Zindagi by Kishor Dwivedi – Phial of Wishes | Poetry Series by Paper Weight Entertainment

Posted by Harsh Vardhan Singh
March 5, 2018

Pilot Poem Video #Zindagi of #PhialofWishes, contributed by Kishor Dwivedi.

https://www.youtube.com/watch?v=575EY8tZc0A&feature=youtu.be

ज़िंदगी

जाने कहीं खो सी गयी है ज़िंदगी
अपने में ही क़ैद हो सी गयी है ज़िंदगी
सुबह से शाम भीड़ में भागती भटकती
रात थकी टूटी सो सी गयी है ज़िंदगी

नदी के दो किनारों भर का है फ़ासला
इस पर मैं हूँ, उस पार है ज़िंदगी!
पार करके उससे मिल-लूँ, ये हो जो हौसला
मुश्किल बनी तेज़ मझधार है ज़िंदगी

रास्ते में मिलते अंजान लोगों की तरह
मुझसे आँखें चुराती है ज़िंदगी
हर इक मोड़ पे धीमी हो जाती है ये
कोई पुरानी कहानी सुनाती है ज़िंदगी

तेज़ हवा, धूप, बारिश है ये ज़िंदगी
पेड़ों की आड़ को अब निहारे है ज़िंदगी
थोड़ा रुकूँ अगर तो बुरा मान जाती है ये
‘चलते रहो’ – बेरुख़ी से करती इशारे ये ज़िंदगी

कुछ ख़ुद बदला मैं
कुछ बदले मुझको ज़िंदगी
बदली आदत, न बदले है फ़ितरत ये ज़िंदगी
किसी एक मंज़िल पे रुकेगी? ये मुमकिन नहीं
जैसा मैं आवारा, वैसी आवारा है ये ज़िंदगी

सर्दी की सुबह बातों में धुआँ-सा है ज़िंदगी
पानी है, रस्सी नहीं – गहरा कुआँ-सा है ज़िंदगी
कुहासे का चादर ओढ़े चली आती है रात अंधेरी
ऐसी रातों से रोज़ जीत जाना, जुआ-सा है ज़िंदगी

We at Paper Weight Entertainment have always tried to bring to you content which is fresh and heartfelt, this time we are bringing to everyone an opportunity to share their thoughts and poems with us and we shall give voice to some of the best of them… “Zindagi” our pilot poem has been contributed by Mr Kishor Dwivedi.

We at Paper Weight Entertainment have always tried to bring to you content which is fresh and heartfelt, this time we are bringing to everyone an opportunity to share their thoughts and poems with us and we shall give voice to some of the best of them…
“Zindagi” our pilot poem has been contributed by Mr Kishor Dwivedi.