सेक्युलेरिज्म का चश्मा

Posted by Kamlesh Bohra
April 16, 2018

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आज के जीवन में इंसान ने चाहे कितनी ही तरक्की क्यों न कर ली हो , लेकिन आज भी सवाल जब दिल से खुलकर बोलने का आता है या अपने अधिकारों के लिये लडने का आता है , तो कुछ लोग सिर्फ इसलिये चुप हो जातें हैं | या जो इंसान उस बात को उठा रहा हो उसका साथ सिर्फ इसलिये नहीं देते हैं , क्योंकि वह नहीं चाहतें हैं कि अन्य समाज के लोग उनकी तरफ नफरत से देखते हैं |
शायद ऊपर लिखे मेरे वाक्य बहुत लोंगो की समझ से परे होंगे , लेकिन हाल में हमारे देश में भाजपा की सरकार जिस सरकार के बारे में लोगों की एकमत राय है कि वह एक हिन्दूवादी सरकार है | वहीं दूसरी तरफ कांग्रेस , बसपा , सपा जैसी अन्य और पार्टियाँ हैं , जो अपने आप को मुस्लिमों , अल्पसंख्यंको , और दलितों को अपना हितैषी कहती हैं | आगामी चुनाव 2019 के लिये अभी से सभी पार्टीयाँ अपने चुनाव – प्रचार में लग चुकी हैं , और आरोप – प्रत्यारोप की राजनिति शुरू हो चुकी है | मुझे यह सोच कर बेहद दुख होता है कि हम एक ऐसे देश में रहते है , जिस देश में देश की सुरक्षा , विकास और तरक्की की बात न हो कर , चुनाव के मुद्दे जाति , धर्म और समुदाय तक ही सीमित है | हाल में ही कुछ महिने पहले कर्नाटक सरकार द्वारा लिंगायत समुदाय को अलग धर्म बनाकर अल्पसंख्यक बना कर आरक्षण देने का लालच देना भी इस देश के लिये एक शर्मनाक बात है | एस सी – एस टी एक्ट में किये जाने वाले संसोधनों में बदलाव को बिना जाने और सोचे – समझे दलित समुदाय का सडकों मे उतरकर तोड फोड करना बेहद ही शर्मनाक बात है , और उस से भी ज्यादा शर्मनाक यह है कि नेता , मिडिया फिर चाहे वह बॉलिवुड ही क्यों न हो सेक्युलरिज्म का जामा पहनकर इन सब बातों को नजरअंदाज कर रहा है , आज हालात उतने खराब नहीं हैं , लेकिन अगर इस तरह ही देश चलता रहेगा तो मुझे उम्मीद है , वह दिन दूर नहीं जब हम भारतीय एक पिछडे हुये देशों का हिस्सा होंगे | मैं यह नहीं मानता की जिस तरह से देश के संविधान की रचना की गई है , उसके अनुसार इस देश में इन 70 सालों में कोई शोषण का शिकार होना चाहिये था , लेकिन बडे शर्म की बात है कि ऐसा नही हुआ , 70 सालों से देश में चल रही गंदी राजनिती और अफसरशाही की वजह से दलितो और अन्य शोषित वर्गो को मिलने वाला फायदा भी सिर्फ उन लोंगो को मिला जिन की पहुँच ऊपर तक है , और सबसे ज्यादा घाटा उन स्वर्ण परिवार के लोंगो को हुआ जो वर्षो से गरीबी के दलदल में फंसे हुये हैं , और कोई सहायता न मिल पाने के कारण स्वर्ण समुदाय का यह आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग उठ पाने की स्तिथि में नहीं हैं , लेकिन सेक्यलेरिज्म का चश्मा पहने लोंगो को चाहे वह मिडिया हो सरकार हो या बॉलिवुड हो , इन लोंगो को दलित और मुस्लिम समुदाय ही मुश्किल में फँसा हुआ नजर आता है , और इन की नजर में स्वर्ण समुदाय के लोग ऱाजा – महाराजा की जीवन जी रहें हैं | लेकिन ऐसा नहीं है , और मुझे यह बताते हुये बेहद दुख हो रहा है कि भारतिय समाज में एक नये वर्ग का उदय हो चुका है , जो आर्थिक रूप से इतना कमजोर हो चुका है कि उस की स्तिथि दलितों और शोषित वर्गों से भी बहुत कमजोर है , लेकिन यह बेहद दुख का विषय है कि सरकार को और न ही अन्य किसी को जो अपने आपको इस समाज का उद्धारकर्ता मानते हैं , इस वर्ग की फिक्र है , क्योंकि आज भारत के ये लोग जो सेक्युलेरिज्म का चश्मा पहनकर इस देश को देख रहें हैं , मैं उनको बताना चाहूँगा कि साहब चश्मे ते अंदर से हर दुनिया अच्छी लगती है , अगर चश्मा उतारकर देखोगे तो यह भारत कुछ और ही है |

जय हिन्द , जय भारत

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