बोलिए! खुद से उपर उठकर बोलिए

Posted by Abuzar Tabassum
April 14, 2018

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वैसे तो मैने वीडियो मे साफ साफ कहा है,मैं फिर से आप से कह रहा हूँ जो इस काम मे बिज़ी हैं कि जब से दुनिया बनी है तब से कब कब किसी मुस्लिम लड़के ने किसी हिंदू लड़की का रेप किया है,ताकि आप अभी लोगों के गुस्से पे सवाल पूछ सकें कि ये गुस्सा तब क्यूँ नही था,मैं आपसे कहना चाहता हूँ की आपकी नफ़रत और आपकी शर्म ने आपको मार दिया है,अगर आप ज़िंदा हैं भी तो बहुत बीमार हैं .जी हाँ मुझे बहुत शर्म आई इस तरह के “मुस्लिम लड़के,हिंदू लड़की” शब्द का इस्तेमाल करते हुए,जिस तरह से तब शर्म आई थी जब मेडिया और लोगों ने एक रेप की घटना का ज़िक्र करते हुए “मंदिर” शब्द पे बहुत ज़ोर दिया था. जितना नुकसान ये रेप की घटनाओं ने नही किया है समाज का,उस से कहीं ज़्यादा नुकसान आपने कर दिया है समाज का. एक इंसान के तौर पर आप अंदर से बहुत खाली हैं,इसलिए अपनी नाकामी और ख़ालीपन को छुपाने के लिए आप सुबह से शाम तक चलने वाले “हिंदू-मुस्लिम के बहस और डिबेट्स” के ज़रिए अपनी धार्मिक कुंठा को शांत करते हैं. आपके नेता आपको हर कदम पे एक दूसरे के खिलाफ खड़े करेंगे,पर क्या आप इन आने जाने वाले नेताओं के लिए अपने बहनों के खिलाफ खड़े होंगे,क्या आप अपनी धार्मिक कुंठा को शांत करने के लिए अपने उन दोस्तों के खिलाफ खड़े होंगे जिनके साथ अपने स्कूल मे पढ़ाई की,कॉलेज मे पढ़ाई की,साथ मे नौकरी की,साथ मे क्रिकेट खेला—अगर आप ऐसा करते रहेंगे तो एक बीमार समाज को और बीमार होने से बचाना बहुत मुश्किल होगा

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