Why I’m a pessimist about woman Safety : Justice For Asifa will not bring any change !

Posted by Preeti Panwar Solanki
April 16, 2018

NOTE: This post has been self-published by the author. Anyone can write on Youth Ki Awaaz.

Why I’m a pessimist about woman Safety : Justice For Asifa will not bring any change !

By Dr.Preeti Panwar Solanki

 

मेरे कुछ दोस्त ने आसिफ़ा केस के बारे मे ##JusticeForAsifa. social campaign  ज्वाइन करने को कहा, कुछ ने कहा candle  march करते है, बदलाव आएगा, आसिफ़ा को न्याया मिलेगा, हर लड़की को शायद फिर न्याय मिलेगा, कोशिश करेंगे तो कुछ अच्छा जरुर होगा !

मै माफी चाहती हू, मैं आपके साथ नही हूँ।

क्योंकि आप आशावादी भारतीय महिला है,पर मै नही हूँ।

नही , ऐसा भी नही है की मेरी निराशा देश के विकास को लेकर है ,
मुझे पूरा भरोसा है देश के सिस्टम पर, बदलती हुई सरकारो पर!

पर जहा तक woman safety का मुद्दा है, हाँ मै कोई उम्मीद बदलाव की रखती नही !
शायद इस सोच और नज़रिए के पीछे कुछ कारण है!

‘रेप’ ये शब्द मैने सबसे पहले 80s मे अपने बचपन मे किसी हिंदी मूवी मे सुना!

और एक बच्ची के नज़रिए से सीखा की एक आदमी ज़बरदस्ती किसी महिला के साथ   sexual assault करता है तो वो रेप होता है, और उसमे लड़की की इज़्ज़त चली जाती है! मुझ बच्ची को समझ नहीं आता था की लड़की की इज़्ज़त कैसे जाती इससे, गलत तो आदमी करता है इसमें ?
लड़की आत्महत्या करती है, और रेपिस्ट या तो आज़ाद घूमता है या लड़की का भाई या प्रेमी बदला लेता है! और पुलिस कुछ नहीं करती है, ये सब मूवी में देखा था तब !
1980 के दौर मे मैने एक बच्ची के तौर पे मैंने कभी भी न तो मूवी,ना ही अखबारों में विक्टिम के साथ न्याय होते हुए  सुना या देखा!
अख़बारो में ऐसी ख़बरे होती थी।

महिला के साथ बलात्कार, या अधेड़ ने किशोरी के साथ ब्लातकार किया।
न्याय की कोई ख़बर नही याद आती मुझे।

तो उस बच्ची ने इस सामाजिक बुराइ या सच को स्वीकार किया की ऐसा किसी भी लड़की के साथ हो सकता है, ‘सो गर्ल शुड टेक हर केयर ‘.

लेकिन आशा और भरोसा था की बदलाव आएगा, क्योंकि सब कुछ बदल रहा था!

अर्थवयवस्था, तकनीक, and I have learnt that India is a developing country !
और मै सही थी, सकरातम बदलाव आए।
जैसे जैसे मै बड़ी होती गयी, देखा मार्केट बड़ा हो गया है , डिजिटल टाइम आया, दूरदर्शन के अलावा ढेरो चैनल आए, न्यूज़ चैनल आये ,फॉरेन कम्पनीज आयी , अच्छी रोड्स बनी! सरकार किसी की भी हो, मैने तरक्की देखी!

और तरक्की ‘रेप ‘ में भी!

अब मैने एक नया ‘BETTER VERSION OF RAPE’ सुना!

‘गेंग रेप’
मै अब कॉलेज मै जाने वाली , करियर ओरियेनटेड गर्ल थी! और पहली बार सुना की किसी लड़की का ‘गैंग रेप ‘ हुआ!

ये क्या होता है?
मालूम चला की बहुत सारे आदमी मिल कर एक लड़की के साथ sexual assault करते  है!

बहुत बेहूदा सा लगा ये सब जान कर, क्या आदमी जानवर से भी बुरा होता है?
नही, गेंग रेप कोई नयी बात नही थी, सदियों से महिलाओ के साथ ये बर्बरता होती आई है, पर ऐसा लगा की अचानक यही सुनने को मिल रहा था हर तरफ ।

अख़बारो में और टीवी में अब ‘गैंग रेप ‘ रेप की न्यूज़ होती थी ।

महिले के साथ गैंग रेप, किशोरी के साथ गैंग रेप!

