कठुआ कांड: सियासत हो रही है मासूम की कीमत पर।

Posted by Kunal Kumar Singh
April 15, 2018

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देश में कठुआ सहित सभी घटनायें जो हाल में घटित हुई है वह सभी शर्मनाक और दुर्भाग्यपूर्ण है , कोई भी हवसी ऐसा घृणित अपराध किसी की जाति,धर्म, उम्र देखकर नहीं करता है उसे तो बस अपना हवस दिखाई देता है तभी तो हमारे समाज में नवजात से लेकर सुपर सीनियर वृद्धा तक के साथ बलात्कार जैसे जघन्य अपराध को अंजाम दे रहे है । NCRB के अनुसार भारत में 95% यौन शौषण के मामलों में आरोपी पीड़िता के अपने परिचित ही होता है। अतः सिर्फ़ सख़्त कानून बनाने से अपराध नहीं रुकने वाला जबतक की उस कानून का प्रभावी क्रियान्वयन न हो। हमारी न्यायिक प्रणाली भी बहुत ढीलाढाला है जिस कारण अपराधियों को बचने में पर्याप्त समय मिल जाता है। कानून के साथ साथ ऐसे घटनाओं का सामाजिक बहिष्कार भी किया जाना चाहिए क्योंकि सोशल मीडिया पर ज्ञान देने वाले कुछ महानुभाव भी सड़क पर छेड़खानी करने से नहीं चूकता।
अब कठुआ , उन्नाव ,सासाराम सहित जितनी भी घटनाएं हुई है , सब पर राजनीति शुरू हो गया जो बहुत ही शर्मनाक है। मतलब हमनें अपराध का भी राजनीतिकारण कर दिया है और उसे जाति और धर्म का रंग देना शुरू कर दिया है। इसको लेकर कुछ सोशल मीडिया पर भी ख़ूब ज़हर उगला जा रहा है । किसी की आबरू और लाश पर राजनीति कितना उचित है आप ख़ुद विचार करें!
और यह भी जरूरी नहीं कि मीडिया ट्रायल का जो दिखाया जाए वही सही है क्योंकि गुड़गांव में रेयान इंटरनेशनल स्कूल का उदाहरण ले लीजिए जिसमें हत्यारा एक सनकी छात्र था लेकिन मीडिया ट्रायल ने स्कूल बस कंडक्टर को उस मासूम बच्चें के हत्या और अप्राकृतिक यौन शोषण का आरोपी बना दिया जिस कारण बेगुनाह कंडक्टर जेल की हवा खानी पड़ी फ़िर CBI जाँच में सच्चाई सामने आया लेकिन किसी भी बेशर्म मीडिया हाउस ने उस बेचारे से न कोई माफ़ी मांगी न कोई मुआवजा दिया। अतः जरूरी है कि हम अपने दिमाग़ से काम ले और किसी अफ़वाह का हिस्सा या शिकार न बनें। और ध्यान दीजिए कि अब कोई वैचारिक राजनीतिक पार्टी नहीं बचीं है, सब अवसरवादी है जिनको अपने हित से मतलब है अंतः जिन नेताओं या पार्टी के कारण आप अपना व्यक्तिगत रिश्ता ख़राब करने को उतारू है वह आपके सुख दुःख के कभी सहभागी नहीं बनेगें।
अपने दिमाग़ का इस्तेमाल करें और नेगेटिव चीजों पर ज़्यादा ध्यान मत दीजिये।
मुझे उम्मीद है कि निर्भया कांड की तरह की इन सभी मामलों का निष्पक्ष जांच होगा और आरोपियों की सख़्त सज़ा मिलेगी। महिला सुरक्षा के लिए हमेशा आवाज़ बुलंद करें अन्यथा कल मीडिया/सोशल मीडिया पर कोई और मशाला ख़बर आ जायेगा और पूरा भीड़तंत्र इस डाल से उस डाल पर कूद जाएगा। उसे आशिफ़ा के न्याय मिलने न मिलने से कोई वास्ता नहीं रहेगा। हम सब कोशिश करें कि आशिफ़ा को न्याय मिले ताकि कोई दूसरी आशिफ़ा शिकार बनने से बच जाए। अपने ज़हन मेंं हमेशा याद रखिएगा

“देश मेरा रंग्रेज़ ये बाबू
घाट-घाट यहाँ घटता जादू”

 

कुणाल कुमार सिंह

काशी हिन्दू विश्वविद्यालय, वाराणसी

 

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