जानिये कहां निवेश करके आप बचा सकते हैं अपना इनकम टैक्स

2017-18 वित्तीय वर्ष बीत चुका है। और अगर आप टैक्स पेयर्स स्लैब से हैं तो टैक्स बचाने की चिंता से हाल ही में आपको दो-चार होना पड़ा होगा। आपके आय का श्रोत कुछ भी हो लेकिन अपने टैक्स सेविंग इनवेस्टमेंट तय करने से पहले एक बात जानना ज़रूरी है कि कुछ इनवेस्टमेंट ऐसे होते हैं जो इस साल तो आपका टैक्स बचा देंगे लेकिन मैच्योरिटी पर ये आपका टैक्स अमाउंट बढ़ा सकते हैं। इतना ही नहीं इनसे मिलने वाले इंट्रेस्ट और रिटर्न पर भी आपको टैक्स देना पड़ सकता है।

लेकिन कुछ फाइनैन्शियल इंस्ट्रूमेंट ऐसे भी हैं जिनमें निवेश और निवेश पर मिलने वाले रिटर्न पूर्णत: टैक्स फ्री होते हैं। यानि यह तय करना बहुत ज़रूरी है कि आपको किस तरह के फंड में निवेश करना है।

वो ऑप्शन्स जिनमें निवेश और निवेश पर मिलने वाले रिटर्न टैक्स फ्री हैं-

1.ELSS(इक्विटी लिंक्ड सेविंग स्किम)

ELSS एक इक्विटी म्यूचुअल फंड होता है जिसमें सेक्शन 80C के अंतर्गत 1.50 लाख तक की छूट मिलती है। ELSS में किये गये इनवेस्टमेंट की अवधी कम से कम 3 साल की होनी चाहिए।
इनसे मिलने वाले रिटर्न 2017 तक टैक्स फ्री थे लेकिन 2018 के बजट में इस तरह के निवेशों पर 10% LTCG(लॉंग टर्म कैपिटल गेन) टैक्स का प्रावधान कर दिया गया है।

2.EPF और VPF(इम्पलॉइ प्रॉविडेंट फंड और वॉलंट्री प्रॉविडेंट फंड)

EPF फंड वेतनभोगी कर्मचारियों के लिए होता है। जिसमें कर्मचारी हर महीने अपनी सैलरी(बेसिक+डीए) का 12% निवेश करता है। कर्मचारी के साथ साथ इम्पलॉयर को भी 12% निवेश करना होता है। EPF के अंतर्गत मिलने वाले इंट्रेस्ट भी टैक्स फ्री हैं।
VPF में अपनी निवेश का प्रतिशत बढ़ाकर सैलरी का 100% किया जा सकता है। हालांकि VPF में निवेश करने के लिए इनवेस्टमेंट की अवधी कम से कम 5 साल होनी चाहिए।

3. PPF(पब्लिक प्रॉविडेंट फंड)

PPF में किए गये निवेश और उससे मिलने वाले इंट्रेस्ट पूरी तरह से टैक्स फ्री हैं। PPF किसी भी पोस्ट ऑफिस या बैंक में जाकर खुलवाया जा सकता है। PPF में निवेश की अवधी कम से कम 15 सालों के लिए होनी चाहिए, जिसको 5 साल के ब्लॉक में बढ़ा सकते हैं।

4.ULIP(यूनिट लिंक्ड इंश्योरेंस प्लान)

ULIP सेविंग स्किम में आपको इंश्योरेंस के साथ-साथ इनवेस्टमेंट का भी ऑप्शन मिलता है। ULIP में अपने इंश्योरेंस प्रीमियम की रकम को निवेश भी किया जा सकता है। इस तरह के फंड में किए गए निवेश की अवधी 15 से 20 साल होती है, जिसमें कम से कम निवेश अवधी 5 साल की होती है।

5.सुकन्या समृद्धि योजना।

ये ऑप्शन बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ योजना के अंतर्गत शुरू किया गया है, जिसमें बेटी के जन्म से लेकर 10 साल तक निवेश कर सकते हैं। इसमें 1000 रुपये से लेकर 1.50 लाख तक निवेश किया जा सकता है।

बेटी के 18 साल होने के बाद रकम की 50 फीसदी निकाली जा सकती है और खाता खोलने से बेटी के 21 साल होने के बाद ही खाता मैच्योर होगा।

अब बात करते हैं उन निवेशों की जिसमें किये गए निवेश तो टैक्स फ्री हैं लेकिन उनसे मिलने वाले रिटर्न या इंट्रेस्ट पर आपको टैक्स देना पड़ेगा।

1.बैंक के साथ फिक्स्ड डिपोज़िट

ये सुविधा सभी बैंकों में उपलब्ध है। जिसके अंतर्गत एक निश्चित रकम बैंक में निश्चित समय के लिए निवेश किया जा सकता है। हालांकि टैक्स में छूट तभी मिलेगी जब निवेश की अवधी कम से कम 5 साल हो। यह निवेश सेक्शन 80C के तहत टैक्स फ्री होता है। फिक्स्ड डिपोज़िट में हर साल इंट्रेस्ट मिलता है लेकिन इसपर टैक्स देना पड़ता है। फिक्स्ड डिपोज़िट में मिलने वाला इंट्रेस्ट बैंक पर निर्भर करता है।

2.National Saving certificate- राष्ट्रीय बचत पत्र(NSC)

NSC, भारतीय सरकार द्वारा शुरू किया गया प्रयास है जो किसी भी बैंक में खुलवाया जा सकता है। NSC में 5 साल से लेकर 10 साल तक निवेश किया जा सकता है। निवेश की सीमा 500 रुपये से शुरू होती है जिसकी कोई उपरी सीमा नहीं है। इस तरह के निवेशों पर हर 6 महीने में इंट्रेस्ट मिलता है और ये इंट्रेस्ट टैक्सेबल होता है। NSC में 5 साल के निवेश पर 8% और 10 साल के निवेश पर 8.8%  इंट्रेस्ट मिलता है।

3. राष्ट्रीय पेंशन योजना(NPS)

NPS एक बहुत ही सुरक्षित निवेश है। इसमें कम से कम हर महीने 500 या साल में 6 हज़ार निवेश करना होता है। इनसे मिलने वाले इंट्रेस्ट 4% से लेकर 14% तक हो सकते हैं। इसके मैच्योरिटी पर मिलने वाला अमाउंट टैक्सेबल होता है।

ये सारे निवेश इनकम टैक्स के सेक्शन 80C के अंतर्गत आते हैं जिसमें अधिकतम टैक्स की छूट की रकम 1.50 लाख है।

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