कठोर प्रावधान के साथ समाज को आत्ममंथन की जरुरत

Posted by Sandeep Suman
April 14, 2018

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ठुआ की घटना ने पूरे देश को झकझोड़ कर रख दिया है, शायद इससे निम्न स्तरीय अपराध और कुछ नहीं हो सकता। दुष्कर्म की घटनाएं दिन प्रतिदिन बढ़ती चली जा रही है, ऐसा लगने लगा है मानिए यह अब समाज का हिस्सा हो। इस भयावह स्थिति में बच्चियां वहशियों का सबसे आसान शिकार बन रही है, बच्चियों के साथ बड़े पैमाने पर दुष्कर्म की घटनओं को देखते हुए अब यह अनिवार्य हो गया है कि ऐसे वीभत्स अपराध के दोषियों को कठोरतम सजा का प्रावधान हो। निर्भया कांड के बाद जो प्रावधान किए गए थे वो प्रयाप्त सिद्ध नहीं हो रहे। ना तो इस अपराध में कमी दिख रही है ना ही पीड़िता को न्याय मिलता दिख रहा है। वस्तुतः आप यह कह सकते है कि दिन पर दिन अपराध में इजाफा ही हुआ है।

बच्चियों से दुष्कर्म के मामले में अपराधियों को मौत की सजा संबंधी कानून हरियाणा, मध्यप्रदेश, और राजस्थान में बनाये जा चुके है। इन राज्यो को भी बढ़ते बच्चियों से दुष्कर्म के मामले को देख मजबूरन लेना पड़ा और यह जरुरी भी था। अब यह स्थिति पुरे देश में देखने को मिल रही है इसलिए समय का तकाजा है कि जल्द से जल्द समाज कल्याण मंत्रालय को अपने विचार में अमल करना चाहिए और पॉक्सो एक्ट में संसोधन कर बच्चियों से साथ दुष्कर्म के अपराधियो को कठोर से कठोर सजा का प्रावधान करनी चाहिए, साथ ही साथ इस बात का भी ध्यान रखनी चाहिए की ये सिर्फ खानापूर्ति न हो। कानून के साथ-साथ इसे न्याय प्रक्रिया और पुलिशिया जांच को भी दुरुस्त करनी चाहिए। अपराधी कोई भी हो उसपे त्वरित कार्यवाई होनी चाहिए राजनेताओ और ऊँचे ओहदे पर बैठे लोगो पर नरमी न बरती जाए जैसा उन्नाव केस में हुआ, बल्कि ऐसे लोगों पर त्वरित कार्रवाई कर समाज को एक सन्देश देना चाहिए की ऐसे घृणित अपराध का समाज में कोई जगह नहीं।
ऐसी घृणित घटनाएं सभ्य समाज के चेहरे धब्बा होती ही है, आम लोगों में डर और असहजता उत्पन्न भी करती है। हम जिस समाज में रहते है वहाँ शुरू से ही पितृसत्तात्मक सोच रही है, दुष्कर्म के मामलो में समाज लड़कियों और महिलाओं को ही दोषी ठहराते आया है। महिलाओं के कपड़े, उसके रहने के तरीके , लोगो से घुलने मिलने के तरीकों पर सवाल उठाकर हमेशा पीड़िता को ही अपराधी ठहरा दिया जाता है। देश के कई जानेमाने लोगों ने भी दुष्कर्म के लिए महिलाओं के कपड़ो को जिम्मेदार ठहरा कर समाज में गलत संदेश दिया है, मुलायम सिंह यादव जैसे वरिष्ठ नेता दुष्कर्म को लड़को से हुई गलती बतलाई है। निर्भया कांड के वक़्त इंडिया गेट पे पुलिस से लाठी चलवाने वाले लोग आज कैंडल मार्च करने निकलते है क्योंकि आज वो सत्ता में नहीं है तो इसका राजनीतिक फायदा उठाना चाहते है, जैसा इस वक़्त के विपक्ष ने किया था। कैंडल मार्च के दौरान स्वमं प्रियंका गांधी अपने ही कार्यकर्ता के धक्के-मुक्की का शिकार होती है यानि आप समाज सकते है कितने संवेदनशीलता के साथ लोग वहाँ पहुँचे थे। दुष्कर्म के सामाजिक अपराध है इसके लिए कठोर कानून तो बनना चाहिए, लेकिन सामाजिक उपाय भी तलाशने होंगे की आखिर क्यों ऐसी घटनाएं बढ़ रही है और हम सिर्फ कुछ गिने चुने केसों पर ही जागते है ?

समाज के लिए बेहतरी इसी में है कि दुष्कर्म जैसे गंभीर मसले का सामाजिक हल निकाला जाए, अगर इसका हल राजनीति के सहारे तलाशा जाएगा तो यू ही निर्भया कांड के तरह कुछ दिनों में भुला दिया जाएगा और पुनः किसी दिन ऐसे घटनाएं होगी। समाज को अपने अंदर इसके हल तलाशने की जरुरत है, और महिलाओं के साथ खड़े रहने की जरूरत है उसे दोषी ठहराने की नहीं। समाज को आत्ममंथन की आवश्यकता है की आखिर क्यों देवियों के रूप में पूजे जाने वाली महिलाएं खुद को सुरक्षित नहीं पा रही है।

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