न्याय ?
न्याय की खबर शायद ही कोई याद मुझे!

अब मैंने एक एक युवा लड़की के रूप मे  सीखा फिर से वही की ‘ गैंग रेप ‘ एक सामाजिक बुराई है , किसी भी लड़की के साथ हो सकता है, न्याय नहीं मिलता, ‘सो गर्ल्स शुड टेक हर ओन केयर ‘.

 

लेकिन अच्छी बात ये थी की देश मेरा तरक्की पे था,

कुछ ही सालो मै सबके पास कार थी,मोबाइल फोन्स, घर मै ए.सी. थे।
कुछ हज़ारो की सॅलरी अब लाखो के पॅकेज ओर CTC हो गये!

सरकार कोई भी हो, मेरी आँखे तरक्की देख रही थी!
अब मै कॉर्पोरेट में काम करके देश की अर्थव्यवशा में एक जागरूक महिला की तरह अपना सहयोग दे रही थी साथ ही मल्टी टास्किंग पवरफुल वुमन की तरह घर और बच्चे का ध्यान रख रही थी!

देश में हो रहे सकरात्मक बदलाव मुझे हमेशा भारतीय होने पर गर्व महसूस कराते।

‘वुमन रेप ‘ वो भी अब बेहतर मीनिंग ढूढ़ रहे थे!

अब अखबारों मैं कुछ इस तरह की न्यूज़ और और टीवी मै बहस थी।

दिल्ली में लड़की के साथ ‘बीभत्स गैंग रेप’ हुआ, जहा उसके आंतरिक अंगो को भी धारीदार हथियारों से काट डाला और आंते भी काट दी गयी।
वीभत्स, डरावना था ये सब सुनना भी !

मुझे लगा शायद हर बार की तरह इसको भी स्वीकार करना होगा की ‘वीभत्स गैंग रेप ‘ एक सामाजिक बुराई है , गर्ल्स शुड टेक हर ओन केयर ‘ क्योंकि हमेशा की तरह न्याय तो नही होगा!

पर इस बार मै गलत थी।

अब एक नया देश था, लोग जागरूक थे, रेवोलुशन का टाइम था!
पहली बार देखा लोग लड़की को न्याय दिलने के लिए सड़को पर आए!

मै भी एक EMPOWERED वुमन हू!
अर्थव्यवस्था में योगदान देती हू, तो समाज सुधार में क्यों नही ?
और ब्लेम करने से सुधार नही होता, हमे खुद आगे आना होगा, बस इस सोच के साथ, मै उस समय ‘ निर्भया मूवमेंट ‘ का हिस्सा बनी!
सोशल मीडिया शेयरिंग , कैंडल मार्च , रैली आदि सब कुछ किया ,क्योंकि पहली बार न्याय की उम्मीद थी.

और पहली बार ही न्याय की कोशिश देखी! हाँ कोशिश , न्याय अभी तक नहीं हुआ।

पर तब लगा था की अब सब बदल जाएगा! अब रेप नही होंगे और अगर होंगे तो तुरंत अपराधी को सज़ा मिलेगी और लड़कियों को न्याय मिलेगा!

‘SO I WAS OPTIMISTIC FOR DEVELOPMENT OF COUNTRY INCLUDING WOMEN SAFETY’

देश बदल रहा था, अच्छे दिन आ रहे थे!
रातो रात करेन्सी बदल गयी देश की, ताकि काला धन पे कंट्रोल किया जा सके!
विदेशो मै हमारे लीडर का गर्मजोशी से स्वागत होने लगा,इसका मतलब भारत एक मजबूत देश की छवि बना रहा था!

और ‘ वीमेन रेप ‘ पहले से और बेहतर ! कुछ नहीं बदला था ! एक भ्रम था ! न्याय का दिखावा ज्यादा था।

अब टीवी में हर तरफ न्यूज़ सुनने को मिलती!

5 वर्षुया बालिका के साथ गैंग रेप और उसको काट के फेंक दिया!
7 वर्षीया बच्ची के साथ गैंग रेप, उसको बचाने के लिए उसका बच्चेदानी निकलनी पड़ी!
नवजात शिशु के साथ रेप!
१२ वर्ष की बच्ची रेप की वजह से गर्भवती।

तो अब बच्चियां थी खबरों में।
न्याय अभी भी नहीं सुनने को मिलता !

तो इसका मतलब बदला कुछ नही था!
हमेशा की तरह और बदतर!

