देश ने खोयी एक और निर्भया

Posted by Arati Kumari
April 16, 2018

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साल 2012 का दिसंबर था | एक अंग्रेजी अखबार में निर्भया के साथ बलत्कार और हत्या कि खबर बिस्तार छपी थी | उसी शाम या उसके अगले दिन वो खबर टीवी पर सवार होती है | और देखते-देखते ही दो दिन के भीतर जैसे जैसे इस काण्ड कि एक एक कहानी लोगो तक पहुंचनी शुरू होती है | लोग घरो से बाहर आने लगते है शुरुआत लेफ्ट से जुड़े महिला संगठनों ने कि थी | मगर वो बाद में ये आन्दोलन पहले दिल्ली का हुआ फिर पुरे देश का हो गया|
जंतर मंतर से लेके रायसीना हिल्स और राजपथ पर हजारो लोग उतर आये | दिल्ली कि बहुत सारी लड़किया जो कभी किसी धरने में नहीं गई थी | पहली बार इस धरने में गई | कोई लड़की आपने आप को रोक नहीं पायी | लड़कियो ने आपने पैसे से पोस्टर छपवाये थे, बलत्कार और स्त्री हिंसा के खिलाफ स्लोगम भी लिखे थे | वो अंतिम बार जूल्म से आजाद होने के लिए इस में शामिल हुई थी| उनके माँ बाप भी उन्हें नहीं रोक सके | किसी ने सोचा भी नहीं था | कि लोगो का यह समूह रायसीना हिल्स पर कब्जा कर लेगा जिस पर वीआईपी कारे चला करती थी, या 26 जनवरी के दिन टैंक चला करते थे | दिन हो या रात हो बलत्कार के खिलाफ मजबूत कानून, बलत्कार कि मानसिकता, पुलिस कि लापरवाही, इस सब को लेकर आवाज उठ रही थी | उस वक़्त सरकार कि भी जुबान लड़खराने लगी थी | जस्टिस वर्मा के नेतृत में कमेटी बनी, गिरफ्तारी हुई, सजा हुआ,सब हुआ|
12 अप्रैल का यह सुरज रायसीन के हिल्स पर न जाने किस से मुँह छिपा कर डूब रहा है| यह वही रायसीन हिल्स है जहाँ हजारो लोगो ने पहुंचकर सोती सरकार को जगा दिया था | और आज राजपथ कि सड़के खाली है | इक्का दूक्का कारे नजरे चुरा कर उतर रही है | क्या लोग निर्भया और आसिफा के मामलें में मजहब का कोई हिसाब किया है | क्या लोग अब उसी आन्दोलन से भागने लगे है कि कही अब उन्हें आसिफा के लिए भी बाहर नहीं निकलना पर जाये | या फिर उन्हें बलात्कार के घटनाओं से फर्क परना बंद हो गया है छः साल बाद दिल्ली कि इन सड़को पर पत्थर चल रहे है इन सड़को पर गाड़िया दिख रही है लेकिन निर्भया के लिए निकले लोगो के लिए ये जगह खाली है क्या देश इतना बदल गया है कि उसके लिए आसिफा बेटी भी नहीं रही |
ऐसा नहीं है कि आसिफा के लिए भीड़ नहीं आई थी | 15 फरवरी को एक रैली हुई थी | जिस में लोग तिरंगा को लेकर निकले थे | यही तिरंगा क्या निर्भया के आरोपीयो के हाथ में भी था | मगर यही आरोपियों को बचाने के लिए तिरंगा लेकर भीड़ आयी हुई थी |
10 जनवरी को जब आसिफा को आगवा किया गया | उसके साथ मंदिर में बार-बार बलात्कार हुआ, बेहोशी कि दवा दी जाती रही | मरने के बाद भी बलात्कार किया गया | फिर भी किसी को कोई फर्क नहीं पड़ा |
बिहार के रोहतास जिले में छः साल कि बच्ची के बलात्कार का मामला सामने आया है | जो आरोपी गिरफ्तार हुआ है वो मुस्लिम है कठुआ में जहाँ नेतावो ने ये नहीं कहा कि आरोपी को मार देना चाहिए या फांसी पे लटका देना चाहिए | वो सरकार को निकम्मा बता रहे है |
कठुआ में आठ साल कि आसिफा के हत्या और बलात्कार का क्या इसलिए साथ दिया जा रहा है कि वो हिन्दू है और रोहतास में आरोपी को बांध के मारने के बात बीजेपी सांसद इसलिए कर रहे है कि वो मुस्लिम है | हम कहा आ गये है | आज सोशल मीडिया रोहतास के घटना को लेकर सक्रिय है | वो उसी तरह पूछ रहा है कि कठुआ कि आसिफा कि, बात क्यों नहीं करते हो | ये मानसिकता इंसान को दरिंदा बना देती है | एक ही कत्ल को धर्म के नाम पर जायज या नजायज बना देती है |
आप आपने बच्चो से पूछिए कि कही वो इस नफरत के साथ तो नहीं है | देर न हो जाये वर्ना वो भी किसी दिन इस भीड़ में शामिल हो कर अपराध न कर बैठे |

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