जहानाबाद घटना इस बात का सबूत है कि हम एक बलात्कारी समाज में रह रहे हैं

एक नाबालिग बच्ची को घेर कर सात लड़के उसका कपड़ा उतार रहे हैं। वीडियो बिहार के जहानाबाद की है। लड़की भैय्या – भैय्या कर रही है। और लड़के घेर कर चारों ओर से उसे परेशान कर रहे हैं। वीडियो में कुल सात लड़के हैं इनमें से एक वीडियो बना रहा है।

दरअसल, हम लोग एक बलात्कारी समाज में जी रहे हैं, पता नहीं कब- कहां बलात्कार हो जाए! पता नहीं कब घेर कर कपड़ा उतारा जाने लगे!
यह भी नहीं कह सकते कि कोई बलात्कारी पेशेवर अपराधी ही होगा। कोई भी हो सकता है स्टेशन छोड़ने आने वाले अंकल भी, बाज़ार तक साथ आने वाले पड़ोसी भी, गाड़ी में लिफ्ट देने वाला दोस्त भी!

बलात्कार कहीं भी हो सकता है मंदिर में, मस्जिद में, फुटपाथ पर, गांव में, खेत में, कहीं भी। बलात्कार किसी के भी साथ हो सकता है
नाबालिग से, बालिग से, वृद्ध महिला से किसी से भी।

हर जगह प्रशासन घटना के बाद आती है।

फिर प्रशासन को पूरा दोष भी कैसे दें! घर में मां-बाप, भाई या रिश्तेदार के साथ रह रही बच्चियों का बलात्कार हो जाता है। फुटपाथ पर किसी लड़की का बलात्कार होता है और लोग देखते हुए आगे निकल जाते हैं। गांव में सात लड़के मिलकर किसी लड़की को नोचने लगते हैं।
समाज कहां हैं? वो वाला समाज जहां गांव या मुहल्ले में बाप की उम्र के इंसान को बाप तुल्य और भाई के उम्र वाले इंसान को भाई जैसा समझा जाता था।

सुनने में तीखा है, कुछ लोगों कि असहमति भी है लेकिन हम तो अब बलात्कारियों के बीच जी रहे हैं। जो वर्दी पहनता है वो भी बलात्कार करता है। जो जनप्रतिनिधि कहलाता है वो भी बलात्कारी है।

हर दिन बलात्कार, हर उम्र की महिला से, नाबालिग से, बालिग से, बुज़ुर्ग से। जिसका बलात्कार ना कर पाएं उसका सरेआम कपड़ा उतार देते हैं, ज़बरदस्ती छूते हैं।

मन होता है जब सब लाचार हैं तो प्रकृति क्यूं नहीं कुछ करती है। प्रकृति क्यूं स्तब्ध रह जाती है! अचानक तूफान क्यूं नहीं आता! बिजली क्यूं नहीं गिरती। धरती क्यूं नहीं फटती है। कठुआ के मंदिर में भगवान क्यूं नहीं आए। गाजियाबाद के मदरसा में उपरवाला क्यूं नहीं आया।

दिल्ली की सड़कों से लेकर जहानाबाद की गलियों तक। कठुआ के मंदिर से लेकर गाज़ियाबाद के मस्जिद तक। हर जगह बलात्कारी हैं!

सोशल साइट्स पर कुछ दिन पहले एक कैपेंन चला था #metoo. इस कैंपेन का मतलब था कि  “आपके साथ कभी छेड़- छाड़ या शारीरिक शोषण जैसी कोई घटना हुई है” अगर हां तो #metoo के साथ जुड़ जाइए। लाखों की तादाद में दुनिया भर की महिलाएं जुड़ती चली गईं। हर 15 मिनट में 10 बलात्कार होता है। एक दिन #metoo का यह कैंपेन बलात्कार के लिए होगा। और एक-एक करके सारी लड़कियां इससे जुड़ती चली जाएंगी।

क्यूंकी पेशेवर अपराधी से तो लड़ा जा सकता है। लेकिन बाप- भाई, दोस्त, चाचा, दादा, मामा, टीचर, पुजारी, मौलवी, पादरी की शक्ल में मौजूद बलात्कारियों से अगर बेटियों को बचाना है तो दुनिया की सभी बहनो, बेटियों, मम्मियों को अपने- अपने घर के बलात्कारियों को चिन्हित करना होगा। बलात्कारियों को पालना कम से कम अब बंद कर दीजिए। बलात्कारी हमारे-आपके घर से ही होते हैं।
शरम छोड़िए,
पर्देदारी छोड़िए।

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