रेप जैसी दरिंदगी को भी हथियार बना बैठी राजनीति; दुखद एवं घोर निंदनीय !

Posted by Vidya Bhooshan Singh
April 13, 2018

NOTE: This post has been self-published by the author. Anyone can write on Youth Ki Awaaz.

उन्नाव एवं कठुवा रेप केस की जितनी निंदा और भर्त्सना की जाए कम है।

बेटी और बेटी के पिता को मेरी भावभीनी श्रद्धांजलि !
यह घटना एक बार फिर नब्बे के दसक में बनाई जाने वाली फिल्मों का याद दिला रही जहाँ लगभग सभी फिल्मों में एक बाहुबली नेता बेटी का रेप करता था सारा सत्ता, कानून और उसके गुर्गे साक्ष्य मिटाने से लेकर परिवार को प्रताड़ित करने में लग जाते थे, लेकिन वहाँ एक कोई हीरो एकदम से सामने आता था और न्याय के लिए जंग लड़ता था कभी कभी न्याय दिला पाता था, लेकिन यहाँ तो तथाकथित बाहुबली विधायक सेंगर बालात्कार के आरोपी अपने रसूख और बाहुबल के चलते हत्या को भी छोटा मामला ही मानते है, क्यों न माने ?? जब पुलिस ही उनके गुर्गों एवं सुपारी किलर का काम करती हो !
जघन्य अपराध के आरोपी विधायक को गिरफ्तार कर जहाँ रेप पीड़िता को न्याय दिलाने की जिम्मेदारी पुलिस की थी वही वो उसको डराने एवं कमजोर करने का काम कर रही थी और इस काम के लिए उसके पिता को मोहरा बनाया गया और न मानने पर खत्म भी कर दिया जाता है।

वाह रे शासन ! देखों ये पैसा, पावर और राजनीति कितने और घरों और परिवारों को उजाड़ता है, समाज में एक भय व्याप्त हो गया है कि अगर किसी के साथ कोई अनहोनी होती है तो कहा जाए चुप होकर बैठ जाए या अपनी अस्मिता मर्यादा को बचाने के चक्कर में अपना भाई और बाप को मरता देखे या फिर एक और बार इन दरिंदो के हवस का शिकार बनकर चुप चाप बैठी रहे !
आखिर क्या करे वो महिला वो बेटी वो मां ???
कर भी क्या सकती है जब हमारे प्रमुख रूप से रक्षक पुलिस, जनप्रतिनिधि(विधायक, सांसद, मंत्री एवं अन्य) ही सबसे बड़े भक्षक बने हुए है ।

इस पूरी घटनाक्रम ने दिल को झकजोर दिया है और यह भी साबित कर दिया कि सरकार और पार्टी इन्ही बाहुबली नेतायों के इशारों पर चलती है आखिर क्यों न चले जब विधायक जी सत्ता के हिसाब से हर पार्टी के माननीय रहे है जब मायावती का राज था तब भी विधायक थे, साइकिल पर भी अच्छी सवारी की और अब जब जनता ने इन सभी से निजात पाने के लिए शासन और सत्ता को बदला तो क्या पाया एक युवा एवं दूरदर्षिता रखने वाले परिवारवाद से ग्रसित मुख्यमंत्री के जगह पर मोह माया से दूर एक कट्टर छवि का ईमानदार सन्यासी लेकिन क्या बदला केवल लाल टोपी से भगवा रंग का गमछा बाकि तो उन्ही लोगो को टिकट दिया गया जो पार्टी की इज्जत बचा सके भले ही समाज की बहू बेटियों की इज्जत लूटते रहे !!!

आखिर ऐसी क्या मजबूरी थी ? कि रेप के आरोपी को अभी तक गिरफ्तार नही किया गया और उसके दोसी होने की पंचायत पहले होने लगी वह भी  उस शासन में जहाँ ये कहा जाता हो कानून को किसी को हाथ में नही लेने दिया जाएगा, जहाँ अपराधियों से अपील की जाती हो कि राज्य छोड़कर जले जाए नही इनकाउंटर में मार दिए जाएंगे, शासन की हनक दिखाने और मेडल पाने की होड़ में कई बेगुनाह मारे भी गए लेकिन आखिर IPC की धारा 376 जैसे अपराध में गिरफ्तारी क्यों नही ??
जहाँ पुलिस सक के आधार पर एक गाय खरीदने या बेचने वाले पर रासुका या गैंगेस्टर तक लगा देती हो, कई बार IPC की धारा 506 और 504 में जेल भी भेज देती है ।

वैसे शुरू के दिनों में रोमियो और मजनूं के लिए पुलिस खूब मेहनत की भाई-बहन होने का भी प्रूफ मांगती थी कि कही अपराध न हो सके हमारी महिला और बेटियां भय मुक्त वातावरण में रह सके, मुझे याद है आदरणीय योगी जी ने कहा था हमे समाज में अराजकता और कुशासन से ग्रसित व्यवस्था मिली है जहाँ हमारी बहु बेटियां सुरक्षित नही है हम उनके लिए पहले दिन से काम शुरु कर दिए है लेकिन कही न कही ये काम आपने समाज के दरिंदों के लिए शुरू किए और पार्टी और शासन सत्ता में सम्बंध रखने वालों को आपने यूँ ही मान लिया की ये सब सरीफ है !!

देखिए क्या होता है !
CBI के पास केस जाना अब तो सरकार और अपराधी दोनों के लिए आसान रास्ता हो गया है ।
जाने क्यों NHM घोटाला, आरुषि हत्याकांड, तलवार और DSP कुंडा की दिनदहाड़े मौत ये सब अब इस केस में भी माननीय को बइज्जत बरी की ओर ले जाती दिखती है बहुत होगा तो उन पुलिस वालों को गैर जिम्मेदारी और गैर इरादतन हत्या के केस में जेल भेजकर घर वालो कुछ सहानभूति राशि देकर काम खत्म।

सरकार की इतनी निस्क्रियता एवं शिथिलता यह बताती है कि 2019 के चुनाव में अगर बढ़त चाहिए तो राजपूत एवं सवर्णों के बीच बाहुबलियों को सुरक्षित रखना शासन का परम कर्तव्य है क्योंकि मोदी जी के सभी विकास के एजेंडा 2022 तक है !!

कश्मीर में हुई दिलदहलाने वाली घटना और निर्मम हत्या भी इसी राजनीतिक सरगर्मियों से गुजर रही है, जहाँ एक मासूम बच्ची का सामूहिक बलात्कार कर हिंदू-मुस्लिम के रंगों में रंगने की कोसिस की जा रही है इंसान कितना हैवान हो जाएगा किसी ने नहीं सोंचा होगा । रेप और हत्या को किसी धर्म और मजहब में कोई जगह नहीं लेकिन राजनीति में इसके लिए बहुत जगह है । हत्यारे और रेपिस्ट ही सायद आज राजनीतिक धुरी को संभाल रहे है ।

यह सब सोंचकर असहनीय पीड़ा होती है। भगवान बच्ची के आत्मा को शांति दें !

उम्मीद है कि इन दरिन्दों को फांसी की सजा जल्द होगी ।

 

विद्या भूषण सिंह

स्वतंत्र सामाजिक चिंतक

Youth Ki Awaaz is an open platform where anybody can publish. This post does not necessarily represent the platform's views and opinions.