तो मुझे फिर से यही सीखना था की ‘बच्चियों के साथ रेप एवम् क्रूररता एक सामाजिक बुराई है, इसको स्वीकार करना है , सो गर्ल्स एंड लिटिल बेबीज शुड टेक केयर ‘
ये नहीं समझ आ रहा था की छोटी बच्चियां कैसे अपना ध्यान रखेगी ?

लेकिन हाँ ये विश्वास था की ये शायद सबसे उच्च स्तर है इस बुराई का, इससे बेहतर क्या होगा?

पर नही, मेरा देश तो तरक्की पे है हमेशा से!

 

‘मेड इन इंडिया’ ड्राइव , ‘स्मार्ट सिटी प्रॉजेक्ट्स’ , ‘स्टार्टअप्स बाइ यंगस्टर्स ‘ !

बहुत जल्दी हम फिर से विश्व गुरु बनेगे!

‘वुमन रैप ‘ भी तरक्की पर!

इस बार खबर थी,
एक समुदाय विशेष की बच्ची के साथ दूसरे समुदाय के पुरुषो ने gang रेप किया और लोग रेपिस्ट को बचाने के लिए तिरंगा ले कर आगे आए!

SO THIS TIME RAPIST ARE BEING DEFENDED !

ये आज है!

आज भी मेरी अपने देश को लेकर सकरात्मक सोच है ,
शायद इसीलिए मै कई सामाजिक बदलाव कैम्पेन्स का हिस्सा हू!

हाँ में हिन्दुस्तान हू, मुझे अपने देश, और उसके विश्वा गुरु बनने के सपने पे पूरा भरोसा है, नेतृत्व पे भरोसा है, क्योंकि मैने तरक्की देखी है!

पर माफ़ कीजिए अगर आप कहते है की मुझे हिस्सा बनना चाहिए,
‘जस्टीस फॉर आसिफ़ा’ केम्पेन का!

आई एम् सॉरी!

मुझे पता है, कुछ समय ये बात रहेगी, कुछ न्याय होते हुए प्रयास दिखाए जाएँगे आसिफा के केस में  ,
क्योंकि आसिफा का केस दिखाई दे गया !

और कुछ समय बाद मे फिर से ‘वुमन रेप के ‘ एक और बेहतर रूप को एक सामाजिक बुराई के रूप में स्वीकार करुँगी
और यही कहूँगी की गर्ल्स एंड लिटिल बेबीज शुद टेक दिएर ओन केयर ‘
पर कैसे ?

किशोरी लड़कोयोँ को कराटे सीखा दूँगी ये बता कर की अजनबी , टीचर ,बॉस,कलिग ,पड़ोस वाले अंकल , अच्छे वाले भइया , सबसे अच्छा दोस्त कोई भी बलात्कारी हो सकता है।
क्या इससे में उनके सहज और स्वछन्द मन मै कम्पैनियन जेंडर के खिलाफ डर नहीं बैठा दूंगी ?

और छोटी बच्चियों को सिखाऊंगी की बाहर मत खेलो बिटिया , आदमी आ जाएगा और छोटे छोटे टुकड़े करके तुमको खा जाएगा!
किसी से चॉकलेट मत लेना !
क्या ये सब सिखाने से , कुछ ‘जानवर’ की वजह से क्या मै , सम्पूर्ण ‘पुरुष वर्ग ‘ के लिए एक वैमनस्य का बीज नहीं बोऊंगी?

शायद इसीलिए मान लिया है मैंने  ‘रेप एक सामाजिक बुराई है, इसको स्वीकार कीजिए, इसके और वीभत्स रूप का इंतज़ार कीजिये, न्याय नही होता है इसमे’

THE BIGGEST AND GREATEST MYTH IS BELIEVING THAT RANTING, CRITICIZING AND OUTRAGING ONLINE, OFFLINE, CANDLE MARCH OR ANYTHING POSSIBLE IN OUR CAPACITY WILL FORCE GOVERNMENT TO HAVE GENUINE INTEREST TO MAKE   PERMANENT AND STRONG SOLUTION FOR WOMEN SAFETY!

WE NEED TO ACCEPT THAT ITS NOT WORKING MUCH !

THE MISSING IS  ‘GENUINE INTEREST’ ABOUT ‘WOMAN SAFETY’ BY EVERY GOVERNMENT!

इसीलिए मै आप जैसी आशावादी महिलाओ के साथ नही हूँ।

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