में सुप्रीम कोर्ट में दर्ज एक एफिडेविट के अनुसार हर साल हमारे देश में 12000 किसान आत्महत्या करते हैं। इसका मतलब, हर महीने 1000, हर दिन 33 और हर घंटे 1 से 2 किसान अपनी जान ले लेते हैं।

महाराष्ट्र में हर साल 2000 से अधिक किसान आत्महत्या करते हैं। महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेन्द्र फडणवीस ने पिछले जून में किसानों की कर्ज़ माफी की योजना का एलान किया। यह कर्ज़ माफी कितना बड़ा जुमला था इस बात से पता चल सकता है कि इस योजना के एलान के अगले पांच महीने में हज़ार से अधिक किसानों ने आत्महत्या कर ली थी। देश के सबसे बड़े जुमलेबाज नरेंद्र मोदी, जो 2014 में बोल रहे थे ‘बहुत हुआ किसानों पर अत्याचार, अबकी बार मोदी सरकार’, अब बोल रहे हैं कि 2022 तक किसानों की आमदनी दुगनी कर देंगे। एक गन्दा मज़ाक लगता है। आमदनी की बात करें तो, पिछले साल जब एक तरफ कर्ज़ में डूबे हज़ारों किसानों ने अपनी जान ले ली, वहीं दूसरी तरफ अडानी और अम्बानी के धन में 125% बढ़ोतरी हुई। और अपने भतीजे जय शाह की आमदनी के बारे में कुछ कभी बोल लिया कीजिये, मोदी जी? यह है मोदी के अच्छे दिन की क्रूर सच्चाई!

आज जब इस सब के खिलाफ हज़ारों की तादाद में महाराष्ट्र के किसान सड़कों पर निकल आए हैं, तो बस मैं इतना पूछना चाहता हूं कि देश-भक्ति का सर्टिफिकेट बांटने वाली मोदी सरकार और उसके चापलूसों के मुंह में ताला क्यों लग गया है? जो सरकार हज़ारों करोड़ अडानी अम्बानी का टैक्स माफ़ कर देती है; माल्या, ललित मोदी, नीरव मोदी और मेहुल चौकसी जैसे लुटेरों को भागने देती है, वह आज कर्ज़ से पीड़ित किसानों के सामने चुप क्यों है?

हर साल देश के कई सारे इलाकों में सूखा पड़ता है, किसानों को सिंचाई के लिए पानी चाहिए, लेकिन यह लोग तो राम मंदिर, लव जिहाद, घर वापसी, गौ माता के नाम पर हिन्दू-मुस्लिम दंगा कराके खून से सिंचाई करना चाहते हैं।

क्यूंकि उसके बाद जो फसल उगती है, उससे किसे का पेट तो नहीं भरता, किसी की थाली में खाना तो नहीं आता, पर उस ध्रुवीकरण के आधार पर वोट अच्छा मिलता है! संघ और भाजपा के लोग देश के सबसे बड़े गद्दार हैं, जिस थाली में खा रहे हैं, उसी में छेद कर रहे हैं!

इस उम्मीद के साथ कि अगली बार, इतनी बड़ी मात्रा में सिर्फ अपने आर्थिक मांगों के लिए ही नहीं, बल्कि इस सामंती-पूंजीवादी शासन को गिराने के लिए, इस देश के किसान क्रन्तिकारी नेतृत्व में फिर गोलबंद होंगे। यही भगत सिंह का सपना था, और यही होगा सही मायने में #NewIndia

महाराष्ट्र के किसानों को लाल सलाम!


(उमर खालिद के फेसबुक वॉल से साभार।)

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