आसिफ़ा हम शर्मिंदा हैं……

Posted by Abhay Lata Pratap Singh
April 13, 2018

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आसिफा की फ़ोटो देखी आज।
वह बहुत ही प्यारी थी।
शायद मैं हमेशा यही चाहूँगा की मेरी बेटी भी उतनी ही प्यारी हो।

आसिफा के साथ जो कुछ भी हुआ वह सुन कर मैं अंदर से हिल गया हूँ और शायद इंसानियत में विश्वास रखने वाले हर किसी के साथ ऐसा ही हुआ होगा।मैंने इस मामले के बारे में जनवरी में ही सुना था लेकिन आज चार्जशीट पढ़ कर खुद को इस समाज का हिस्सा कहते हुए शर्म आ रही है!! अब शर्म आ रही है यह कहते हुए की जम्मू कश्मीर में मेरे धर्म के नाम पर एक प्यारी बेटी के गुनहगारों को बचाने की कोशिश हो रही है।

मेरा मानना है अब उस मन्दिर को भी ध्वस्त कर देना चाहिए।
इस बार कश्मीरी पंडितों को खदेड़ने के लिए नहीं बल्कि इस जघन्य और इंसानियत के खिलाफ हुए वहशी अपराध के लिए।

इतनी प्यारी बच्ची थी वो और उसके साथ ऐसी हैवानियत हुई!!
वह भी एक मंदिर के अंदर,मुझे यह सोचने पर मजबूर करती है कि क्या हम सामाजिक विनाश की तरफ बढ़ रहे हैं? क्या धर्म और नफ़रत के नाम पर हम कुछ भी कर सकते हैं? क्या हम भूल गए हैं कि मंदिर,मस्जिद नफ़रत के नहीं शांति के ठिकाने हैं।
क्या हम भूल चुके हैं कि हम इंसान हैं??

क्या उस बच्ची का बलात्कार करने वालों के घरों के आंगन में खेलती छोटी बच्चियां नहीं होंगी?? क्या उन्हें उसकी चीख पर तरस नही आया होगा??
वह किस नशे,नफ़रत में या फिर प्रतिशोध की आग में थे?
मुझे तरस आ रहा है ऐसे लोगों के घर वालों पर को आज आसिफा के गुनहगारों का धर्म के नाम पर समर्थन कर रहे हैं। मुझे तरस है उनकी बहन,बेटी,माँ और बीवियों पर ।

मैं नहीं ख़ुश हूँ जम्मू कश्मीर और उत्तर प्रदेश की भाजपा सरकारों से। मुझे नफरत है इस देश के विपक्ष से जो समाज को बांटने में सत्ता के साथ अहम किरदार निभा रहा है।मुझें नफ़रत है इस देश की न्याय व्यवस्था की कर्यप्रणाली से और उससे भी ज़्यादा यहां के कानूनों से जो ऐसे वहशियों में डर पैदा कर पाने में फेल हो चुके हैं। न्यायालय और सरकारें उस विश्व प्रसिद्ध कथन को भूल चुकी हैं जो कहता है कि Justice Delayed is Justice Denied.

हमारे देश मे कानून दोषियों को सजा देने के लिए नहीं, अब सिर्फ़ उन्हें बचाने के लिए इस्तेमाल में आते हैं। चाहे POCSO Act हो,Section 375 हो,Juvenile act हो या कोई भी।
यह सारे कानून बेकार हैं और बलात्कार जैसे अपराध के सामने बौने साबित होते हैं।

मैं अब देश मे बढ़ती नफ़रत को पचा नहीं पा रहा हूँ ।
आज मैं नहीं ख़ुश हूँ खुद से क्योंकि इस नफ़रत में शायद मेरा भी हाथ है।

अंत मे बस इतना कहना चाहूंगा कि आसिफा का मामला भी हर मामले की तरह सोशल मीडिया पर तैर कर कुछ समय बाद डूब जाएगा।

सच्चाई यही है कि न निर्भया को आज तक न्याय मिला और शायद हम आसिफा के साथ भी वैसा ही कुछ देखें। समाज को बदलना हमारे जिम्मे है,नफरत को और उसे फैलाने वालों को खत्म करना भी हमारा ही कार्य है।
चाहे नफरत लाल ,हरी ,नीली या केसरिया हो ,हमें इसे खत्म करना होगा।

आज आसिफा है कल को कोई हमारा भी हो सकता है।
या हम खुद? मुझे डर है कि कल ऐसी ही किसी नफरत के भेंट मैं न चढ़ जाऊं या कोई मेरा अपना ।

आसिफा में मेरी बेटी है,आसिफा में हम सबकी बेटी है।

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