फेसबुक , चूनाव एवं ग्राहकों की निजता

Posted by GAUTAM TIWARI
April 12, 2018

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फेसबुक का वर्तमान प्रकरण 1973 के चलचित्र “यादों की बारात के उस गाने की याद दिलाता है जिसके बोल कुछ यूं थे ,”आपके कमरे में कोई रहता हैं ये हम नही जमाना कहता हैं। हालिया मामला हैं कि कैम्ब्रिज analylytica नामक एक कंपनी ने क़रीब 5 करोड़ यूज़र्स का डेटा बिना ग्राहकों की मंजूरी के उनके डेटा को देखा एवं उसका इस्तेमाल अपने फायदे के लिए किया , इस कंपनी पर यह आरोप है कि इसने फेसबुक से थर्ड पार्टी app के जरिये 2013 से 2015 तक ग्राहकों के निजी डाटा को चुराकर इसका इस्तेमाल अपने पॉलिटिकल फर्म के लिए किया तथा लोगो के राजनीतिक व्यहवार को जानने के लिए किया गया

यहाँ तक की इस कंपनी ने अपने ग्राहकों को जिताने के लिये हनीट्रैप का इस्तेमाल भी किया जिसके बारे में हम काफी अपने हिंदी न्यूज़ मीडिया में सुनते है की पाकिस्तान महिलाओं का इस्तेमाल फौजी अफसरों से सेना के निजी जानकारी को पाने के लिए करता है ,इस फर्म ने फेक न्यूज़ फैलाकर ग्राहकों के राजनीतिक मत को भी बदलने का प्रयास किया,

भारतीय संदर्भ में अगर इस घटना को समझना हो तो उस बयान को समझना होगा जब व्हिसलब्लोअर क्रिस्टोफे विली ने लंदन की एक अदालत में कहा कि कई राजनेताओ ने कांग्रेस को 2014 में हराने के लिए डैन मुरेसोन को पैसे दिए और हम जानते हैं कि चुनाव के परिणाम क्या थे, भारत में कई राजनीति दल इस फर्म के ग्राहक थे तो हम अंदाजा लगा सकते हैं कि चूनाव में कितनी निष्पक्षता रह गयी है

इस विवाद में स्टीव banon का नाम प्रमुख है जो 2014 तक कैम्ब्रिज analytica के सीईओ थे ,बाद में उन्होंने डोनाल्ड ट्रम्प के चुनाव प्रचार के प्रमुख बन गए ओर इन्ही के समय में डेटा संग्रह का कार्य किया गया जिसका इस्तेमाल माना जा रहा है कि 2016 के अमरीका के राष्ट्रपति चुनाव में किया गया था , ऐसा आरोप इसपर हैं यह वाक्या विश्व में चूनाव की विश्वसनीयता पर सवाल उठाता है ।

इस प्रकार के कंसल्टेंसी फर्म भारत में भी हैं प्रशांत किशोर की ई पैक कंसल्टेंसी फर्म । 2014 में मोदी को ओर बिहार में राजद गठबधन को जिताने के जनक माने जाते हैं ये घटना उनकी कार्येप्रणाली पर सवाल उठाता है की वो जनता के मत को किस प्रकार प्रभावित करते हैं कई प्रकार के गलत हथकंडे अपनाए जाते हैं जैसे धार्मिक द्वेष ,सांप्रदायिकता आदि

भारत में दुनिया के सबसे ज्यादा फ़ेसबुक यूज़र्स हैं फेसबुक का ही आंकड़ा कहता हैं कि तकरीबन 5.6 लाख नागरिक के फेसबुक के निजी डेटा को प्रभावित किया होगा,फ़ेसबुक के लगभग 217 मिलियन ऐक्टिव भारतीय यूज़र्स जो की ज्यादातर युवा हैं, क्या फेसबुक इस प्रकार के प्रकरण रोकने के लिए कोई कदम उठाएंगे faceboook ने कहा है कि वो अपने यूजर सर्विस इंटरफेस में बेहतर बनाकर उसे दुरुस्त करेगा लेकिन उसमें अभी समय लगेगा

लोगों के अंदर डर भी हैं कि उनके निजी डेटा का इस्तेमाल गलत तरीके से ना हो,फेसबुक के इस प्रकरण के बाद वैश्वीक स्तर पर एक कैंपेन चला कि फेसबुक डिलीट कर दिया जाए, इस घटना का असर ये हुआ की ग्लोबल सीईओ फेसबुक मार्क को अमेरिका हाउस कॉमर्स कमिटी को 11 अप्रैल को अपनी बातें रखने एवं सवाल जवाब के लिए बुलाया ,सवाल ये उठता हैं कि भारत ने ऐसा क्या किया गया उसके 5.6 लाख नागरिको के डेटा चोरी हुए ,कायदे से तो मार्क को भारतीय संसद में सवाल जवाब होना चाहिए था लेकिन ऐसा कुछ नही हुआ ,लोगो में राजनीतिक व्यवस्था के प्रति अविश्वास लगातार कम हुआ है और ये विवाद उसे ओर बढ़ाएगा।

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