कश्मीर का दोजख़

Posted by Sharda Dahiya
April 14, 2018

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जब छोटे थे तब स्कूल ,घर में एक दर दिखाया गया था की ये मत करना भगवान पाप देते हैं | या नर्क जाना पड़ेगा जैसे जुमले सुनते थे | कमाल ये था की मान  भी जाते थे उनकी बातों को | मगर आज भारत के हालात देख कर लग रहा है की नर्क का डर आज के बच्चों दिखाने की जरूरत नहीं है | भारत आज  खुद में दोजख़ से कम नहीं है | अब घर में अखबार आता है तो अखबार नहीं होता हाथ में खून और मॉस के लोथड़े होते हैं | उन्नाव रेप केस याद है ना आपको ? कहीं आप भूल ना जाए उसके लिएकश्मीर की  आसिफा को याद रख लीजिये |कश्मीर जिसे स्वर्ग कहते हैं आज उसका भी नर्क देख लीजिये | क्या स्तर आगया है इन्सान के दिमाग का जानवर से बदतर होगया है |  भारत के संविधान में भी विवाह की उम्र 18 साल की है लडकी की , कारण की वो शारीरिक तौर पर इस लायक हो जाए की वैवाहिक सम्बंधों की समझ रख पाए | हर रोज अखबार और टीवी चैनल देख कर लगता है की दानव की बस्ती में रहने आगये है | कहीं 11 महीने की बच्ची को शिकार बना रहे हैं है ,कहीं ४ साल की बच्ची को | जंगल राज नहीं तो और क्या है ये ? जंगल में शेर जो ताकतवर होता है वो  हिरन के मासूम बच्चे के मॉस के लिए लालियत रहता है | अब डर लगने  लग गया है की सच में घर से बहार जाकर सेफ़ हैं हम ? मुझे नहीं लगता ? जिन्दगी और दिल दिमाग इस कद्र हिल गया है की अब बेटी पैदा करने की सोचना आग के दरिया को पार करने जैसा है | इस दरिंदगी के बाद तो मेरा इरादा तो कम से कम पुख्ता हो गया है की नहीं अब बेटी नहीं चाइये| जिसे इतने नाजों से पालूंगी | उसकी एक एक ड्रेस के लिए बाजार की गलियां छान के आउंगी कैसे उसकी दर्द ,और आंसुओं में भीगी आँखों से नजरे मिला पाउंगी | कैसे ले कर आजाऊं उसको इस वहशत में |हर पल महसूस होता है की ये तो कोई और ही  दुनिया है वो दुनिया तो नहीं है जिसके हमने सपने देखे थे | अब कहाँ गये वो सब दलील देने वाले जो इस वहशत के लिए भी लडकी को जिम्मेदार मानते थे ,कपड़े जिनके लिए अहम मुद्दा था | मर्द का जानवर होना नहीं | औरत को बस सेक्स ऑब्जेक्ट मत बनाइए | खिलौना नहीं है की टूट गया तो दूसरा ले लेंगे | औरत  की जिन्दगी भी इतनी ही महत्वपूर्ण है जितनी मर्द की | झांक लीजिये एक बार खुद में और मत गाली बनिए मर्द होने के नाम पर | जियो और जीने दो का देश था हमारा अब खुद जियो मगर दुसरे को जीने मत दो की तर्ज पर चल रहा है | कहने सुनने को बहुत कुछ है मगर दिल में जो हुक उठ रही है ये सब देख कर मैं उसको शब्दों की शक्ल देते हुए भी डर रही हूँ उस माँ पर क्या बीती होगी जब उसकी नन्ही जान को देख कर जिसे वो कलेजे से लगाकर राजकुमार के सपने दिखाती थी | राजकुमार तो नहीं आया दरिन्दे आये और उसके बाद क्या हुआ जानते सब है मगर कहता कोई नहीं |

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