मैं तुम और ‘खाप’

Posted by Megha Saw
April 12, 2018

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भारत में प्रेमी जोडों की सुरक्षा का ख्याल एक सोच से ज्यादा कुछ भी नहीं। जिसका सबूत आए दिन खबरों में देखने को मिलता है। यह खबरें दिल दहला देती हैं क्योंकीं इन खबरों को अंजाम भी प्रेमी जोडों के घरवाले ही देते हैं, शायद उन्हे अपनी संतान कि खुशी से ज्यादा अपने दोगले समाज की चिंता रहती है। कुछ सालों पहले का मनोज और बबली का केस भी ऐसा ही एक सबूत है, जब दोनो के परिजनों नें अपने सामाजिक रुतबे को बचाने के लिए दोनो की हत्या कर दी थी।
मनोज और बबली की तरह ऐसे कई नौजवानों को अपनी जान सिर्फ इसलिए गवानी पडी क्योंकीं उन्होंने अपनी मर्जी से अपना जीवनसाथी चुनने की गलती की थी। उनकी गलती यहीं खत्म नही होती.. इन प्रेमी जोडों  ने हिम्मत की थी खाप पंचायत के फैसले को न मानने की। खाप पंचायतों के बारे में तो आप जानते ही होंगे.. अगर नही जानते तो मेरा यह आर्टिकल पढने के बाद जान जाएंगे।
सरल शब्दों में कहूं तो खाप पंचायतें ऐसी पंचायतें हैं जो हरियाणा और पश्चिमी उत्तर प्रदेश में स्थानीय प्रशासन की तरह काम करती हैं। लेकिन मामुली पंचायतों के मुकाबले यह कहीं ज्यादा प्रभावी और खतरनाक है। खाप पंचायतों की ताकत का अंदाजा आप इस बात से भी लगा सकतें हैं की उनके आदेश को ना मानने की सजा मौत हो सकती है इसलिए कोई भी उनके आदेश को ना मानने की गलती नही करना चाहता।
हालांकी भारतीय सरकार नें कई बार आदेश जारी करके खाप पंचायतों पर रोक लगाने कि कोशिश की लेकिन हर बार नाकामयाब रही। इस नाकामयाबी का कारण है हमारे लोगों की संकीर्ण सोच। ऐसे लोग जो सोचतें हैं की दो लोगों को शादी करके साथ रहने के लिए उनकी खुशी से ज्यादा उनका धर्म, जाती, गोत्र, और सामाजिक रुतबे का एक दूसरे से मेल खाना जरुरी है।
लेकिन तमाम नाकामयाबियों के बावजुद एक बार फिर सुप्रीम कोर्ट ने नया आदेश जारी किया है जिसके मुताबिक समय समय पर होने वाली खाप पंचायतों को रोका जाएगा और अगर खाप पंचायतें जबरन कोई फैसला करती हैं तो उनपर कानूनी कार्रवाई की जाएगी। जिसमें स्थानीय पुलिस की स्पेशल टीम बना कर खाप पंचायतों की दबंगई को रोकने की कोशिश की जाएगी, ताकी खाप का खौफ कम हो।
ऐसे में यह उम्मीद की जा सकती है की शायद इस बार कानून खाप पंचायतों पर लगाम कसने में कामयाब रहे, ताकी फिर किसी प्रेमी जोडे को अपना जीवन साथी चुनने के लिए मौत का सामना न करना पङे।

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