खतरें में भारत

Posted by Kamlesh Bohra
April 15, 2018

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जब भी बलात्कार या रेप जैसी घटनायें सुनता हूँ , तो दिल दहल सा जाता है | मैं लिखना नहीं चाहता था , लेकिन बोलना चाहता हूँ , लाखों की भीड में , लोगों को समझाना चाहता हूँ | लेकिन मुझे अब पता भारत में शायद ही हम जैसे लोंगो की कोई सुनता है | मुझे गर्व है कि मैंने भारत माँ की कोख में जन्म लिया और जिसका एक गौरवशाली इतिहास रहा है |
लेकिन उतनी ही शर्म अब मुझे यह कहने में आती है कि मैंने वर्तमान भारत में जन्म लिया हैं , और इस देश में मानवता का बार बार शर्मशार होना इस बात की और संकेत कर रहा है कि हम अपनी संस्कर्ति को भुलाकर मानवता को भुलाकर एक जानवार बन गये हैं |
हाल में हुयी आसिफा और उन्नाव बलात्कार मामलें में मैंने राजनिति चलते हुयी देखी | बलात्कार का दोषी चाहे कोई भी हो , लेकिन हम सब भी उतने ही बडे दोषी हैं | हम देश की सरकार पर आरोप तो लगा देतें हैं कि आपकी समय में यह घटनायें हो रहीं हैं , और जिसका फायदा विपक्ष की सरकार बहुत ईमानदारी से उठा रहीं हैं |
और हाँ अपने हिन्दुस्तान की एक और खास बात है | यहाँ अगर किसी लडकी को बलात्कार का शिकार होना पडता है तो उसकी रक्षा में आने वाले लोग मानवता दिखाने की बजाय इस बात पर ज्यादा जोर देंगे की लडकी किस मजहब या समुदाय से ताल्लुक रखती है | अगर वह लडकी दलित या मुस्लिम होती है तो पूरा मुल्क सडक पर उतर आता है , बॉलीवुड से लेकर सोशल – मिडिया तक पूरा मुल्क इंसाफ की मांग करता है , और यह ही वह समय होता है , जब हमारे देश के नेता राजनिति खेलते हैं , और अपना फायदा उठातें हैं |
और मैं यह सोचने पर मजबूर हो जाता हूँ कि आज के समय में भी हम भारतीय क्या इतने बडे बेवकूफ हैं कि जात और मजहब के नाम पर अलग होकर एक दूसरे के खून के प्यासे हो जातें हैं , हाँ मुझे यह कहने में शर्म आती है कि यह सच है , हम आज भी गलत मानसिकता को दिमाग में लेकर आगे बढ रहें हैं और यह ही हमारे पतन का कारण होगा |
आओ हम सब मिलकर ऐसे भारत का निर्माण करें जहाँ कोई भेदभाव न हों , जहाँ जात , मजहब और समुदाय की बात न हो | जहाँ अगर बात हो तो सिर्फ अपने मुल्क की तरक्की की , और जहाँ अगर एक व्यक्ति कमजोर पड जाये तो उसको सहारा देने की , मैं कमलेश बोहरा आशा करता हूँ कि आप भी शायद एक अच्छा भारत चाहतें होंगें , क्यों न शुरूआत करें अभी से तोड दें वह सारी जंजीरें दो हमें जात , मजहब और समुदाय के नाम पर अलग कर हमें आगे बढने से रोक रहीं हैं |

जह हिन्द , जय भारत
कमलेश बोहरा ….

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