” समाज का बंटवारा करने वालों से सावधान रहने की जरूरत “

Posted by Padmesh Gautam
April 15, 2018

NOTE: This post has been self-published by the author. Anyone can write on Youth Ki Awaaz.

 

आजादी के बाद से अपनी राजनैतिक महत्वाकांक्षा की पूर्ति के लिए जिस तरह से समाज को बांटने का काम हुआ वह दुर्भाग्य पूर्ण है।यद्यपि कुछ राजनेताओं ने समाज से गैर बराबरी,असमानता मिटाने की कोशिश की और परिणाम भी मिले।परन्तु इसके विपरीत कुछ राजनेता समाज में वैमनस्यता की आग लगाने में सफल रहे। इन सबके बीच राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ ने समाज के एकीकरण का निरंतर अभियान चलाकर संपूर्ण समाज को एकता की सूत्र में पिरोने का काम किया।
देश में दलित बनाम सवर्ण की राजनीति करने वालों की समीक्षा करने पर ज्ञात होता है,कि उन्होने दलित समाज का उत्थान तो नहीं किया अपितु स्वयं का उत्थान उनकी प्राथमिकता रही है।वर्तमान राजनीति में सुश्री मायावती इसका जीवंत उदाहरण हैं।दलित राजनीति के नाम पर उन्होंने राज किया और अथाह संपत्ति अर्जित की।यदि वो दलित समाज की हितैषी होतीं तो संपत्ति को बैंकों में जमा करने के बजाय बेरोजगार दलित नौजवानों को रोजगार देने में खर्च करतीं तो समाज का उत्थान होता।
वर्तमान में आरक्षण पर बहस होती है।मैं इस बहस में नहीं जाना चाहता,परन्तु यह कहने में भी संकोच नहीं कि योग्यता को आरक्षण की कोई आवश्यकता न तो आजादी के पूर्व थी।और न ही अभी है।बाबा साहब अंबेडकर किसी आरक्षण के कारण योग्य नही थे।यह सत्य है,कि कमजोर वर्ग के उत्थान में आरक्षण सहायक है।लेकिन समय-समय पर इसकी समीक्षा भी आवश्यक है।
रामधारी सिंह की यह कविता मुझे याद आती है..
” ऊंच नीच का भेद न माने,वही श्रेष्ठ ज्ञानी है,
दया धर्म जिसमें हो सबसे,वही श्रेष्ठ प्राणी है,
क्षत्रिय वही भरी हो जिसमें,वीरता की आग,
सबसे श्रेष्ठ वही ब्राह्मण है,हो जिसमे तप त्याग,
मूल जानना बडा कठिन है,नदियों का वीरों का,
धनुष छोडकर और गोत्र क्या,होता है रणधीरों का,
पाते हैं सम्मान,तपोबल से भूतल पर,
जाति जाति का शोर मचाते केवल कायर क्रूर ”
जो लोग जाति धर्म के नाम पर समाज दूरियां बढाने का काम कर रहे हैं,वो समाज का भला नहीं चाहते हैं।हमारा उत्थान हमारी एकरूपता में है,और हमारी एकता से ही अखण्ड भारत का निर्माण संभव है।
अब जाति पांति का भेदभाव समाप्त हो चुका है।सभी को बराबरी का दर्जा दिया जा रहा है।यह बात अलगाववादी मानसिकता के लोगों को हजम नहीं होती और वो चाहते हैं, कि समाज में असमानता बनी रहे।इसका कारण यह है,कि वो हमें आपस में लड़ाकर अपना महत्व बनाए रखना चाहते हैं।आज देश के राष्ट्रपति अनुसूचित जाति से हैं।क्या अभी भी गैर बराबरी है..?
वर्तमान सरकार में यदि सबसे अधिक सम्मान दिया जा रहा है,तो वो हमारे बाबा साहब अंबेडकर जी को दिया जा रहा है।बाबा साहब से जुडे 5 स्थानों को पांच तीर्थ के तौर पर विकसित किया जा रहा है। महू(इंदौर) में जन्मभूमि,लंदन में डाॅ.अंबेडकर मेमोरियल उनकी शिक्षा भूमि,नागपुर में दीक्षाभूमि,मुंबई में चैत्यभूमि,दिल्ली में उनकी महापरिनिर्वाण भूमि शामिल है।
सर्वप्रथम हम सब भारत माता की संतान हैं,उसके बाद हमारे जाति,धर्म,संप्रदाय हैं।हम एक थे,एक हैं,और एक रहेंगे। केवल उन समाज विद्रोहियों से सतर्क रहना है,जो हमें बांटने का कुत्सित प्रयास कर रहे हैं।
(पद्मेश गौतम)
कटनी

Youth Ki Awaaz is an open platform where anybody can publish. This post does not necessarily represent the platform's views and opinions.